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हिंदी न्यूज़ क्रिकेटRanji Trophy Final: मध्य प्रदेश की जीत के बाद इमोशनल हुए कोच चंद्रकांत पंडित, 23 साल बाद पूरा किया अधूरा सपना

Ranji Trophy Final: मध्य प्रदेश की जीत के बाद इमोशनल हुए कोच चंद्रकांत पंडित, 23 साल बाद पूरा किया अधूरा सपना

चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में मध्य प्रदेश 1998-99 में कार्नाटक के हाथों फाइनल हारी थी और उनका खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया था। अब 23 साल बाद बतौर कोच उन्होंने यह सपना पूरा किया।

Ranji Trophy Final: मध्य प्रदेश की जीत के बाद इमोशनल हुए कोच चंद्रकांत पंडित, 23 साल बाद पूरा किया अधूरा सपना
Lokesh Kheraलाइव हिंदुस्तान टीम,नई दिल्लीSun, 26 Jun 2022 03:30 PM

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मध्य प्रदेश ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में 41 बार की चैंपियन मुंबई को 6 विकेट से हराकर अपना पहला खिताब जीता। एमपी ने इस जीत के साथ अपने कोच चंद्रकांत पंडित के अधूरे सपने को भी पूरा किया। दरअसल, चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में मध्य प्रदेश 1998-99 में फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही थी मगर कर्नाटक से मिली 96 रनों की हार ने उनका खिताब जीतने का सपना तोड़ दिया था। वह मुकाबला भी बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला गया था।

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अब 23 साल बाद इसी मैदान पर मध्य प्रदेश को बतौर कप्तान जीत दिलाकर कोच इमोशनल हो गए। मैदान पर एंट्री के दौरान उनकी आंखें भी नम हो गई थी।

मैच के बाद कोच चंद्रकांत पंडित ने कहा "यह एक यादगार पल है। 23 साल पहले इसी मैदान पर मेरे से कुछ छूट गया था। भगवान के आशीर्वाद के साथ हम यहां वापस आए। बतौर कप्तान मैं यहां चूक गया था, मगर आदित्य श्रीवास्तव ने यह कर दिखाया। मैं चुनौतीपूर्ण नौकरी की तलाश में था। टीम में बहुत सारे युवा हैं। मैं उस राज्य में एक क्रिकेट संस्कृति विकसित करना चाहता हूं। मैं एमपी के लिए खेलता था, और इसलिए मुझे संस्कृति का पता था।"

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उन्होंने आगे कहा "जब कोच का प्रस्ताव आया, मैं इसे छोड़ नहीं सकता था। कभी-कभी आपको लगता है कि प्रतिभा है, लेकिन उन्हें क्रिकेट संस्कृति को विकसित करने की जरूरत है। आदित्य एक उत्कृष्ट कप्तान रहे हैं। जो कुछ भी चर्चा की गई है, वह उसे जमीन पर लागू करने में कभी असफल नहीं रहा है। बैटिंग परफॉर्मेंस ना होने के बावजूद वह शानदार कप्तान रहा है और उसने पूरे सीजन शानदार काम किया है। मुझे हमेशा उस पर भरोसा था।"

बात मुकाबले की करें तो मुंबई ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सरफराज खान के शतक के दम पर 374 रन बनाए थे। वहीं एमपी ने पहली पारी में 536 रन बोर्ड पर लगाकर 162 रनों की लीड हासिल कर मैच पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया था। मध्य प्रदेश के लिए यश दुबे, शुभम शर्मा और रजत पाटीदार ने शतक जड़े थे।

पहली पारी में पिछड़ने के बाद मुंबई की टीम टूट सी गई थी, नियमों के अनुसार अगर 5वें दिन तक फाइनल मैच का रिजल्ट नहीं निकलता तो पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया जाता है।

दूसरी पारी में मुंबई की पूरी टीम तेजी से रन बनाने के प्रयास में 269 रनों पर ही ढेर हो गई। कुमार कार्तिकेय ने 4 विकेट लेकर मुंबई की कमर ही तोड़ दी।

108 रनों के आसान से लक्ष्य का पीछा एमपी ने 30वें ओवर की एक गेंद रहते ही कर लिया। हिमांशू ने इस दौरान 37 तो शुभम और पाटीदार ने 30-30 रन की पारी खेली। पाटीदार ने विनिंग शॉट लगाया और वह अंत तक नाबाद रहे।
 

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