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पहले भी मांकड़िंग हो चुके हैं बटलर, जानिए किस भारतीय खिलाड़ी ने की थी शुरुआत

 jos buttler ravichandran ashwin mankading  afp

इंग्लैंड के बल्लेबाज जोस बटलर के लिए नॉन स्ट्राइकर एंड पर क्रीज छोड़कर बाहर निकल आना और रनआउट होना कोई नई बात नहीं है। आईपीएल में जयपुर में सोमवार को किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान के बीच खेले गए मुकाबले में बटलर को पंजाब टीम के कप्तान और ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इसी तरह आउट किया जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ चुका है। नॉन स्ट्राइकर एंड पर बल्लेबाज के बाहर निकलने और गेंदबाज द्वारा उसे रनआउट किए जाने को मांकड़िंग कहा जाता है।

बटलर पहले भी हो चुके हैं मांकड़िंग का शिकार 
राजस्थान की पारी के 13वें ओवर में अश्विन गेंदबाजी कर रहे थे और उन्होंने बटलर को क्रीज से बाहर देखा। अश्विन ने खुद को रोका और बटलर को रनआउट कर दिया। उसी समय प्रसारक स्टार स्पोर्टस के डगआउट में मौजूद श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने बताया कि बटलर पहले भी इसी तरह आउट हुए थे। उन्होंने बताया कि 2014 में श्रीलंका के खिलाफ मैच में सचित्रा सेनानायके ने बटलर को दो बार चेतावनी देने के बाद मांकड़िंग कर दिया था।

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अश्विन पहले भी कर चुके हैं इस तरह आउट
बटलर ही नहीं बल्कि अश्विन भी इससे पहले एक बल्लेबाज को इसी अंदाज में आउट कर चुके थे। बात 2012 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच की है। अश्विन ने लाहिरू तिरिमाने को क्रीज से बाहर निकल आने पर रनआउट कर दिया। हालांकि तत्कालीन कप्तान वीरेंद्र सहवाग ने अपील वापिस ले ली थी। सहवाग ने उस समय कहा था कि अश्विन ने तिरिमाने को इस तरह आउट करने से पहले चेतावनी भी दी थी।

जानें, क्या हैं मांकड़िंग नियम
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर वीनू मांकड के नाम पर रखा गया था। बात दिसंबर 1947 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे की है। मांकड ने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज बिल ब्राउन को उस समय रनआउट कर दिया था जब वह नॉन स्ट्राइकर एंड पर क्रीज से बाहर खड़े दिखाई दे रहे थे। मांकड ने खुद को गेंदबाजी करने से रोका और ब्राउन को रनआउट कर दिया। मांकड ने ब्राउन को दो बार इसी अंदाज में रनआउट किया था। पहला वाक्या अभ्यास मैच में हुआ था और दूसरा सीरीज के दूसरे टेस्ट में हुआ था।

डॉन ब्रैडमैन ने किया था भारतीय खिलाड़ी का बचाव
मांकड को इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई मीडिया से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई लीजेंड और टेस्ट इतिहास के महानतम बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन ने भारतीय खिलाड़ी का बचाव किया था। भारत के क्वींसलैंड के खिलाफ मैच में यह वाक्या हुआ था, जिसके बाद मांकड की खेल भावना पर सवाल उठाया गया था। लेकिन ब्रैडमैन ने कहा था,“ मैं यह नहीं समझ पा रहा था कि यह सवाल क्यों उठाया गया। क्रिकेट का नियम साफ कहता है कि नॉन स्ट्राइकर एंड पर बल्लेबाज को तब तक अपनी निर्धारित रेखा के अंदर रहना चाहिए, जब तक गेंद नहीं फेंकी जाती।”

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ब्रैडमैन ने अपनी आत्मकथा में लिखा था,“ अपने पूरे जीवन मैं यह समझ नहीं पाया कि प्रेस ने मांकड की खेल भावना पर सवाल क्यों उठाया। क्रिकेट का नियम साफ कहता है कि नॉन स्ट्राइकर एंड के बल्लेबाज को अपनी सीमा में रहना चाहिये। यदि ऐसा नहीं है तो यह नियम क्यों रखा गया है कि बल्लेबाजों को इस तरह आउट किया जा सके। नॉन स्ट्राइकर एंड से बाहर निकलकर बल्लेबाज अनुचित फायदा उठाने की कोशिश करता है।”

जानिए, कौन-कौन बना है इसका शिकार       
कपिल देव ने तीन दिसंबर 1992 को पोर्ट एलिजाबेथ में वनडे मैच के दौरान पीटर कर्स्टन को इसी तरह आउट किया था। उन्होंने हालांकि इससे पहले कर्स्टन को चेतावनी दी थी। गुस्से से भरे कर्स्टन पवेलियन लौट गए और तत्कालीन कप्तान केपलर वेसल्स को यह नागवार गुजरा। उसके बाद दूसरा रन लेने के प्रयास में वेसल्स ने अपना बल्ला इस तरह घुमाया कि कपिल को चोट लगी। उस समय मैच रैफरी नहीं होते थे तो वेसल्स को कोई सजा नहीं हुई। 

घरेलू क्रिकेट में रेलवे के स्पिनर मुरली कार्तिक दो बार बल्लेबाजों को मांकड़िंग आउट कर चुके हैं। इंग्लैंड के काउंटी सत्र में सर्रे की ओर से खेलते हुए 2012 में उन्होंने समरसेट के बल्लेबाज एलेक्स बैरो को इसी तरह आउट किया था। इसके अगले साल रणजी मैच में उन्होंने बंगाल के बल्लेबाज संदीपन दास को चेतावनी देने के बाद मांकड़िंग आउट किया। 

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लेकिन 32 साल पहले लाहौर में विश्व कप 1987 के अहम मैच के दौरान वेस्टइंडीज के पूर्व महान गेंदबाज कर्टनी वाल्श ने 11वें नंबर के बल्लेबाज सलीम जाफर को दो बार चेताया। वाल्श ने उन्हें हालांकि रन आउट नहीं किया और अब्दुल कादिर ने छक्का लगाकर पाकिस्तान को जीत दिलाई। वाल्श को खेलभावना के प्रदर्शन के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जिया उल हक ने विशेष पदक दिया था। 

सुनील गावस्कर को है नाम पर ऐतराज
भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर को इस बात पर भी ऐतराज है कि इसे मांकड़िंग क्यों कहा जाता है। वीनू मांकड़ ने सबसे पहले 1947 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऐसा किया था। गावस्कर बार-बार कहते आए हैं, ''बिल ब्राउन आउट हुए थे तो इसे मांकड़िंग क्यो कहते हैं, ब्राउंड क्यों नहीं।'' निश्चित तौर पर यह बहस जल्दी खत्म होने वाली नहीं है।

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