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ICC World Cup 2019:  तकनीक की भी जंग होगा यह वर्ल्ड कप

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वो जमाने गए जब सिर्फ बल्लेबाजी, गेंदबाजी के दम पर टीम में जगह मिल जाती थी। डेविड बून, ग्राहम गूच, राणातुंगा, मर्व ह्यूज जैसे क्रिकेटर सौ फीसदी फिट न होते हुए भी प्रदर्शन के दम पर टिके रहे। अब तकनीक ने फिटनेस के पैमाने बदल डाले है।

यह वर्ल्ड कप (ICC World Cup 2019) स्किल के साथ फिटनेस की भी कसौटी होगा। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड के टीम प्रबंधन ने टीम चयन से पहले आधा दर्जन फिटनेस टेस्ट किए। यह हिदायत भी दी कि अंतिम 11 में उसी को जगह मिलेगी जो सौ फीसदी फिट होगा। चाहे जितना बड़ा क्रिकेटर हो, अगर वह फिटनेस की कसौटी पर खरा नहीं उतरा तो उसे बेंच पर बैठना होगा। यही रवैया बीसीसीआई ने भी अपनाया है। चयनकर्ताओं ने साफ कर दिया कि फिटनेस प्राथमिकता है। भारतीय ट्रेनर ने स्पीड और ताकत बढ़ाने को खिलाड़ियों को तैयार किया।

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इस बार वर्क लोड जानने के लिए डिवाइस लगी किट
भारत के हर खिलाड़ी ने आईपीएल मैच खेले। इससे पहले टीम ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड दौरे गई थी। लगातार खेलने से पड़ने वाले दबाव को लेकर चिंता लाजिमी है। ऐसे में बीसीसीआई वर्कलोड जानने के लिए वर्ल्ड कप में एक हाइटेक डिवाइस का प्रयोग करने जा रही है। इसे टी-शर्ट के भीतर लगाना होगा। इससे फिटनेस और वर्कलोड की जानकारी मिलेगी। कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में इसका डेमो भी दिया था।

कैसे काम करेगी डिवाइस
टीम इंडिया से पहले इस डिवाइस का प्रयोग इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका  ने किया है। यह चिप एक जीपीएस की तरह शरीर को ट्रैक करेगी और शरीर से संबंधित एकदम सटीक जानकारी देगी। ये जीपीएस सिस्टम खिलाड़ी के फिटनेस लेवल के साथ-साथ शरीर के सैकड़ों गतिविधियों को ट्रैक करेगा, जिसमें दूरी, तेजी, हाइ स्पीड रनिंग और डाइनामिक स्ट्रेस लोड जैसी तमाम चीजें शामिल हैं। 

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फिटनेस मापने को सॉफ्टवेयर, डिवाइस
मेजबान इंग्लैंड ने खिलाड़ियों की फिटनेस मापने और वर्क शेड्यूल के लिए डिवाइस और साफ्टवेयर तैयार कराए हैं। इसमें हरेक का पूरा ब्यौरा दर्ज है। खिलाड़ियों के शारीरिक मेटाबॉलिज्म, डीएनए यहां तक कि कोशिकाओं तक का रिकॉर्ड है। मैच और प्रैक्टिस के दौरान खिलाड़ी की मैदान पर गति, उसके पास कितनी बार गेंद आई। उसने कितनी पार गेंदों को सटीक तरीके से रोका। खिलाड़ी ने मैदान पर कितनी कैलोरी खर्च की और उसमें कितनी बची है, जैसे साइंटिफिक रिकॉर्ड दर्ज होते हैं। इस डिवाइस के जरिए कोच मैदान के बाहर बैठकर खेल रहे खिलाड़ी को निर्देश दे सकता है।

कोचिंग में तकनीक अहम
दुनिया की सभी आला टीमें एमसीएम यानी मॉडर्न कोचिंग मैथेड अपना रही हैं। कंपनियां अलग टीमों और खिलाड़ियों के हिसाब से कोच के साथ बैठकर ट्र्रेंनिग प्रोग्राम बनाती हैं। एमसीएम में बल्लेबाज, गेंदबाज, फील्डर और विकेटकीपर के लिए अलग वर्कआउट तैयार किया जाता है। साथ ही हाई इंटेनसिटी रनिंग, चोट के खतरे को कम करने की तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है।

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