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World Cup 2019: भारत के लिए नंबर 4 सिर्फ इस बार ही नहीं हर बार रहा है सिरदर्द

विश्व कप शुरू होने में अब चंद दिनों का समय बाकी है, लेकिन भारत की नंबर 4 की ऊहापोह अभी सुलझ नहीं सका है। भारतीय टीम की इस बड़ी परेशानी पर आइए नजर डालते हैं एक नजर...

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भारत जब 2011 में दूसरी बार विश्व चैंपियन बना तो विराट कोहली और युवराज सिंह ने नंबर चार पर अहम भूमिका निभाई थी। अब 30 मई से इंग्लैंड एंड वेल्स में शुरू हो रहे 13वें क्रिकेट विश्व कप से ठीक पहले भारतीय टीम मध्यक्रम के इस खास स्थान को लेकर पसोपेश में है। इस नंबर पर सचिन सबसे सफल रहे। उनका विकल्प अब तक नहीं मिला...

अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके विजय
चयनकर्ताओं ने विश्व कप टीम में नंबर 4 के लिए विजय शंकर को अंबाती रायुडू पर तरजीह दी है। लेकिन विजय शंकर आईपीएल 2019 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। दूसरी ओर, केएल राहुल ने अच्छी फॉर्म दिखाकर इस स्थान के लिए अपना दावा मजबूत किया है। जबकि दिनेश कार्तिक और महेंद्र सिंह धौनी को भी इस स्थान पर भेजा जा सकता है। इनमें से विजय शंकर, केएल राहुल और दिनेश कार्तिक को वर्ल्ड कप का पिछला कोई अनुभव नहीं है।

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धौनी एक बार ही खेले जबकि कोहली चमके
धौनी तीन विश्व कप खेल चुके ​हैं और यह उनका चौथा विश्व कप होगा। लेकिन वह एक बार ही 2007 के विश्व कप में नंबर 4 पर बल्लेबाजी के लिए उतरे हैं। जिसमें उन्होंने 29 रन बनाए थे। तो क्या कप्तान विराट कोहली तीसरे के बजाय चौथे नंबर पर उतरना पसंद करेंगे? साल 2011 के विश्व कप में विराट कोहली इस भूमिका में खरे उतरे थे। वर्तमान भारतीय कप्तान तब पांच मैचों में नंबर 4 पर उतरे थे, जिनमें उन्होंने एक शतक की मदद से 202 रन बनाए थे। युवराज ने सिंह ने 2 मैचों में 1 शतक की मदद से 171 रन बनाए थे। 

सचिन इस नंबर पर आगे, अजहर फ्लॉप
पहले 2 विश्व कप में गुंडप्पा विश्वनाथ (छह मैच, 145 रन) ने यह भूमिका बखूबी निभाई। जबकि 1992 के विश्व कप में सचिन तेंदुलकर (7 मैच, 229 रन) के लिए यह नंबर तय था। सचिन ने भारत की ओर से विश्व कप में नंबर 4 पर सर्वाधिक 12 मैच खेले हैं, जिसमें 400 रन बनाए हैं। फिर मोहम्मद अजहरुद्दीन (9 मैच, 238 रन) का नंबर आता है। वह 1996 के विश्व कप में 6 मैचों में नंबर 4 पर उतरे पर नाबाद 72 रन की एक पारी के अलावा फ्लॉप रहे।

कई विकल्प आजमाए पर हर बार निराशा
इंग्लैंड में 1999 में हुए विश्व कप में अजय जडेजा (तीन मैच, 182 रन), सचिन (तीन मैच, 164 रन) और अजहर (दो मैच, 31 रन) ने नंबर चार की जिम्मेदारी संभाली थी। दक्षिण अफ्रीका में साल 2003 में हुए विश्व कप में मोहम्मद कैफ ने सर्वाधिक 6 मैचों में नंबर 4 पर बल्लेबाजी की थी, जिसमें उन्होंने सिर्फ 142 रन बनाए। उनके अलावा राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, युवराज सिंह और नयन मोंगिया को भी नंबर 4 पर आजमाया गया था।

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1983 में तीन महारथी आजमाए गए
भारतीय टीम जब 1983 में वर्ल्ड चैंपियन बनी थी तब यशपाल शर्मा (तीन मैच, 112 रन) और संदीप पाटिल (तीन मैच, 87 रन) ने नंबर चार पर उपयोगी योगदान दिया था। उनके अलावा दिलीप वेंगसरकर को भी दो मैचों में इस नंबर पर उतारा गया, लेकिन उन्होंने सिर्फ 37 रन बनाए। फिर वेंगसरकर ने 1987 वर्ल्ड कप में पांच मैचों में नंबर चार पर 171 रन अपने नाम किए। कोहली ने 2011 के बाद नंबर तीन पर अच्छी जिम्मेदारी निभाई। यही वजह है कि 2015 में अजिंक्य रहाणे सात मैचों में इस स्थान पर उतरे जिसमें उन्होंने 208 रन बनाए। एक मैच में सुरेश रैना ने यह जिम्मेदारी संभाली और 74 रन की पारी खेली। ये दोनों अब टीम में नहीं हैं।

2015 वर्ल्ड कप के बाद से नंबर चार का गणित

नाम   पारी रन औसत शतक पचासे
अंबाती रायुडू 14 464 85.61 1 2
एमएस धौनी 12 448 76.84 0 3
अजिंक्य रहाणे 09 375 93.75 0 4
दिनेश कार्तिक 09 264 71.35 0 2
युवराज सिंह 08 354 99.16 1 1
मनीष पांडे 07 183 92.89 1 0

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