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6 अगस्त, 2020|3:59|IST

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B'th Day Spl: जो कारनामा सचिन-धौनी-विराट नहीं कर पाए, वो युवराज ने कर दिखाया

happy birthday yuvraj singh

भारतीय टीम के सुपरस्टार रहे मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज युवराज सिंह आप अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं। 12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ में जन्मे युवराज ने वैसे तो क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। लेकिन लोगों के दिलों में उनकी जगह अब भी बरकरार है। उन्होंने भारतीय टीम को कुछ ऐसे पल दिए हैं जो हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में कैद हो गए हैं। इन्हीं में से एक है, एक ही ओवर में छह छक्के उड़ा देना। इसीलिए उनको 'सिक्सर किंग' के नाम से भी पुकारा जाता है। 

2007 में क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हुए टी20 वर्ल्ड कप में उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाज स्टुअर्ड ब्राड के एक ही ओवर में छह छक्के लगाए थे और सिर्फ मात्र 12 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। खास बात यह है कि पहली बार हो रहे टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने युवराज सिंह के अहम योगदान की वजह से टूर्नामेंट अपने नाम किया था। इसके अलावा युवराज को सन 2011 में क्रिकेट विश्व कप में उनके योगदान के लिए भी मैन ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से भी नवाजा गया था। युवराज सिंह के पिता का पिता का नाम योगराज सिंह हैं। जो एक क्रिकेटर भी रहे हैं। इसके अलावा वह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के एक जाने माने एक्टर भी है।

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सबसे सफल खिलाड़ी की बात करें तो एमएस धौनी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तान के रूप में जाने जाते हैं। उनके नाम एक कप्तान होने के नाते कई रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने टी20 विश्व कप 2007 और वनडे विश्व कप 2011 लेकिन वे कभी अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य नहीं बन पाए। वहीं विराट कोहली की बात करें तो उन्होंने अंडर-19 विश्व कप और वनडे विश्व कप जीतने का स्वाद लिया लेकिन टी20 विश्व कप नहीं। महान सचिन तेंदुलकर ने सिर्फ वनडे विश्व कप खिताब जीता। लेकिन युवराज सिंह ने अंडर-19 विश्व कप, टी20 विश्व कप और वनडे विश्व कप, तीनों ही अपने नाम किए और तीनों ही मौकों पर वो स्टार बनकर भी सामने आए। 

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कैंसर से लड़ाई

जीवन में जानलेवा संघर्ष (कैंसर) भी आया लेकिन समय को चुनौती देकर ये युवा फिर वापस लौटा। अभी भी लड़ रहा है और शायद तब तक लड़ेगा जब तक समय खुद नहीं कहता कि 'मैं पूरा हो चुका हूं'। युवराज सिंह को वनडे विश्व कप के बीच में ही अंदाजा हो गया था कि वो बीमारी से जूझ रहे हैं लेकिन उसको उजागर करने के बजाय उन्होंने देश के लिए खेलते रहने का फैसला किया और अंत में भारत जीता और वो टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बनकर उभरे।
 

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