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गौतम गंभीर: भारत का 'विश्व कप हीरो' जिसे 2 पारियों के लिए याद रखा जाएगा

लाइव हिन्दुस्तान टीम।,नई दिल्ली। Published By: Deepak
Wed, 05 Dec 2018 01:31 AM
गौतम गंभीर: भारत का 'विश्व कप हीरो' जिसे 2 पारियों के लिए याद रखा जाएगा

कभी हार नहीं मानने का जज्बा जिसने लोगों का ध्यान खींचा, प्रतिबद्धता जिसकी सभी ने प्रशंसा की और बेबाक टिप्पणियां जिस पर लोगों ने आंखे तरेरी, कुछ इसी तरह से रहा गौतम गंभीर (Gautam Gambhir retires from all format of Cricket) का भारतीय क्रिकेट में 15 साल का करियर जिसमें उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। गौतम गंभीर की सबसे बड़ी उपलब्धि है भारत को दो बार विश्व चैम्पियन बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान निभाना। गंभीर का क्रिकेट करियर यूं तो बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन उनकी दो पारियों ने क्रिकेट छोटे प्रारूप में उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में गौतम गंभीर का नाम हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों दर्ज हो गया है। ये दो पारियां थीं, साल 2007 में खेले टी20 विश्व कप के फाइनल (Gautam Gambhir's 75 runs inning in the final of 2007 T20 World Cup against Pakistan) में पाकिस्तान के विरुद्ध बनाए गए 75 रन और साल 2011 के वनडे विश्व कप फाइनल में (Gautam Gambhir's 97 runs inning in the final of 2011 ODI World Cup against Sri Lanka) श्रीलंका के विरुद्ध बनाए गए 97 रन। गौतम गंभीर की इन दो पारियों ने ही भारत के विश्व विजेता बनने की नींव रखी। महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में भारत ने पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने चिर प्रतिद्धंदी पाकिस्तान को हराकर जीता। यह देश के लिए गौरव का पल था। 

दो विश्व कप फाइनल में गौतम गंभीर बने जीत के नायक
इस विश्व कप के फाइनल मुकाबले में गौतम गंभीर की पारी ने ही भारत को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। उन्होंने 54 गेंदों में 8 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 75 रन बनाए जिसके दम पर भारत ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 157 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की टीम 19.3 ओवर में 152 रन पर ऑल आउट हो गई और भारतीय टीम ने 4 रन से मुकाबला जीतने के साथ ही 1983 के बाद पहली बार कोई विश्व खिताब जीता। वहीं, साल 2011 के वनडे विश्व कप फाइनल में गौतम गंभीर की पारी ने ही भारत को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाला और जीत की नींव तैयार की। फाइनल मैच में श्रीलंका ने भारत के सामने जीत के लिए 275 रन चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था। भारतीय टीम की शुरुआत काफी खराब रही। वीरेंद्र सहवाग (0) और सचिन तेंदुलकर (18) जल्दी आउट हो कर पवेलियन लौट गए। इनके आउट होने के बाद गौतम गंभीर ने एक छोर संभालते हुए 97 रन बनाए और टीम को जीत की राह पर ले गए। महेंद्र सिंह धौनी ने नाबाद 91 और युवराज सिंह ने नाबाद 21 रन की पारी खेलते हुए टीम को विश्व खिताब दिलाया।

यहां पढ़ें गौतम गंभीर ने संन्यास लेते वक्त क्या कहा, शायद आप अपने आंसू न रोक पाएं

भारतीय क्रिकेट में 2007 से 2011 तक का दौर गंभीर का
गौतम गंभीर के क्रिकेट करियर का अंत उसी दिन हो गया था जब उन्हें इस साल के शुरू में आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए लगातार छह मैचों में असफल रहने के बाद कप्तानी से हटने के लिए मजबूर किया गया था। उनके पास भले ही सुनील गावस्कर जैसी शानदार तकनीक नहीं थी और ना ही उनके पास वीरेंद्र सहवाग जैसी विलक्षण प्रतिभा थी। इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट के 2007 से लेकर 2011 तक के सफर को नई दिल्ली के राजिंदर नगर में पैदा होने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज गौतम गंभीर के लिए याद किया जाएगा। अपनी सीमित प्रतिभा के बावजूद गौतम गंभीर ने वीरेंद्र सहवाग के साथ अविश्वसनीय सलामी जोड़ीदार की भूमिका निभाई। साल 2009 में उन्हें आईसीसी का वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज चुना गया। जो उनकी विशिष्ट उपलब्धि थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में 13 घंटे क्रीज पर बिताने के बाद खेली गई उनकी 136 रन की पारी टेस्ट क्रिकेट में हमेशा याद रखी जाएगी। क्रीज पर पांव जमाए रखने के लिए जरूरी धैर्य और कभी हार नहीं मानने का जज्बा दो ऐसी विशेषताएं थीं जिनके दम पर गंभीर शीर्ष स्तर पर बने रहे। 

अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जानें जाते हैं गौतम गंभीर
यहां तक कि 2003 से लेकर 2007 के बीच का भारतीय क्रिकेट भी गौतम गंभीर के बिना पूरा नहीं माना जाएगा। इस बीच वह टीम से अंदर बाहर होते रहे। उन्होंने जब 2007-08 में मजबूत वापसी की तो इसके बाद सहवाग के साथ भारत की टेस्ट मैचों में सबसे सफल सलामी जोड़ी बनाई लेकिन 2011 विश्व कप के बाद उनका करियर ढलान पर चला गया तथा इंग्लैंड दौरे ने रही सही कसर पूरी कर दी। आईपीएल में हालांकि उन्होंने अपनी नेतृत्वक्षमता का शानदार परिचय दिया। कोलकाता नाइटराइडर्स ने उनकी अगुवाई में ही आईपीएल के दो खिताब जीते। वह भारत के भी कप्तान बनना चाहते थे। उन्होंने इच्छा भी जताई थी लेकिन तब महेंद्र सिंह धौनी एक सफल कप्तान के रूप में स्थापित हो चुके थे। गौतम गंभीर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए भी याद रखे जाएंगे। सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियां काफी सुर्खियों में रहती हैं। गौतम गंभीर के करियर की दूसरी पारी के भी घटनाप्रधान रहने की पूरी संभावना है। चाहे वह बीसीसीआई के बोर्ड रूम में हो या जनता के प्रतिनिधि के रूप में। उन्हें किसी का भय नहीं और वह हमेशा अपने दिल की बात कहने में विश्वास रखते हैं।

VIDEO: भारत को दो विश्व खिताब दिलाने वाले गौतम गंभीर ने क्रिकेट को कहा अलविदा

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