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फादर्स डे स्पेशल: पिता ने खुद की जरूरतों में कटौती कर एमएस धौनी को बनाया स्टार

ms dhoni with his father

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धौनी आज जिस मुकाम पर हैं उसके पीछे उनके पिता का त्याग है। माही को धौनी बनाने में उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। मेकन में पंप ऑपरेटर की नौकरी करते बेटे को क्रिकेट खिलाड़ी बनाने के लिए उन्होंने खुद की जरूरतों में कटौती की, लेकिन बेटे को किसी चीज में कमी नहीं होने दी।

धौनी के पिता पान सिंह फुटबॉल प्रेमी थे। जवानी के दिनों में वह साइकिल से 20-20 किलोमीटर तक जाकर फुटबॉल के मैच देख आते थे। उनकी सबसे छोटी संतान महेंद्र सिंह धौनी जब क्रिकेटर बने और उसमें राज्य स्तर तक पहुंचे तो उनका रुझान भी क्रिकेट की ओर हो गया। मेकॉन में पंप ऑपरेटर के छोटे से पद पर रहने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के लिए खेल के किसी सामान की कमी नहीं होने दी। उनको भरोसा था कि उनका बेटा एक दिन क्रिकेट में मुकाम बनाएगा। बस डरते थे कि कहीं बेटे को चोट न लग जाए। यह डर उनमें आज भी है। जब धौनी का पहली बार चयन इंडिया ए टीम में हुआ था तो वह रिटायर हो चुके थे। फिर भी उन्होंने 30 हजार रुपये अपने बेटे को दिए। बेटे को जब कहीं खेलने जाना होता एक बार वह उसे जरूर पूछते तुम्हें पैसे की जरूरत तो नहीं।

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धौनी को यह शंका रहती थी कि उसके माता-पिता मैच देखेंगे तो वह अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाएगा। पान सिंह कहते हैं कि इस वजह से कई बार स्टेडियम के बाहर दीवार पर से अपने बेटे को खेलते देखते थे ताकि उसे पता ना चले। पान सिंह चाहते हैं कि क्रिकेट से धौनी की विदाई सम्मानजनक तरीके से हो। यानी बेहतरीन फॉर्म में रहते हुए वह क्रिकेट को अलविदा कहे। 

धौनी को पिता का संदेश
बेहतर खेलें, अपना शत-प्रतिशत दें। भारतीय टीम इस विश्वकप में विजेता बने, यही दुआ है और एक बार फिर हमें गर्व करने का मौका मिले। सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं। 

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  • Web Title:Fathers Day Special Mahendra Singh Dhoni father sacrifices a lot for him to become big cricket star