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27 जनवरी, 2020|9:27|IST

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EXCLUSIVE: BCCI के एंटी डोपिंग मैनेजर ने कहा- पृथ्वी शॉ के बैन के बाद वाडा को अपनी पॉलिसी पर पुनः विचार की जरूरत

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को डोपिंग के आरोप में 8 महीने के लिए बैन कर दिया है। शॉ डोप टेस्ट में फेल हुए और बीसीसीआई ने मंगलवार को 19 साल के इस सलामी बल्लेबाज को खेल के सभी फॉरमैट से बैन कर दिया गया है। बोर्ड ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि पृथ्वी ने गलती से प्रतिबंधित पदार्थ लिया जो आम तौर पर खांसी की दवाई में पाया जाता है।

पृथ्वी ने बीसीसीआई के डोपिंग रोधी परीक्षण कार्यक्रम के तहत 22 फरवरी 2019 को इंदौर में सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के दौरान मूत्र का नमूना उपलब्ध कराया था। परीक्षण के बाद उनके नमूने में टरबुटैलाइन पाया गया। बीसीसीआई विज्ञप्ति में कहा गया है, 'टरबुटैलाइन वाडा की प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में है और इसे प्रतियोगिता के दौरान या इससे इतर नहीं लिया जा सकता है।'

पृथ्वी शॉ ने ट्वीट किया, 'मैं पूरी ईमानदारी के साथ इस फैसले को स्वीकार करता हूं। मै अभी पिछले टूर्नामेंट में लगी चोट से उबर रहा हूं और इस खबर ने मुझे झकझोर दिया है।' बीसीसीआई ने विज्ञप्ति में कहा, 'शॉ ने अनजाने में प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन किया। यह पदार्थ आमतौर पर खांसी की दवा में पाया जाता है।' शॉ का प्रतिबंध पूर्व से प्रभावी माना गया है जो कि जो 16 मार्च 2019 से शुरू होकर 15 नवंबर 2019 तक चलेगा। 

बीसीसीआई के एंटी डोपिंग मैनेजर डॉक्टर अभिजीत साल्वी ने हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने पृथ्वी शॉ के केस के बारे में बात की और साथ ही कहा कि वाडा को अपनी पॉलिसीज़ पर दोबारा ध्यान देने की जरूरत है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा-

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सवालः पृथ्वी शॉ के केस में आखिरकार हुआ क्या?

जवाबः जैसा कि आप जानते हैं कि फरवरी में मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान पृथ्वी शॉ को जुकाम हो रखा था और उन्होंने इसके बारे में अपने पिता से बात की। उनके पिता ने उन्हें सलाह दी कि वो किसी लोकल दुकान से कफ सिरप लेकर पी लें, उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि सिरप में कुछ प्रतिबंधित पदार्थ हो सकता है, जिससे वो डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जा सकते हैं।

सवालः पृथ्वी ऐसे क्रिकेटर हैं, जो इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुके हैं, ऐसे में उन्हें और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था। लेकिन और भी खिलाड़ी इस तरह से डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जा सकते हैं, आपको लगता है कि बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को इसके बारे में अच्छे से जागरुक किया है?

जवाबः 2010 से ही बीसीसीआई ने एंटी डोपिंग प्रोग्राम को काफी तेजी से चलाया है, डोमेस्टिक सीजन से पहले हर साल अधिकारी हर स्टेट में जाते हैं और सभी खिलाड़ियों का इस तरह प्रोग्राम में शामिल होना अनिवार्य होता है। पिछले 9 साल से हम इस तरह के एजुकेशन प्रोग्राम चला रहे हैं। इसके अलावा बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए 24X7 एंटी डोपिंग हेल्पलाइन भी बनाई, जिस पर आप कॉल करके पता कर सकते हैं कि जो दवाई आप ले रहे हैं, उसमें कोई प्रतिबंधित पदार्थ है या नहीं।

सवाल: क्या आप उस प्रतिबंधित पदार्थ के बारे में और कुछ बता सकते हैं, जो पृथ्वी शॉ ने कफ सिरप में लिया था?
जवाबः शॉ डोप टेस्ट में टरबुटैलाइन की वजह से पॉजिटिव पाए गए, जो आमतौर पर कफ सिरप में होता है, जो मैच के दिन और मैच ना होने के दिन के लिए भी प्रतिबंधित है। ये सभी एथलीटों के लिए किसी भी समय प्रतिबंधित ही है। पिछले साल यूसुफ पठान और अभिषेक भी इसी प्रतिबंधित पदार्थ के लिए डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे।

सवालः क्या आपको लगता है कि इन पदार्थों से खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ता है?
जवाबः नहीं, अगर आप क्रिकेट की बात करें तो नहीं, लेकिन साइकलिंग या ज्यादा लंबी दौड़ वाले खेलों में इन पदार्थों का सेवन करने से असर पड़ सकता है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि टरबुटैलाइन के सेवन से क्रिकेटरों के प्रदर्शन पर कोई असर पड़ सकता है।

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सवालः ऐसे में क्या आपको लगता है कि वाडा को क्रिकेट जैसे खेलों के लिए कुछ अलग नियम रखने चाहिए?
जवाबः मेरी निजी राय हां है। ऐसी कई दवाइयां हैं जिनके सेवन से क्रिकेटरों के खेल पर कोई असर नहीं पड़ता है। ऐसे में भविष्य में हमें रिप्रजेंटेशन की जरूरत पड़ सकती है और वाडा को अपनी पॉलिसी पर फिर से सोचने की जरूरत पड़ सकती है कि खेल के हिसाब से प्रतिबंधित पदार्थों की लिस्ट बने ना कि जनरल लिस्ट बने।

सवालः पृथ्वी शॉ पर लगाया गया बैन कैसे कैलकुलेट किया गया?
जवाबः हाल में वाडा के नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं, प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के लिए चार साल का बैन है, लेकिन वो हार्डकोर प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के लिए है और उनके लिए जिनसे खिलाड़ियों के खेल पर असर पड़ता है। कुछ ऐसे पदार्थ हैं, जिनको स्पेसीफाइड पदार्थ की कैटेगरी में रखा जाता है, जो खाने में, सप्लिमेंट्स में या दवाइयों में मिलते हैं और डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाते हैं। उनके सेवन के लिए कोई सजा नहीं से लेकर दो साल तक का बैन हो सकता है। वो इस पर निर्भर करता है कि एथलीट की कितनी गलती है। इस मामले में सजा के लिए 0-8 महीने, 8-16 महीने और 16-24 महीने के बैन की सजा है। बीसीसीआई को लगा कि शॉ इस मामले में मिडिल ब्रैकेट में आते हैं इसलिए उन्हें आठ महीने के लिए बैन किया गया।

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  • Web Title:Exclusive Prithvi Shaw ban WADA needs to rethink and make sports specific policies says BCCI anti doping manager