तो कोरोना वैक्सीन की वजह से हुई थी शेन वॉर्न की मौत! 4 साल बाद बेटे ने किया बड़ा दावा
महान स्पिनर शेन वॉर्न के निधन के चार साल बाद उनके बेटे जैक्सन ने दावा किया है कि इस दिग्गज स्पिनर की मौत संभवतः कोविड के उन 'तीन या चार' टीकों के कारण हुई थी जो उन्हें 'काम करने के लिए मजबूरन लेने पड़े थे।'

महान स्पिनर शेन वॉर्न के निधन के चार साल बाद उनके बेटे जैक्सन ने दावा किया है कि इस दिग्गज स्पिनर की मौत संभवतः कोविड के उन 'तीन या चार' टीकों के कारण हुई थी जो उन्हें 'काम करने के लिए मजबूरन लेने पड़े थे।'
जैक्सन ने '2 वर्ल्ड्स कोलाइड पॉडकास्ट' पर बात करते हुए अपने पिता की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी स्वीकार किया। वॉर्न का 2022 में थाईलैंड में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय उनकी उम्र 52 वर्ष थी।
मुझे पक्का लगता है टीके की वजह से हुई मौत: जैक्सन वॉर्न
जैक्सन ने कहा, ‘मुझे पक्का लगता है कि इसमें (कोविड टीके का) हाथ था। मुझे नहीं लगता कि अब यह कहने से किसी तरह का विवाद पैदा होगा। भले ही डैड (पिताजी) को पहले से ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लेकिन मुझे लगता है कि टीका लगाने के कारण उनकी बीमारी खुलकर सामने आ गई। यह एक ऐसी बात है जिससे मैं हमेशा सोचता रहता हूं।’
उन्होंने कहा, ‘जैसे ही मैंने (वॉर्न की मौत की खबर मिलने के बाद) फोन रखा तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि मैंने तुरंत सरकार को दोषी ठहराया। मैंने तुरंत कोविड और टीके को दोषी ठहराया।’
जैक्सन ने कहा कि उन्होंने शोक सभा में अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने से खुद को बड़ी मुश्किल से रोका था।
उन्होंने कहा, ‘शायद यह समझदारी भरा कदम था कि मैंने ऐसा नहीं किया, अगर मैंने ऐसा किया होता तो मेरी स्थिति बिल्कुल अलग होती। लेकिन मुझे यही महसूस हुआ।’
'डैड ठीक थे, उन्होंने 3 या 4 डोज लगवाए थे'
जैक्सन ने कहा, ‘पहले भी दिल का दौरा पड़ने से बहुत से लोग मर रहे थे। लेकिन डैड ठीक थे। मुझे लगता है उन्होंने तीन या चार (टीके) लगवाए होंगे। वह टीका नहीं लगवाना चाहते थे लेकिन अन्य लोगों की तरह काम करने के लिए उन्हें मजबूरन इन्हें देना पड़ा।’
उन्होंने कहा, ‘मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहता हूं क्योंकि इससे केवल गुस्सा ही बढ़ता है। गुस्सा किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है।’
वॉर्न की जीवनशैली के बारे में जैक्सन ने कहा कि धूम्रपान और शराब पीने के बावजूद वह अपेक्षाकृत स्वस्थ थे।
उन्होंने कहा, ‘उस समय डैड स्वस्थ थे, खुश थे। वे काफी समय बाद इतने अच्छे दिख रहे थे। वह जरूर धूम्रपान करते थे और शराब पीते थे, लेकिन 80 और 90 वर्ष की उम्र के कई लोग डैड की तुलना में कहीं अधिक धूम्रपान करते हैं और शराब पीते हैं।’
वॉर्न निधन से कुछ महीने पहले कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। जब उनकी अचानक मौत हुई तो तब वह किसी तरह की गंभीर बीमारी से नहीं जूझ रहे थे।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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