
शेफाली वर्मा ने वुमेंस वर्ल्ड कप फाइनल में POTM का अवॉर्ड जीत मचाया तहलका, तोड़ा ये ‘महारिकॉर्ड’
शेफाली वर्मा ने आईसीसी वुमेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में अपने ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर धमाल ही मचा दिया। अर्धशतक जड़ने के बाद उन्होंने 2 विकेट लिए। इस धुआंधार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।
शेफाली वर्मा…वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 के लिए जब भारतीय स्क्वॉड का चयन ही हुआ था तब भी इस नाम पर खूब चर्चाएं हुई थी क्योंकि शेफाली का नाम वर्ल्ड कप स्क्वॉड में नहीं था। एक ऐसी मैच विनर कैसे ही बाहर बैठ सकती है। लेकिन भगवान का लिखा कौन बदल सकता है। सेमीफाइनल से पहले प्रतिका रावल चोटिल हुईं और शेफाली को सीधा आईसीसी वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 के नॉकआउट मैच खेलने को मिले। सेमीफाइनल में भले ही वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं हो, मगर साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल जंग में तो उन्होंने महफिल ही लूट ली। पहले बैटिंग करते हुए उन्होंने 87 रनों की शानदार पारी खेली। हालांकि वह शतक से चूक गईं, मगर उन्होंने रही सही कसर गेंदबाजी में 2 विकेट लेकर पूरा कर दी।

शेफाली टीम इंडिया की रेगुलर गेंदबाज नहीं है, मगर कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मौके की नजाकत को समझते हुए वर्ल्ड कप फाइनल में उनकी इस स्किल का इस्तेमाल किया और शेफाली ने कप्तान को निराश नहीं किया।
शेफाली वर्मा को उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।
शेफाली वर्मा इसी के साथ वुमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बन गईं हैं। उन्होंने 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है।
शेफाली वर्मा ने वुमेंस वर्ल्ड कप फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड 21 साल और 278 दिन की उम्र में जीता। वहीं इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की जेस डफिन के नाम था, जिन्होंने 2013 वुमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ 23 साल और 235 दिन की उम्र में यह अवॉर्ड जीता था।
प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड को लेने पहुंची शेफाली वर्मा ने कहा, “बिल्कुल। मैंने शुरुआत में ही कहा था कि भगवान ने मुझे कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है। और आज वो बात सच साबित हुई। और मुझे बहुत खुशी है कि हमने आखिरकार वर्ल्ड कप जीत लिया। मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। (टीम में इतनी देर से बुलाए जाने के बाद आपने खुद को कैसे बदला?) ये मुश्किल था, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। कि मुझे खुद पर भरोसा रहेगा। और अगर मैं खुद को शांत रखूं, तो मैं कुछ भी कर सकती हूं। तो उस विश्वास और उस शांति ने और मेरे माता-पिता ने बहुत साथ दिया। मेरे माता-पिता, मेरे दोस्त, मेरे भाई। मुझे लगता है कि सभी ने बहुत साथ दिया। सब मुझे बताते थे कि कैसे खेलना है। और ये फाइनल मेरे लिए, पूरी टीम के लिए कितना अहम है। तो आज मैं बस यही सोच रही थी कि रन कैसे बनाऊँ। टीम जीतनी चाहिए।
(आज आपकी सोच क्या थी?) हां, बिल्कुल। आज मेरा मन साफ था। और मैंने जाकर अपनी योजनाओं पर काम किया। मुझे बहुत खुशी है कि वो पूरी हुईं। और इसके साथ ही, स्मृति दीदी मुझसे बहुत बात कर रही थीं। हरमन दीदी हमेशा मेरा साथ देती थीं। और मुझे लगता है कि सभी ने मेरा बहुत साथ दिया। सभी टीम के साथी बहुत स्वागतशील और सहयोगी थे।
(सीनियर्स का आपके लिए क्या संदेश था?) टीम ने बस अपना दिल खोल दिया और मुझे अपना खेल खेलने के लिए कहा। अपना खेल मत छोड़ो। इसलिए, मुझे लगता है कि जब आपको इतनी स्पष्टता मिलती है, तो आप बहुत खुश होते हैं। (सचिन आज बालकनी में आपको देख रहे थे, आपको कैसा लगा?) नहीं, यह मेरे लिए बहुत यादगार पल है। लेकिन जब मैंने सचिन सर को देखा, तो मुझे एक अलग बढ़ावा मिला। मैं सचिन सर से बात करती रहती हूं। वह हमेशा मुझे आत्मविश्वास देते हैं। और मुझे लगता है कि वे दिग्गज हैं। वे क्रिकेट के उस्ताद हैं। लेकिन मुझे उनसे बहुत प्रेरणा मिली। जब मैं उनसे बात करता हूं तो मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है। उन्हें देखने के बाद मुझे बहुत प्रेरणा मिली।”






