उसने मुझे विव रिचर्ड्स और महेला जयवर्धने की याद दिला दी; सुनील गावस्कर ने किसके लिए कहा?
महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के हीरो संजू सैमसन की तारीफ में बड़ी बात कह दी है। वह दाएं हाथ के इस बल्लेबाज से इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने कहा है कि संजू ने उन्हें विवियन रिचर्ड्स और महेला जयवर्धने की याद दिला दी है।

महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के हीरो संजू सैमसन की तारीफ में बड़ी बात कह दी है। वह दाएं हाथ के इस बल्लेबाज से इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने कहा है कि संजू ने उन्हें विवियन रिचर्ड्स और महेला जयवर्धने की याद दिला दी है।
संजू सैमसन की टी20 विश्व कप में भारत के प्लेइंग इलेवन तक में जगह पक्की नहीं लग रही थी लेकिन अब उनका नाम हर क्रिकेटप्रेमी की जुबान पर है। वह सिर्फ 5 ही मैच खेले लेकिन प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे। वेस्टइंडीज के खिलाफ 'करो या मरो' वाले मुकाबले में उन्होंने नाबाद 97 रन बनाकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। फिर सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन की धाकड़ पारी खेली। उसके बाद फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रनों की धुआंधार पारी खेली। 3 लगातार मैचों में अर्धशतक। वर्चुअल क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में शतक। वह भारत की तरफ से किसी एक टी20 विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए।
संजू सैमसन के इसी धाकड़ खेल के कायल लिटल मास्टर सुनील गावस्कर हो चुके हैं। उन्होंने स्पोर्ट्स्टार के अपने कॉलम में लिखा, 'क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी की शुद्धता आमतौर पर एक गुण होती है औऱ कभी-कभार 50 ओवर के खेल में भी ऐसा होता है लेकिन खेल के सबसे छोटे फॉर्मेट में तो मुश्किल से ही कभी होता है। सैमसन ने अपनी सभी तीनों अर्धशतकीय पारियों में क्लासिकल क्रिकेट शॉट ही खेले। हाल के समय की कुछ सबसे बेहतरीन पुल और हुक खेले। जोफ्रा आर्चर की खतरनाक स्पीड के खिलाफ उनका पुल मुझे विव रिचर्ड्स की याद दिलाता है। हालांकि उनकी ज्यादातर बल्लेबाजी श्रीलंका के स्टाइलिस्ट महेला जयवर्धने जैसी थी।'
सुनील गावस्कर ने आगे लिखा, 'संजू सैमसन इस बात के सबसे बड़े उदाहरण हैं कि कैसे एक पारी से फॉर्म बदल सकती है। वह तो टी20 विश्व कप से ठीक पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैच की टी20 सीरीज में बुरी फॉर्म की वजह से टूर्नामेंट की शुरुआत में कही कहीं सीन में ही नहीं थे। रिंकू सिंह के पिता की तबीयत खराब हुई निधन से पहले और वह उन्हें देखने के लिए चले गए। जब तक वह लौटते, टीम मैनेजमेंट ने सोचा कि उन्हें न खिलाना ही बेहतर है और सैमसन को वापस लाने का फैसला हुआ। इसका मतलब था कि एक बार फिर टॉप बैटिंग ऑर्डर में राइन और लेफ्ट हैंड का कॉम्बिनेशन। यहां तक कि अभिषेक शर्मा भी लड़खड़ा गए लेकिन सैमसन ने मौके को लपका और तीन नायाब पारियां खेली जो आने वाले वर्षों तक याद की जाएंगी।'
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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