वैभव सूर्यवंशी के धमाल मचाते ही वायरल हो रहा संजू सैमसन का ये बयान, कहा- ईश्वर की कृपा से मैंने…
Sanju Samson Interview: भारत बनाम जिम्बाब्वे सीरीज में वैभव सूर्यवंशी के प्लेयर ऑफ द सीरीज जीतने के साथ ही संजू सैमसन की जगह को लेकर चर्चा होने लगी। ऐसे समय में संजू का बयान तेजी से चर्चा में है। जियोहॉटस्टार को दिया उनका लंबा इंटरव्यू है।

Sanju samson Interview: जिम्बाब्वे में उधर वैभव सूर्यवंशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब जीता, इधर भारत में चर्चा होने लगी कि संजू सैमसन की वापसी अब भारतीय टीम के लिए मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उनकी जगह अब वैभव ने ले ली है। हालांकि, अभिषेक शर्मा बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तब भी उन्हें संजू के मुकाबले छूट मिली हुई है और इसका कारण अभिषेक का युवा होना हो सकता है। वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार पारी और विश्व कप 2026 के प्लेयर ऑफ द सीरीज संजू सैसमन ने के बीच प्रतिस्पर्धा की चर्चा के बीच ही 31 वर्षीय दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज संजू का इंटरव्यू में दिया गया बयान तेजी से चर्चा में है। इस इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर बात की है कि मुझे अब कोई इस उम्र में खेलने के बारे में नहीं बता सकता। उन्होंने 2028 विश्व कप को लेकर भी बात करते हुए कहा है कि अगर अच्छा करूंगा और मौका मिलेगा तो खेलूंगा। हालांकि, उनके बयान में एक तरह की संतोष भरी नकारात्मकता साफ झलकती दिखाई दी, जिसमें संजू भविष्य में मिलने वाले मौकों के लिए उत्सुक तो हैं, लेकिन मन ही मन यह भी मान चुके हैं कि अगर मौका नहीं मिलता है तो भी कोई शिकायत नहीं है।
संजू ने कहा ईश्वर की कृपा से मैंने बहुत कुछ हासिल किया
जियोहॉटस्टार के साथ एक साक्षात्कार में संजू सैसमन ने अपने भविष्य और बीते हुए समय के बारे में साफ- साफ बात की। उन्होंने टीम इंडिया में चल रही प्रतिस्पर्धा के बारे में बात करते हुए कहा- "मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश में लगातार प्रतिस्पर्धा चलती रहती है और मैंने 2026 टी20 विश्व कप से पहले ही तय कर लिया था कि मैं इसका हिस्सा नहीं बनूंगा। मैं बस खेल का आनंद लेना चाहता हूं। ईश्वर की कृपा से मैंने बहुत कुछ हासिल किया है। मैं अब 31 साल का हूं और मेरे पास अभी कुछ साल बाकी हैं। इसलिए, मैंने अपनी शर्तों पर खेलने का फैसला किया है। कोई मुझे यह नहीं बताएगा कि बल्लेबाजी कैसे करनी है या क्या करना है। संजू अपने लिए फैसला करेगा।" उन्होंने आगे कहा "पूरे सम्मान के साथ, मैं खेलूंगा, खेल का आनंद लूंगा, एक अच्छा साथी खिलाड़ी बनूंगा और टीम का समर्थन करूंगा, लेकिन मैं इसे अपने तरीके से करूंगा। 2024 विश्व कप के बाद मैंने 2026 विश्व कप में खेलने की उम्मीद भी नहीं की थी। एक समय तो मैं 14 या 15 सदस्यीय टीम में भी नहीं था। तो मैं 2028 के लिए कैसे योजना बना सकता हूं? अगर मैं वहां हूं, अगर टीम को मेरी जरूरत है और अगर मैं अच्छा खेल रहा हूं, तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। अगर नहीं, तो मैं बहुत आभारी हूं। कोई भी मुझसे यह उपलब्धि नहीं छीन सकता।"
विश्व कप सेमीफाइनल की मन: स्थिति के बारे में बताया
आंतरिक आत्मविश्वास ने उन्हें 2026 विश्व कप की सबसे कठिन चुनौतियों से पार पाने में मदद की। जब आलोचकों ने वानखेड़े स्टेडियम में सेमीफाइनल से पहले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर के खिलाफ उनके पिछले संघर्षों की ओर इशारा किया, तो सैमसन ने उन सभी बातों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। सैसमन ने कहा "जब आप भारतीय टीम के लिए रन बनाते हैं, तो आप और भी जिम्मेदार हो जाते हैं, क्योंकि आपको पता होता है कि आपको रन बनाते रहना है। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप सेमीफाइनल से पहले, हमारा शीर्ष क्रम कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर रहा था। बहुत से लोग आकर मुझसे कह रहे थे, 'इंग्लैंड है, आर्चर गेंदबाजी कर रहा है, उसने तुम्हें पहले 3-4 बार आउट किया है, ये हुआ वो हुआ।' लेकिन मुझे पूरा भरोसा था। मैंने कुछ भी जोर से नहीं कहा। अगर आप ज्यादा बोलते हैं, तो आप घमंडी लगते हैं और यह मेरे विश्वास के खिलाफ है। इसलिए, मैंने चुपचाप इशारा किया, 'हां, देखते हैं।' लेकिन मेरी योजनाएं तैयार थीं। मुझे पता था कि यह संजू सैमसन एक साल पहले वाला संजू सैमसन नहीं है। वेस्ट इंडीज के खिलाफ उस पारी के बाद मुझे खुद पर बहुत भरोसा हुआ और मैं अपने आप पर पूरी तरह आश्वस्त था। शक की कोई गुंजाइश नहीं थी। मैं अपने देश के लिए यह करने वाला था और कोई इसे रोक नहीं सकता था।"
आत्मविश्वास में होते हैं तो कोई आपत्ति नहीं होती
सैमसन ने आत्मविश्वास से भरे होने के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा "जब आप आत्मविश्वास से भरे होते हैं, तो आपको समय लेने में कोई आपत्ति नहीं होती। मैंने विश्व कप फाइनल में सैंटनर के खिलाफ एक ओवर खेला था जिसमें मुझे चार डॉट बॉल का सामना करना पड़ा था। लेकिन मुझे पूरा यकीन था कि भले ही मुझे वहां चार डॉट बॉल का सामना करना पड़ा हो, मैं बाद में दूसरे छोर से दो छक्के लगा सकता हूं। मुझे पूरी तरह से स्पष्टता थी।"
ओपनिंग स्लॉट को लेकर चल रही है जंग
बता दें कि सैमसन का आत्मविश्वास भरा यह बयान चर्चा में है जब टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में सलामी बल्लेबाजों की भरमार है। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन लंबे समय से टीम की स्थिर जोड़ी रहे हैं, जो आक्रामक और जोखिम भरी खेल शैली में मैच जिताने में माहिर हैं। हालांकि, अभिषेक ने हाल ही में कुछ अति आक्रामक और अपरिपक्व शॉट चयन के बावजूद अपनी कम उम्र के कारण चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन से काफी छूट पाई है। इसी बीच, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे में उभरते हुए युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए सैमसन को टीम से बाहर कर दिया गया। वहीं, आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में लगातार गेंदबाजों की धुलाई करने वाले प्रभसिमरन सिंह को जिम्बाब्वे सीरीज के लिए चुना गया। विडंबना यह है कि भारत के दो सबसे तकनीकी और मानसिक रूप से परिपक्व सलामी बल्लेबाज, शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल, टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम से पूरी तरह बाहर हैं, जबकि भारतीय सपाट पिचों पर छक्के लगाने का जुनून विदेशी मैदानों पर टीम को पछाड़ देता है।



