जूते खरीद लेंगे तो फिर खाएंगे कैसे? साकिब हुसैन की ये स्टोरी आपको अंदर तक झकझोर देगी
साकिब को पता था कि 10-15 हजार के जूते यानी बॉलिंग स्पाइक्स खरीदेंगे तो फिर वे खाएंगे क्या? उनके मां-बाप को अपने बेटे पर गर्व है, क्योंकि बेटे ने कभी भी किसी भी चीज के लिए जिद नहीं पाली।
IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आग उगलने वाले प्रफुल हिंगे और साकिब हुसैन थे। हिंगे की तो खूब चर्चा है, लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद के लिए इसी मैच में चार विकेट लेने वाले साकिब हुसैन को लेकर बात कम हो रही है। अगर आप उनकी स्टोरी को जान लेंगे तो आपका दिल भी पसीज जाएगा। एक समय ऐसा था, जब उनके पास जूते (स्पाइक्स) खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, तो उनका मां ने अपने जेवर बेचकर जूते खरीदे। साकिब को पता था कि 10-15 हजार के जूते यानी बॉलिंग स्पाइक्स खरीदेंगे तो फिर वे खाएंगे क्या? उनके मां-बाप को अपने बेटे पर गर्व है, क्योंकि बेटे ने कभी भी किसी भी चीज के लिए जिद नहीं पाली।
21 साल के साकिब हुसैन ने 24 रन देकर 4 विकेट राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चटकाए। हालांकि, 19 साल में ही उनको आईपीएल का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया था। कोलकाता नाइट राइडर्स यानी केकेआर ने उन्हें 2024 के सीजन में 30 लाख रुपये की बेस प्राइस में खरीदा था, लेकिन कोई भी मैच उनको खेलने के लिए नहीं मिला। अगले साल उन्हें रिलीज कर दिया गया और 2026 ऑक्शन में साकिब हुसैन पर एसआरएच ने दांव खेला और उन्होंने दिखा दिया कि वे मौका मिलने पर क्या कर सकते हैं।
साकिब की कहानी?
साकिब हुसैन की स्टोरी कोलकाता नाइट राइडर्स यानी केकेआर की टीम ने शूट की थी। बिहार के गोपालगंज जिले से आने वाले साकिब हुसैन के पिता जी खेती करते थे, लेकिन घुटने में चोट की वजह से वह खेती करने में भी असमर्थ थे। साकिब ने बताया था कि हमने ही उनको मना किया था कि नहीं हो पाएगा। बाप ने बताया था कि खाने के लिए भी सोचना पड़ता था।
साकिब ने बताया था कि उनको देश सेवा करनी थी और आर्मी में जाना था। वे पास के ही आर्मी ग्राउंड में दौड़ करते थे। कुछ क्रिकेट के चाहने वालों ने उनको देखा और उनके पिता से कहा कि यह वह तेज है, इसे क्रिकेट खिलाओ। साकिब ने पहले टेनिस बॉल से खेलना शुरू किया था और कुछ पैसे उससे कमाते थे। साकिब के पिता बताते हैं कि उन्होंने ठान लिया था कि अब सिर्फ क्रिकेट खेलना है।
साकिब बताते हैं, "जूता इसके लिए काफी महंगा आता है। बॉलिंग स्पाइक्स जो होते हैं, वह 10-15 हजार के आते हैं, तो हम लोग तो ऐसे हैं कि अगर जूते लाएंगे तो फिर खाएंगे कहां से?" साकिब की मां ने बताया, “वह आकर रोने लगा कि मम्मी हमको जूते चाहिए। हम कैसे खेल पाएंगे। मेरे पास भी पैसा नहीं था तो मैंने जेवर बेच दिए और उसके लिए जूते खरीद दिए।”
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Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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