
सचिन तेंदुलकर ने युवा खिलाड़ियों को दिया सबसे बड़ा 'गुरु मंत्र', बोले- आप तभी आगे बढ़ेंगे, जब…
महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने मंगलवार को कहा कि युवा खिलाड़ी जुनून और जोश के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। उन्होंने युवाओं को ‘मुश्किल चुनौतियों का सामना करने’ और दूसरों के लिए मिसाल कायम करने की सलाह दी।
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले पूर्व महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने युवा खिलाड़ियों को सफल होने के लिए गुरुमंत्र दिया है। सचिन तेंदुलकर ने मुंबई में मंगलवार को कहा कि युवा खिलाड़ी जुनून और जोश के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को ‘मुश्किल चुनौतियों का सामना करने’ और दूसरों के लिए मिसाल कायम करने की सलाह दी। तेंदुलकर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें क्रिकेट से इतना अधिक लगाव था कि वह इस खेल में आगे बढ़ने के लिए हर संभव प्रयास करने को भी तैयार रहते थे। उन्होंने कहा कि वह गर्मी की छुट्टियों में लगभग दो महीने तक रोजाना 12 घंटे तक अभ्यास करते थे।
तेंदुलकर ने ‘इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (आईएसपीएल)’ के तीसरे सत्र की नीलामी से पहले कहा, ‘‘मैंने क्रिकेट खेलना इसलिए शुरू किया, क्योंकि मुझमें जुनून था। मुझे इस खेल से बेइंतहा प्यार था और मैं बस भारत के लिए खेलना चाहता था। मैं इसके लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार था।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मेरे जीवन में कई पड़ाव आए। इसमें स्कूल क्रिकेट भी था और मैं कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार था। एक दौर ऐसा भी था जब मैंने अपनी गर्मी की छुट्टियों में लगातार 55 दिनों तक 12 घंटे अभ्यास किया और आखिरकार मैं बीमार पड़ गया। अगर जुनून और जोश नहीं है, तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे।’’
तेंदुलकर ने कहा कि एक खिलाड़ी के विकास के लिए कई चीजों का एक साथ आना जरूरी है, लेकिन सही समय पर अच्छा प्रदर्शन करना भी जरूरी है। उन्होंने माना, ‘‘आपको आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत, योजना, उसे लागू करने की क्षमता, सही मार्गदर्शन और अनुशासन की जरूरत होती है। कई चीजें एक साथ आती है और फिर जब मौका मिलता है तो आपको मैदान पर उतरकर अच्छा प्रदर्शन करना होता है और इसी तरह आप अगले स्तर पर पहुंचते हैं।’’
मास्टर ब्लास्टर ने कहा कि उम्मीदें उन खिलाड़ियों से अधिक होती है, जिन्होंने अतीत में मिसाल कायम की है। हालांकि, इससे किसी को भी परेशान नहीं होना चाहिए। सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड्स इस बात की गवाही देते हैं कि वे करियर के आखिरी पड़ाव तक अपने बेसिक्स पर टिके रहे। चाहे बात प्रैक्टिस की हो या फिर टीम के साथ बने रहने की।






