लॉर्ड्स में भारत हारा तो रोहित शर्मा का छलका दर्द, बोले- लक्ष्य काफी बड़ा था लेकिन आखिर में...
लॉर्ड्स में भारत के हारने पर रोहित शर्मा का दर्द छलका है। रोहित ने 388 के लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार शतकीय पारी खेली। वह लॉर्ड्स में वनडे सेंचुरी ठोकने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर हैं।

इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने भविष्य को लेकर जारी अटकलों के बीच भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस 'शोर (आलोचना, अफवाहें, अटकलें और लगातार होने वाली चर्चाएं)' की पूरी जानकारी है, लेकिन इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। रोहित ने कहा कि वह जब तक क्रिकेट खेलते रहेंगे, ऐसी चर्चाएं होती रहेंगी और उनका पूरा ध्यान केवल टीम के लिए रन बनाने पर है। 39 वर्षीय बल्लेबाज ने लॉर्ड्स में रविवार को 110 गेंदों में 138 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 17 चौके और पांच छक्के लगाए। उनकी यह बेहतरीन पारी भी भारत को 27 रन की हार से नहीं बचा सकी। मैच के बाद रोहित ने अपनी भावनाओं पर संयम बनाए रखा।
रोहित-विराट ने की शतकीय साझेदारी
रोहित और विराट कोहली के बीच शतकीय साझेदारी ने 388 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम की उम्मीदें जगा दी थीं। विराट ने 74 रन बनाए, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इसके बावजूद दोनों की आपसी समझ पहले की तरह ही मजबूत नजर आई। रोहित ने 'बीसीसीआई डॉट टीवी' से कहा, ''मैं और विराट लगभग पूरा करियर साथ खेले हैं। उनके साथ बल्लेबाजी करना हमेशा अच्छा लगता है। हमने कई बड़ी साझेदारियां की हैं। हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं और लगातार विचार साझा करते रहते हैं। उनके साथ बल्लेबाजी करना हमेशा शानदार होता है।'' रोहित ने स्वीकार किया कि बर्मिंघम में जीत के साथ शुरुआत करने के बावजूद सीरीज गंवाना निराशाजनक रहा।
'हमने पूरी कोशिश की, आखिर में...'
उन्होंने कहा, ''नतीजे से थोड़ी निराशा जरूर है क्योंकि मुझे लगा कि हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे थे। बर्मिंघम में हमने शानदार शुरुआत की थी। कार्डिफ में हम बल्लेबाजी में अपेक्षित रन नहीं बना सके।'' उन्होंने आगे कहा, ''लॉर्ड्स में लक्ष्य काफी बड़ा था। हमने पूरी कोशिश की, लेकिन आखिर में 20-25 रन कम पड़ गए।'' भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के चार गेंदबाजों के पास कुल मिलाकर केवल 51 वनडे मैचों का अनुभव था। ऐसे में रोहित ने युवा गेंदबाजों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें यह समझना होगा कि इन खिलाड़ियों ने अभी बहुत ज्यादा एकदिवसीय क्रिकेट नहीं खेला है। उन्हें समय देना होगा। इस मैच से सीख लेकर आगे बढ़ना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके।'' रोहित ने आखिर में कहा, ''हार से निराशा जरूर है क्योंकि हम मैच खत्म नहीं कर सके, लेकिन अब आगे बढ़ना होगा।''
'मैं इस तरह की बातें सुनता आ रहा हूं'
वनडे क्रिकेट में भारत की ओर से शतक लगाने वाले सबसे उम्रदराज क्रिकेटर बने रोहित ने कहा, ''जब से मैंने इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया है, तब से इस तरह की बातें सुनता आ रहा हूं। जब तक मैं खेलता रहूंगा, यह चलता रहेगा। इसलिए इससे मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।'' उन्होंने कहा, ''मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मैं मैदान पर क्या करता हूं और टीम की सफलता में कितना योगदान देता हूं। मेरा पूरा ध्यान उसी पर रहता है। शोर रहने दीजिए, अगर शोर नहीं होगा तो मजा भी नहीं आएगा। मेरा काम मैदान के भीतर है, बाकी लोगों का काम मैदान के बाहर। मैं इसी नजरिए से इसे देखता हूं।''
'मुझे यही जिम्मेदारी सौंपी गई और मैं...'
वनडे में 12,000 रन पूरे करने के करीब पहुंचे इस सलामी बल्लेबाज ने कहा, ''मेरा काम बल्ले से प्रदर्शन करना, मैदान पर उतरना और अपने देश का प्रतिनिधित्व करना है। डेब्यू के समय से मुझे यही जिम्मेदारी सौंपी गई है और मैं आगे भी यही करता रहूंगा।'' तीसरे वनडे में दबाव के बावजूद इस प्रारूप का उनका 34वां शतक हाल के समय की उनकी बेहतरीन पारियों में से एक था। रोहित ने कहा कि उन्हें इंग्लैंड में खेलना हमेशा पसंद रहा है। उन्होंने कहा, ''मुझे इंग्लैंड में खेलना बहुत पसंद है। यहां का माहौल, मैदान और पिचें हर प्रारूप में अलग तरह की चुनौती पेश करती हैं। एक क्रिकेटर के तौर पर आप यही चाहते हैं कि हर तरह से आपकी परीक्षा हो। मैंने बल्लेबाजी का पूरा आनंद लिया।''



