ऑस्ट्रेलिया के विश्व कप से बाहर होने पर भड़के अश्विन, टीम की गंभीरता और 'इरादों' पर उठाए कड़े सवाल
टी-20 विश्व कप 2026 के ग्रुप स्टेज से ऑस्ट्रेलिया का बाहर होना इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर साबित हुआ है। इस शर्मनाक हार के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के रवैये और उनकी प्रतिबद्धता पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

टी-20 विश्व कप 2026 के ग्रुप स्टेज से ऑस्ट्रेलिया का बाहर होना इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर साबित हुआ है। इस शर्मनाक हार के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के रवैये और उनकी प्रतिबद्धता पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अपने यूट्यूब प्रोग्राम ऐश की बात में खेल पत्रकार विमल कुमार से चर्चा के दौरान अश्विन ने सवाल उठाया कि क्या ऑस्ट्रेलिया वास्तव में टी-20 विश्व कप को उतनी गंभीरता से ले रहा है जितनी जरूरत है। उन्होंने टीम की विदाई को केवल खराब प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस प्रारूप के प्रति उनके दृष्टिकोण की कमी बताया है। अश्विन का मानना है कि जिस देश के पास क्रिकेट की इतनी बेहतरीन गहराई और गुणवत्ता हो, उसका इस तरह बाहर होना चिंताजनक है।
अश्विन ने टीम चयन और प्रमुख गेंदबाजों की अनुपस्थिति पर भी निशाना साधा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के पास जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद नहीं थे। इसके अलावा, उन्होंने मिचेल स्टार्क के भविष्य पर भी बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका समय अब समाप्त हो चुका है। अश्विन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया ने इस विश्व कप में वह जज्बा और 'भूख' नहीं दिखाई जो एक विश्व विजेता टीम में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने थोड़ी और अधिक मेहनत की होती, तो हम मैदान पर एक बहुत ही बेहतर प्रदर्शन देख सकते थे।
भारतीय टीम के साथ तुलना करते हुए अश्विन ने बताया कि भारत ने हमेशा से विश्व कप जीतने के लिए लगातार और कड़े प्रयास किए हैं, भले ही सफलता मिलने में समय लगा हो। इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया इस बार वह संघर्ष करते हुए नहीं दिखा। आंकड़ों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में बेहद साधारण रहा। जिम्बाब्वे जैसी टीम के खिलाफ भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज 170 रन के लक्ष्य को हासिल करने या बनाने के लिए बुरी तरह संघर्ष करते नजर आए थे। अश्विन का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे क्रिकेटिंग नेशन के लिए यह प्रयास पर्याप्त नहीं थे।
गौरतलब है कि ग्रुप-B में ऑस्ट्रेलिया की टीम 3 मैचों में केवल 2 अंक ही जुटा सकी और चौथे स्थान पर रहकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। उनके स्थान पर जिम्बाब्वे ने 5 अंकों के साथ सुपर-8 के लिए क्वालीफाई कर इतिहास रच दिया है। अश्विन की यह कठोर टिप्पणी बताती है कि केवल नाम और इतिहास के दम पर बड़े टूर्नामेंट नहीं जीते जा सकते, बल्कि इसके लिए मैदान पर सही रणनीति और समर्पण की आवश्यकता होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऑस्ट्रेलिया इस हार से सबक लेकर अपने टी-20 ढांचे में कोई बड़ा बदलाव करता है।




