हार्दिक पांड्या जैसा नहीं है दूसरा विकल्प, अब क्या करेंगे चयनकर्ता? BCCI पर भी उठ रहे सवाल
हार्दिक पांड्या अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली 3 मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। ऐसे में उनका विकल्प क्या है? ये आप भी जानना चाहेंगे, लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि उनका विकल्प ही नहीं है।

दुनिया के तमाम क्रिकेट एक्सपर्ट्स इस बात की दलील देते हैं कि भारत एक समय पर चार टीमें इंटरनेशनल क्रिकेट में उतार सकता है और सभी में इतना टैलेंट होगा कि वे किसी भी टीम को मात दे सकते हैं। कायदे से उनकी बात सोलह आने सच है, लेकिन बात जब पेस ऑलराउंडर की आती है तो फिर उनके नाम इक्का-दुक्का ही हैं। यहां तक कि हार्दिक पांड्या का रिप्लेसमेंट भारत को आज तक नहीं मिला है। मौजूदा समय में नितीश कुमार रेड्डी पेस ऑलराउंडर हैं, लेकिन हार्दिक पांड्या का औहदा अलग है।
नितीश रेड्डी जरूर बल्ले और गेंद से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और बॉलिंग की स्पीड भी 140 किलोमीटर के आसपास ले गए हैं, लेकिन लगातार मैच फिनिश करने की काबिलियत अभी उन्हें साबित करनी है। पेस ऑलराउंडर का सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि हार्दिक पांड्या अफगानिस्तान के खिलाफ इसी सप्ताह के आखिर में शुरू हो रही 3 मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। इससे नितीश कुमार रेड्डी के प्लेइंग इलेवन में आने के चांस बढ़ गए हैं, लेकिन हार्दिक पांड्या का दूसरा विकल्प आपको पूरे इंडियन क्रिकेट सर्किट में नजर नहीं आएगा।
शिवम दुबे भी एक अच्छा विकल्प पेस ऑलराउंडर के तौर पर हैं, लेकिन उनसे बहुत कम गेंदबाजी कराई जाती है। आईपीएल में तो उन्हें इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में खिलाया जाता है। शिवम दुबे भारत के लिए टी20 क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन वहां भी उनसे बहुत कम गेंदबाजी कराई जाती है, लेकिन हार्दिक पांड्या टीम में होते हैं तो वह एक प्रोपर बैटर और प्रोपर बॉलर के रूप में काउंट किए जाते हैं। शिवम दुबे को फिनिशर जरूर कहा जा सकता है, लेकिन मैनेजमेंट अभी भी उन्हें प्रोपर बॉलर काउंट करने से डरता है। नितीश रेड्डी का भी यही हाल है।
वेंकटेश अय्यर भी पेस ऑलराउंडर के रूप में उभरे थे, लेकिन अब उन्हें टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में देखा जा रहा है। गेंदबाजी करते हुए उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट में उतना नहीं देखा जाता। यह एक समस्या है, क्योंकि इंटरनेशनल क्रिकेट वे खेलते नहीं और आईपीएल में सिर्फ बैटर के तौर पर ही वे खेले। ऐसे में अब चयनकर्ताओं को किसी स्पिन ऑलराउंडर, प्रोपर बैटर या प्रोपर पेसर को उनके रिप्लेसमेंट के रूप में चुनना होगा।
हार्दिक की जगह अब अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में किसे चुना जा सकता है? यह सवाल चयनकर्ताओं के लिए भी होगा। शिवम दुबे पर वे दांव खेल सकते हैं, लेकिन इसके आगे कोई नाम पेस ऑलराउंडर का नजर नहीं आता है। इसके पीछे की वजह आईपीएल भी है, जहां ऑलराउंडर्स की भूमिका ही सीमित कर दी गई है, क्योंकि इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में या तो प्रोपर बैटर को मौका मिलता है या फिर प्रोपर बॉलर को खिलाया जाता है। ऐसे में ऑलराउंडर्स सिर्फ बेंच गर्म करते हैं।
क्या करेंगे चयनकर्ता और बीसीसीआई?
इस स्थिति में बीसीसीआई को इम्पैक्ट प्लेयर रूल के बारे में सोचना होगा और यह भी सोचना होगा कि सिलेक्टर्स को इस काम पर लगाए कि घरेलू क्रिकेट से उन खिलाड़ियों को आइडेंटीफाई करे, जो पेस ऑलराउंडर की भूमिका आगे चलकर निभा सकें। वैसे तो घरेलू क्रिकेट पर अच्छा खासा फोकस अजीग अगरकर की अध्यक्षता वाली समिति का है, लेकिन उन्हें भी अभी तक कोई प्रोपर पेस ऑलराउंडर नहीं मिला है।
लेखक के बारे में
Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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