क्रिकेट जगत का वह खौफनाक गेंदबाज, जिसने सचिन को बनाया 6 बार शिकार लेकिन 30 साल में ही ले लिया संन्यास
न्यूजीलैंड के गेंदबाज डियोन नैश ने अपने छोटे से करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर को काफी परेशान किया। उन्होंने भारत के महान बल्लेबाज को 6 बार अपना शिकार बनाया था। हालांकि 30 साल की उम्र में ही उन्होंने संन्यास ले लिया था।

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के इंटरनेशनल करियर के दौरान कई खौफनाक गेंदबाजों का सामना किया। इस दौरान वह ग्लेन मैक्ग्रा, मुथैया मुरलीधरन और ब्रेट ली जैसे गेंदबाजों के खिलाफ रन बनाने के लिए संघर्ष करते भी नजर आए। हालांकि उनके करियर के शुरुआती दौर में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज डियोन नैश ने उन्हें काफी परेशान किया था। सचिन को कीवी गेंदबाज के खिलाफ काफी मुश्किलें आई थी। नैश ने उन्हें 6 बार पवेलियन भी भेजा था। इसके अलावा उन्होंने भारत के खिलाफ काफी शानदार प्रदर्शन किया। 1999 में मोहाली में उन्होंने 6 विकेट लेकर भारत की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी, जिसमें टीम सिर्फ 83 पर ढेर हो गई थी।
नैश ने भारतीय बल्लेबाजों को किया परेशान
1990 के दशक में न्यूजीलैंड के गेंदबाज डियोन नैश और सचिन तेंदुलकर कई बार आमने-सामने आए। लेकिन नैश लगातार बार सचिन तेंदुलकर पर भारी पड़े और उन्हें अपना शिकार बनाया। इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्होंने उस समय सचिन को 6 बार आउट किया था। टेस्ट और वनडे में वह 3-3 बार शिकार बने। उन्होंने भारत का पहला दौरा 1995 में किया था। बेंगलोर में उन्होंने संजय मांजरेकर, सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली को आउट किया। इसके बाद चार साल बाद भारत के न्यूजीलैंड दौरे पर उन्होंने अपने ऑलराउंडर प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया। वेलिंग्टन में उन्होंने 89 रन की पारी खेली। इस मैच की दूसरी पारी में सचिन ने शतक लगाकर न्यूजीलैंड को बैकफुट पर धलेका लेकिन नैश ने उन्हें 113 के स्कोर पर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया और तीन विकेट लिए। न्यूजीलैंड ने ये मैच 4 विकेट से जीता था। दो मैचों में नैश ने 174 रन बनाए और सिर्फ एक बार आउट हुए। 1998 में शारजाह में उन्होंने भारत के खिलाफ 38 रन देकर चार विकेट लिए, इस मैच में सौरव गांगुली ने 105 रन ठोके थे। ये मैच भारत ने 15 रन से अपने नाम किया था।
विश्व कप में सचिन को बनाया शिकार
1999 में हुए विश्व कप में भारत सुपर-6 तक पहुंचा, जहां उसकी भिड़ंत न्यूजीलैंड की टीम से हुई। इस टूर्नामेंट के दौरान तेंदुलकर पर दुखो का पहाड़ टूटा था, उनके पिता का निधन हो गया था। हालांकि वापस लौटने पर उन्होंने केन्या के खिलाफ दमदार पारी खेली थी। लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ कमाल नहीं दिखा सके और नैश ने 16 के स्कोर पर उन्हें आउट कर दिया था। भारत ने 6 विकेट खोकर 251 रन बनाए, इसके जवाब में न्यूजीलैंड ने 10 गेंद रहते 5 विकेट से मैच अपने नाम किया और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
वर्ल्ड कप से बाहर होने के चार महीने बाद नैश भारत के दौरे पर आए, जहां पर उन्होंने मोहाली में भारतीय टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। इस मैच में उन्होंने 27 रन देकर 6 विकेट लिए। भारत की टीम सिर्फ 83 रन ही बना सकी थी। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 93 विकेट लिए। उन्होंने 729 रन बनाए, जिसमें चार अर्धशतक शामिल हैं।
डियोन नैश का करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा। उन्होंने 10 साल तक न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व किया। 1992 से शुरू हुआ उनका करियर चोट के कारण 2002 तक आते-आते खत्म हो गया। उनकी पीठ की चोट ने उन्हें क्रिकेट से दूर कर दिया। नैश ने 2002 में महज 30 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।



