इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ने किया पाकिस्तान और बांग्लादेश का समर्थन, कहा- खेल को खत्म कर रही है राजनीति
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने आईसीसी के खिलाफ जो स्टैंड रखा है, उसका समर्थन इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने किया है। उन्होंने कहा है कि किसी को तो आगे आना पड़ेगा और कहना पड़ेगा कि अब बस बहुत हुआ।
इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच को लेकर पनप रही आग में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन भी कूद गए हैं। इंडिया और श्रीलंका में खेले जाने वाले टी20 विश्व कप 2026 को लेकर नासिर हुसैन ने कहा है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने फैसले पर कायम हैं। बांग्लादेश ने तो भारत में टी20 विश्व कप नहीं खेलने का फैसला किया था और इस वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है। उधर, पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ नहीं खेलने का विकल्प चुना है। 15 फरवरी को कोलंबो में इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच होना है, लेकिन अब इस पर सस्पेंस बना हुआ है। पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर शेहबाज शरीफ ने फिर से पाकिस्तान की टीम के भारत के खिलाफ नहीं खेलने की बात दोहराई है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी के बीच चल रही तनतनी में नासिर हुसैन ने कहा है कि उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान का कड़ा रुख अपनाना काफी पसंद है, क्योंकि अब समय आ गया है कि कोई कहे कि “बस बहुत हो गया”। उन्होंने संबंधित पार्टियों से खेल में राजनीति को शामिल करना बंद करने का भी आग्रह किया। स्काई क्रिकेट पॉडकास्ट में हुसैन ने कहा, "मुझे बांग्लादेश का अपनी बात पर अड़ा रहना काफी पसंद है। वे अपने खिलाड़ी, फिज(मुस्तफिजुर रहमान) के लिए खड़े हुए हैं और मुझे पाकिस्तान काफी पसंद है। मुझे पता है कि यह पॉलिटिकल है। मुझे पाकिस्तान का बांग्लादेश के लिए खड़ा रहना काफी पसंद है और किसी न किसी स्टेज पर, किसी को कहना ही होगा कि यह पॉलिटिक्स बहुत हो गई। क्या हम वापस क्रिकेट खेलना शुरू कर सकते हैं?"
उन्होंने आगे कहा, "इसलिए शायद यह एक बहुत ही मुश्किल समय है, क्योंकि पाकिस्तान ICC या भारत को नुकसान सिर्फ पैसे और इंडिया-पाकिस्तान मैच के फाइनेंस से ही पहुंचा सकता है। यही एक तरीका है।" इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ने यह भी दावा किया कि खेल की मौजूदा स्थिति “निराशाजनक” हो गई है, क्योंकि राजनीति इसमें आड़े आ रही है।
पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, "सच कहूं तो यह काफी निराशाजनक है। स्पोर्ट, क्रिकेट और पॉलिटिक्स हमेशा से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। स्पोर्ट और पॉलिटिक्स के बीच हमेशा एक लिंक रहा है, लेकिन हाल ही में ऐसा लगता है कि यह लिंक और भी ज्यादा बढ़ गया है। पहले यह एक्सेप्शन हुआ करता था, अब यह नॉर्मल है और यह सिर्फ पॉलिटिक्स और पॉलिटिशियन ही नहीं, बल्कि प्लेयर्स के साथ भी होता है। पिछले कुछ सालों में मैंने जो प्लेयर्स देखे हैं, जैसा कि मैं कहता हूं, यह काफी निराशाजनक है, हाथ न मिलाना, ट्रॉफी न उठाना। क्रिकेट पहले देशों और मुश्किलों का सामना कर रहे देशों को जोड़ता था और अब यह लोगों को अलग कर रहा है।"
हुसैन ने आगे आईपीएल का भी जिक्र किया, जहां से ये मुद्दा पनपा है। उन्होंने कहा, "आपको बस यह याद रखना होगा कि यह हालिया संकट कहां से शुरू हुआ। मुस्तफिजुर रहमान IPL में कोलकाता के लिए चुने गए और अचानक BCCI ने कहा, नहीं, आप उन्हें टीम से बाहर कर दें, क्योंकि बांग्लादेश और भारत के साथ चल रहे हालात अच्छे नहीं हैं। उस एक फैसले से सब कुछ बढ़ता गया।"
कप्तान के तौर पर वह खुद 2003 में जिम्बाब्वे इंग्लैंड की टीम को नहीं ले गए थे। उन्होंने आईसीसी के साथ थोड़ी सहानुभूति दिखाई और कहा कि अंतिम समय पर शेड्यूल में बदलाव नहीं किया जा सकता था। ऐसे में बांग्लादेश की मांग को आईसीसी ने खारिज कर दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के मुद्दे पर आईसीसी ने उनकी मांग खारिज कर दी, लेकिन क्या भविष्य में कभी भारत ऐसा करता है तो भी आईसीसी का यही स्टैंड होगा? आपको बांग्लादेश को भी उसी तरह ट्रीट करना चाहिए, जैसे आप पाकिस्तान और भारत को करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, "अब इंडिया के फैन ज्यादा चिल्लाएंगे, हमारे पास पैसा है, सब ठीक है, लेकिन पावर के साथ जिम्मेदारी भी आती है। अगर आप लगातार बांग्लादेश या पाकिस्तान को नीचा दिखाते रहेंगे, तो उनका क्रिकेट कम हो जाएगा और इसलिए इंडिया और पाकिस्तान या इंडिया और बांग्लादेश के बीच पहले जो शानदार मैच हमने देखे हैं, वे एकतरफा हो जाएंगे, जैसा कि उनके साथ हुआ है।"

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Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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