मेरा मेन लक्ष्य इंडिया को वर्ल्ड कप जिताना नहीं था, वह करियर का एक पड़ाव भर था, 2024 T20 WC के सवाल पर बोले विक्रम राठौर
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी कोचिंग जर्नी के बारे में बात की है, जहां उन्होंने भारतीय टीम की कोचिंग करने और विश्व कप जिताने को अपने करियर का एक पड़ाव भर माना है।

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी कोचिंग जर्नी के बारे में बात की है, जहां उन्होंने भारतीय टीम की कोचिंग करने और विश्व कप जिताने को अपने करियर का एक पड़ाव भर माना है। उन्होंने कहा है कि मैं अब उन चीजों से मूव ऑन कर चुका हूं। मेरा लक्ष्य एक बेस्ट कोच बनना है, जिसका एक पड़ाव भारतीय टीम को साल 2024 में पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप जिताना था।
विश्व कप जीतना करियर का एक पड़ाव था, मुख्य लक्ष्य नहीं
विक्रम राठौर से पॉडकास्ट में पूछा गया कि क्या आप भारत को वर्ल्ड कप जिताने को अपने करियर की बड़ी उपलब्धि या सफलता मानते हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए पूर्व बैटिंग कोच ने कहा "सक्सेस तो तब दिमाग में आएगी ना जब आप सोचोगे कि आपकी लाइफ का वो मेन गोल था। लेकिन बतौर कोच मेरा मेन गोल वो ( वर्ल्ड कप जीतना) कभी था ही नहीं। मेरा लक्ष्य जब से कोचिंग शुरू की है तब से यही था कि बेस्ट कोच बनना है। मैं बेस्ट कोच बनना चाहता हूं, मैं बन सकता हूं। वह यात्रा अभी भी चल रही है। अभी तक मैंने अपने बेस्ट कोच बनने के टारगेट को अचीव नहीं किया है। बहुत कुछ सक्सेस मिल जाने के बाद ऐसा लगना कि हां अब मैंने यह अचीव कर लिया है, अभी ऐसा नहीं लगता है। मुझे नहीं लगता कि मैं एक कोच के तौर पर जहां होना चाहता हूं उसके कहीं आसपास भी अभी हूं। जर्नी चल रही है और ये छोटे- छोटे स्टेप्स हैं उस मेन लक्ष्य को अचीव करने के लिए। मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि ऐसी टीमों के साथ काम करने को मिल रहा है, जहां पर बहुत टैलेंटेड क्रिकेटर हैं, जो बहुत अच्छी क्रिकेट खेलते हैं। मैंने उनके साथ काम करके बहुत कुछ सीखता भी हूं। तो वर्ल्ड कप जीतना एक यात्रा का पड़ाव था। अब मैं उससे मूव ऑन कर चुका हूं। लाइफ चल रही है मस्त। ये मेरे करियर की अच्छी टीमें थीं, जिसके साथ अभी काम कर रहा हूं वो बेस्ट काम है।"
भारतीय टीम की कोचिंग करना अलग फीलिंग नहीं देता
क्या भारतीय टीम की कोचिंग करना और एक आईपीएल टीम की कोचिंग करना दोनों अलग फीलिंग देता है? क्या आप फील करते हैं कि भारतीय टीम की कोचिंग करना ज्यादा प्राउड फील कराता है? इस सवाल के जवाब में विक्रम राठौर बोले,"मैं इन सब चीजों में भरोसा नहीं करता हूं। मैं जब अंडर-16 की टीम की कोचिंग कर रहा था, हिमाचल की टीम की कोचिंग कर रहा था, तब भी मेरी वैसी ही फीलिंग थी जैसी इंडियन टीम के साथ कोचिंग करते वक्त थी। स्टेज बड़ी है, प्लेटफॉर्म बड़ा है इंडियन टीम इसलिए थोड़ा प्रदर्शन का दबाव रहता है लेकिन जहां तक मेरी बात है तो मैंने ज्यादा अंतर महसूस नहीं किया अपनी कोचिंग के दौरान किसी भी टीम के साथ। मैं अपनी कोचिंग को प्यार करता हूं, पसंद करता हूं, बस इतनी बात है। चाहे वह जिस स्टेज पर हो।"
बड़े खिलाड़ियों की कोचिंग करना चुनौतीपूर्ण होता है
क्या रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल जैसे प्लेयर के साथ कोचिंग करना और अंडर 19 टीम के साथ कोचिंग करना दोनों के लिए अलग चुनौतियां होती हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए विक्रम राठौर ने कहा कि "हां, जो खिलाड़ी इंडिया खेल चुका है उसके लिए अलग जरूरतें होती हैं, अंडर 19 टीम के खिलाड़ियों के लिए अलग जरूरतें होती हैं। इसलिए उनकी जरूरतों का ध्यान रखना पड़ता है। और मुझे लगता है कि एक कोच के तौर पर आपको इन्हीं सब स्किल्स पर ध्यान भी देना होता है। यही आपको कोच बनाता है।"
लेखक के बारे में
Vimlesh Kumar Bhurtiyaविमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार
संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।
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