श्रीलंका में क्यों बेअसर हो गए थे मोहम्मद सिराज? तेज गेंदबाज ने वजह बताई
मोहम्मद सिराज ने श्रीलंका दौरे पर अपनी रफ्तार में कमी होने की वजह लंबे ब्रेक को बताया है। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से रिदम (लय) वाले गेंदबाज हैं और जब तक वह इसे हासिल नहीं कर लेते तब तक क्रीज पर पूरी ताकत से बॉलिंग नहीं कर पाते।

मोहम्मद सिराज ने जसप्रीत बुमराह की गैर-मौजूदगी में तेज गेंदबाजी का काफी ज्यादा बोझ उठाया है। उन्होंने पिछले साल इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों में 1113 गेंदें फेंकीं और आखिरी गेंद तक पूरी शिद्दत के साथ गेंदबाजी की। ओवल में मशहूर टेस्ट जीत में इसकी झलक देखने को मिली थी। यह चौंकाने वाला आंकड़ा कुल मिलाकर 185.3 ओवर का है। उनके अलावा क्रिस वोक्स ही 181 ओवर के साथ इसके आस-पास पहुंच पाए, लेकिन उन्होंने सिराज के सीरीज बेस्ट 23 विकेटों की तुलना में 12 विकेट कम लिए।
वर्कलोड मैनेजमेंट के इस दौर में, जहां तेज गेंदबाजों को तरोताजा होने के लिए आराम की जरूरत होती है, सिराज एक अलग ही तरह के खिलाड़ी साबित हुए हैं। असल में, वह इस मामले में बिल्कुल अलग स्थिति में हैं, जहां लंबे ब्रेक का उनकी गेंदबाजी की लय (रिदम) पर बुरा असर पड़ता है। हाल ही में ऐसे ही एक ब्रेक ने उनकी लय बिगाड़ दी थी। 8 जून को खत्म हुए अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के बाद, सिराज को दो महीने का ब्रेक मिला और फिर 7 अगस्त को कोलंबो में एसएलसी इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में उन्होंने गेंदबाजी की। खुद उनके मुताबिक, इससे उनकी गेंदबाजी पर बुरा असर पड़ा।
मेरा शरीर लंबे ब्रेक को अच्छी तरह से नहीं झेल पाता
गॉल में श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में शुभमन गिल ने अपने पांच मुख्य गेंदबाजों में मोहम्मद सिराज का इस्तेमाल सबसे कम किया। उन्होंने दोनों पारियों में नौ-नौ ओवर डाले। कोलंबो में उन्होंने थोड़ी ज्याद गेंदबाजी की, लेकिन पूरी सीरीज में उन्होंने कुल 44 ओवर ही डाले, जो इस दौरे पर भारत के दूसरे तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा से 14.3 ओवर कम थे।
चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद सिराज ने कहा, "हर गेंदबाज का शरीर अलग होता है, लेकिन मेरा शरीर लंबे ब्रेक को अच्छी तरह से नहीं झेल पाता। थोड़ा ब्रेक लेना ठीक है, लेकिन अपने 10 साल के करियर में मैंने कभी पूरे दो महीने की छुट्टी नहीं ली थी। मैं जिम में वर्कआउट कर रहा था और कभी-कभी बॉलिंग भी कर रहा था, लेकिन कितनी भी प्रैक्टिस कर लें, मैच की तीव्रता की बराबरी नहीं हो सकती। यह एक नया अनुभव था, लेकिन आगे बढ़ने के लिए मेरे लिए सीखने का एक अच्छा मौका था।
उन्होंने कहा,"मैं पूरी तरह से रिदम (लय) वाला बॉलर हूं। अगर मैं सही लय में नहीं हूं, तो मैं क्रीज पर पूरी ताकत से बॉलिंग नहीं कर पाता। श्रीलंका में यही दिक्कत थी, मेरा रन-अप सही नहीं लग रहा था। कुछ कदम बहुत छोटे थे, तो कुछ बहुत लंबे, जिससे मेरा फ्लो टूट गया और मेरी पेस (गति) कम हो गई। यहां सब कुछ सही हो गया और पेस अपने आप बढ़ गई।''
सब कुछ थोड़ा धीमा लगता है
दो टेस्ट मैचों में वाकई सिराज की पेस कम थी, जो 120 के आखिर और 130 की शुरुआत के आसपास थी। अगर तुलना करें तो, पांच मैचों की सीरीज़ के आखिरी दिन, जिसमें सभी टेस्ट पाँचवें दिन तक चले थे, उन्होंने गस एटकिंसन को 143 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से यॉर्कर डाली थी। इसलिए, श्रीलंका से लौटने के बाद सिराज चेन्नई गए और दिलीप ट्रॉफी फ़ाइनल में तिलक वर्मा की कप्तानी में साउथ ज़ोन के लिए खेले।
"दो महीने के ब्रेक के बाद सीधे मैच में आने पर मेरी लय वैसी नहीं थी। इस गेम (दिलीप ट्रॉफी फ़ाइनल) में उतरते समय मेरा मुख्य लक्ष्य वही लय पाना था। इस मैच में खेलने से बहुत मदद मिली। दो महीने के ब्रेक के बाद शरीर वैसा रिस्पॉन्स नहीं देता, सब कुछ थोड़ा धीमा लगता है। इस गेम को खेलने से मेरा शरीर फिर से हरकत में आया और मेरी लय वापस आ गई।"
चेन्नई की भीषण गर्मी में, सिराज ने ईस्ट ज़ोन की दोनों पारियों में 41 ओवर फेंके और अंत में अपनी बॉलिंग को लेकर काफ़ी बेहतर महसूस किया। “मेरा शरीर ऐसे ही काम करता है - मैं जितने ज़्यादा ओवर फेंकता हूँ, उतना ही बेहतर होता जाता हूँ। अगर मैं लंबे स्पेल में बॉलिंग नहीं करता, तो मेरी लय वापस नहीं आएगी। ब्रेक की वजह से क्रीज़ पर मेरा शरीर सुस्त महसूस हो रहा था, इसलिए मैंने खुद से और तिलक से कहा कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा देर तक बॉलिंग करना चाहता हूं। मैंने 10 और 11 ओवर के स्पेल में गेंदबाज़ी की, और इसी से मुझे अपनी लय वापस मिली।”
सिराज ने घरेलू मैच की शुरुआत विकेटकीपर एन. जगदीसन के स्टंप्स के पास खड़े होने के साथ की। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने छोटे रन-अप के साथ गेंदबाज़ी की। "नहीं, रन-अप बिल्कुल वैसा ही है। मेरा तरीका छोटे-छोटे कदमों के बजाय लगातार और बिना रुके तेजी पकड़ने पर आधारित है। दो महीने के ब्रेक के बाद वापसी करते समय, मेरा शरीर अपने कदमों की लंबाई को फिर से एडजस्ट कर रहा था। इस मैच में, सब कुछ फिर से बिल्कुल स्वाभाविक लगा।"
उन्होंने आगे कहा, "आखिरकार, सिर्फ़ मैं ही अपनी लय को सही मायने में समझता हूं। मैं चाहे किसी के भी साथ काम करूँ, असल बात तो यही है कि मैं आसानी से दौड़ते हुए आऊँ। एक बार जब मैं ऐसा कर लेता हूँ, तो लय अपने आप बन जाती है।''



