करियर में ‘खास शतक’ जड़ने के बाद आया मोहम्मद शमी का बयान, कहा- मैं हमेशा सीखते रहना चाहता हूं

चेन्नई, 11 सितंबर (वार्ता)
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दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में कदम रखते ही मोहम्मद शमी ने एक खास उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने चेन्नई में अपना 100वां प्रथम श्रेणी मैच खेला। इस मुकाबले में मिली जीत के बाद उन्होंने अपने विचार साझा किए। 

Mohammed Shami in Duleep Trophy 2026
दलीप ट्रॉफी जीतने के बाद मोहम्मद शमी का बयान

दलीप ट्रॉफी में अपना 100वां प्रथम श्रेणी मैच खेलने की उपलब्धि हासिल करने वाले मोहम्मद शमी ने कहा कि 36 वर्ष की उम्र पार करने के बावजूद उनके भीतर क्रिकेट खेलने की भूख बिल्कुल कम नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा सीखता रहता हूं और सीखते रहना चाहता हूं।

शमी ने आखिरी बार 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और उन्होंने 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बाद से कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है।

प्रेरित होने के बहुत से कारण मिल जाएंगे, बस आप तलाश करें

पूर्वी क्षेत्र की ओर से खेलने वाले शमी ने दलीप ट्रॉफी फाइनल के आखिरी दिन के बाद कहा, "अगर आप तलाश करें तो प्रेरित रहने के बहुत सारे कारण मिल जाएंगे। आप इस मैदान से या किसी भी मैदान से सकारात्मकता ले सकते हैं। इस स्तर पर अगर आप खु़द से प्रेरित नहीं हैं तो आपका नजरिया गलत है। आप क्रिकेट के किसी भी स्तर पर खेल रहे हों, आपकी नजर हमेशा अगले स्तर पर होनी चाहिए। मैं हमेशा एक बात कहता हूं कि आप बैज के लिए खेलते हैं। जब आप अपनी छाती पर वह प्रतीक पहनते हैं तो क्रिकेट का स्तर मायने नहीं रखता। अगर आप बैज के लिए खेलते हैं तो वह भूख अपने आप दिखती है। जब आप उस गर्व के साथ खेलते हैं तो लड़ने की इच्छा और बढ़ जाती है। मेरी सोच बहुत सरल है कि मुझे जिस भी स्तर पर खेलने का मौक़ा मिले, मैं उसे टीम के लिए सार्थक बनाना चाहता हूं और अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहता हूं।"

दलीप ट्रॉफी में अहम योगदान देने के बाद बोले- “सीखते रहना चाहता हूं”

चेपॉक की बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में शमी ने नई गेंद से पारंपरिक स्विंग और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग निकालकर असर छोड़ा। उन्होंने मुकेश कुमार के साथ मिलकर पांच विकेट साझा किए। दोनों ने मिलकर दक्षिण क्षेत्र को 336 रन पर समेट दिया और पूर्वी क्षेत्र को बड़ी पहली पारी की बढ़त दिलाई, जो खिताब जीतने के लिए काफ़ी साबित हुई।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा सीखता रहता हूं और सीखते रहना चाहता हूं। ऐसी परिस्थितियों में आप ज्यादा पारंपरिक स्विंग की उम्मीद नहीं कर सकते और उछाल भी काफ़ी कम थी। मुझे अपनी लाइन और लेंथ पर पूरा भरोसा है और मैं वहीं से विकेट निकालने की कोशिश करता हूं। और सच कहूं तो अगर आप ऐसी गर्मी में रिवर्स स्विंग का फ़ायदा नहीं उठा सकते तो फिर उसका क्या मतलब है। अगर शीर्ष क्रम के बल्लेबाज जम चुके हों तो बिना योजना के उन्हें आउट नहीं किया जा सकता। खासकर ऐसी पिचों पर विकेट अपने आप नहीं मिलते। योजना यह थी कि गेंद को लगातार उनसे दूर रखा जाए, उनकी उम्मीद बनाई जाए और फिर एक गेंद तेज़ी से अंदर लाकर उन्हें फंसाया जाए।”

Vimlesh Kumar Bhurtiya

लेखक के बारे में

Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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