15 साल की उम्र में कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके वैभव सूर्यवंशी का रेड बॉल में प्रदर्शन कैसा है, एक नजर डालिए

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सीमित ओवर के क्रिकेट में फिलहाल वैभव सूर्यवंशी नहीं दिखेंगे। वे रेड बॉल क्रिकेट में अपने बल्ले का जौहार दिखाएंगे। 23 अगस्त से दलीप ट्रॉफी की शुरुआत के साथ वैभव सूर्यवंशी फील्ड पर दिखेंगे। उससे पहले उनके रेड बॉल क्रिकेट के रिकॉर्ड देख लीजिए।

Vaibhav Sooryavanshi
रेड बॉल क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन (फाइल फोटो)

भारत बनाम श्रीलंका टेस्ट सीरीज शुरू हो रही है। भारत अब रेड बॉल क्रिकेट में एक्टिव हो रहा है। फिलहाल, आसपास कोई व्हाइट बॉल क्रिकेट सीनियर लेवल पर नहीं है। ऐसे में 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी चर्चा से ओझल होते जा रहे हैं। लेकिन, उनके लाखों में फैंस बन चुके हैं और बैटिंग की दीवागनी क्रिकेट प्रशंसकों पर सिर चढ़कर बोलती है। कई फैंस जानना चाहते हैं कि वैभव सूर्यवंशी अब कब मैदान पर दिखेंगे। आपको बता दें कि वैभव सूर्यवंशी इसी महीने 23 अगस्त से शुरू होने वाली दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की उप कप्तानी करते नजर आएंगे। सीमित ओवरों के क्रिकेट से जरा हटकर अब सूर्यवंशी रेड बॉल क्रिकेट में खुद को तैयार कर रहे हैं। वैभव सूर्यवंशी नागपुर के पास तलेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स अकादमी में सहायक कोच विक्रम राठौर के मार्गदर्शन में अपने लाल गेंद के खेल को निखार रहे हैं। आइए सूर्यवंशी ने अब तक रेड बॉल क्रिकेट में क्या- क्या कमाल किया है उनका प्रदर्शन कैसा है, इसके बारे में जानकारी देते हैं।

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी के आंकड़े

सूर्यवंशी ने 5 जनवरी, 2024 को पटना में मुंबई के खिलाफ बिहार के लिए अपना प्रथम श्रेणी क्रिकेट पदार्पण किया। उस समय उनकी उम्र 12 साल और 284 दिन थी। वह 1959-60 में एसके बोस के बाद रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं और 1986 के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय हैं। वैभव सूर्यवंशी ने अब तक आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों में 17.25 की औसत से 207 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका उच्चतम स्कोर 93 है। उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक शामिल है। उनका स्ट्राइक रेट 90 है, जो रेड बॉल क्रिकेट में बहुत अधिक है। नवंबर 2025 में पटना में मेघालय के खिलाफ 67 गेंदों में बनाए गए उनके 93 रनों का उच्चतम स्कोर उनका पहला प्रथम श्रेणी अर्धशतक भी था। उन्होंने 33 गेंदों में चार छक्के और नौ चौकों की मदद से यह उपलब्धि हासिल की। हालांकि, सूर्यवंशी रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले ध्रुव पांडोव के 37 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने से सात रन पीछे रह गए।

भारत की अंडर-19 टेस्ट टीम के लिए प्रदर्शन

भारत की अंडर-19 युवा टेस्ट टीम के लिए सूर्यवंशी ने अब तक छह मैचों में 33.10 की औसत से 331 रन बनाए हैं, जो उनके प्रथम श्रेणी मैचों की तुलना में बेहतर है। उन्होंने छह मैचों में दो शतकों के साथ 33.10 की औसत से रन बनाए हैं। पहला शतक उन्होंने सितंबर 2024 में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में 58 गेंदों में बनाया था, जो इस फॉर्मेट में किसी भारतीय द्वारा बनाया गया सबसे तेज शतक है। इसके साथ ही वह युवा टेस्ट में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी हैं। दूसरा शतक, 113 रन (86 गेंदों में), उन्होंने एक साल बाद ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही बनाया है। अंडर-19 रेड बॉल क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया में उनका औसत 44.33 और भारत में 36.00 है, लेकिन इंग्लैंड में खेले गए दो युवा टेस्ट मैचों में उनका औसत मात्र 22.50 है, जहां गेंद अधिक स्विंग होती है। ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ उनका रिकॉर्ड (40.16) इंग्लैंड अंडर-19 के खिलाफ उनके रिकॉर्ड (22.50) से कहीं बेहतर है।

टी-20I में बना चुके हैं कई विश्व रिकॉर्ड

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी ने रेड बॉल क्रिकेट में भले ही अभी तक खुद की प्रतिभा को साबित ना किया हो, लेकिन बॉल क्रिकेट में सीनियर लेवल पर भी अपना प्रभाव छोड़ चुके हैं। वे जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की टी-20 सीरीज में 5 वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। खबर का लिंक दिया गया है।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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