अगर मैं मैच रेफरी होता तो सौरव गांगुली को बैन कर देता; जवागल श्रीनाथ ने किस किससे को किया याद?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जवागल श्रीनाथ ने सौरव गांगुली-स्टीव वॉ के 2001 की पुराने टॉस घटना को याद करते हुए कहा कि अगर वह उस समय मैच रेफरी होते तो वह कुछ मैचों के लिए गांगुली को बैन कर देते।

Sourav Ganguly
सौरव गांगुली

सौरव गांगुली का 2001 वाला स्टीव वॉ को टॉस के लिए इंतजार कराने का किस्सा तो हर किसी को याद होगा। 2001 बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज के दौरान जब मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला जाना था तो गांगुली ने टॉस के लिए वॉ को मैदान पर काफी इंतजार कराया था। गांगुली ने हालांकि बाद में सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिल रहा था, जिस वजह से उन्हें देरी हुई। इस मुद्दे को याद करते हुए टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ, जो इस समय आईसीसी के मैच रेफरी हैं, उन्होंने कहा कि अगर वह उस समय मैच रेफरी होते तो सौरव गांगुली को कुछ मैचों के लिए बैन कर देते।

श्रीनाथ ने EEMAGINE इवेंट में उस घटना को याद करते हुए कहा, “मैं सौरव को कुछ मैचों के लिए बैन कर देता!” इसे गेममैनशिप का एक काम माना गया है, जिसने वॉ और ऑस्ट्रेलियाई टीम को उस मशहूर सीरीज के दौरान परेशान किया था जिसे भारत ने 2-1 से जीता था।

गांगुली ने बाद में कहा कि उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिला, जिसकी वजह से देरी हुई, लेकिन इस पर बहुत बहस हो सकती है।

हालांकि, श्रीनाथ ने गांगुली की लीडरशिप की तारीफ की, खासकर युवराज सिंह, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे युवाओं को तैयार करने की उनकी काबिलियत की। उन्हें लगा कि 1990 के दशक के आखिर में मैच-फिक्सिंग स्कैंडल के बाद भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव आया, जिसमें खिलाड़ियों ने मिलकर खेल की इमेज को ठीक करने का इरादा बनाया।

श्रीनाथ ने कहा, "प्रत्येक खिलाड़ी में उस छवि को वापस लाने और फिर दुनिया को साबित करने की दृढ़ता थी कि क्रिकेट श्रेष्ठ है, क्रिकेट साफ-सुथरा है।"

उन्होंने कहा कि लीडरशिप टॉप चार या पांच खिलाड़ियों के एक ही पेज पर होने से आया, जिससे भारत को न केवल घरेलू मैदान पर लगातार जीत हासिल करने में मदद मिली, बल्कि विदेशों में भी जीत हासिल करने में मदद मिली।

श्रीनाथ ने याद किया कि 1991 और 1997-98 के बीच, भारत को विदेशों में जीतने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन 1999 के बाद से चीजें बदलनी शुरू हो गईं।

2003 वर्ल्ड कप फाइनल में पहले बैटिंग करना चाहते थे श्रीनाथ

2003 वर्ल्ड कप फाइनल हारे 23 साल हो गए हैं, मगर भारतीय फैंस के जहन में वह दर्द आज भी ताजा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उस खिताबी मुकाबले को याद करते हुए श्रीनाथ ने कहा कि वह टीम में उन लोगों में थे जो चाहते थे कि भारत पहले बैटिंग करे और ऑस्ट्रेलिया को दबाव में डाले।

उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों में से एक था जो चाहता था कि हमें हमेशा पहले बैटिंग करनी चाहिए और फिर उन पर प्रेशर डालना चाहिए।”

लेकिन गांगुली की सोच अलग थी। और एक बार फैसला हो जाने के बाद, श्रीनाथ ने कहा कि टीम को आगे बढ़ना होगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया बहुत ज्यादा मजबूत थी।

Lokesh Khera

लेखक के बारे में

Lokesh Khera

लोकेश खेड़ा लाइव हिन्दुस्तान में बतौर डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। हिंदी पत्रकारिता में इन्हें एक दशक से भी अधिक का अनुभव है। बचपन की अपनी रुचि को प्रोफेशनल करियर में तबदील करते हुए 2018 में बतौर खेल पत्रकार अपना सफर शुरू किया। क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, हॉकी, एथलेटिक्स समेत तमाम खेलों को बारीकी से कवर करते हैं। क्रिकेट टुडे के साथ उनकी पारी का आगाज हुआ, जहां उन्होंने वेबसाइड के साथ मैगजीन के लिए काम किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी के साथ जुड़े और वहां तीन साल अपनी सेवाएं दी। इस दौरान ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, 2019 वनडे वर्ल्ड कप और 2021 टी20 वर्ल्ड कप जैसे तमाम इवेंट कवर किए और कई इंटरव्यू भी लिए, जिसमें दानिश कनेरिया और चेतन साकारिया जैसे इंटरनेशनल स्टार शामिल हैं। लाइव हिन्दुस्तान के साथ वह फरवरी 2022 जुड़े। यहां भी उन्होंने कॉमनवेल्थ, ओलंपिक, 2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े-बड़े इंटरनेशनल इवेंट को बखूबी कवर किया और नई सचें सीखने में हमेशा रुचि रखते हैं। क्रिकेट पढ़ने लिखने के अलावा खुद खेलना भी पंसद करते हैं। इसके अलावा किताबें पढ़ना भी पंसद है।

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