Hindi Newsक्रिकेट न्यूज़It is more difficult to be a Pakistani cricketer in the era of social media know why did R Ashwin say this t20 world cup
सोशल मीडिया के दौर में पाकिस्तानी क्रिकेटर होना ज्यादा मुश्किल है..., आखिर ऐसा क्यों बोले आर अश्विन?

सोशल मीडिया के दौर में पाकिस्तानी क्रिकेटर होना ज्यादा मुश्किल है..., आखिर ऐसा क्यों बोले आर अश्विन?

संक्षेप:

रविचंद्रन अश्विन के अनुसार, सोशल मीडिया के इस दौर में पाकिस्तानी क्रिकेटर होना सबसे कठिन काम है क्योंकि उन्हें सरकार के सीधे हस्तक्षेप, सीमा के दोनों ओर से होने वाली भारी ट्रोलिंग और भारत के खिलाफ 'किसी भी हाल में न हारने' के जबरदस्त मनोवैज्ञानिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

Feb 11, 2026 02:48 pm ISTVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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विश्व कप में पाकिस्तान खेलेगा या नहीं से लेकर भारत के साथ उसका मुकाबला होगा या नहीं के सस्पेंस के बाद अब आखिरकार पाकिस्तान भारत के साथ 15 फरवरी को टी-20 विश्व कप का मैच खेलने के राजी हो गया है। इस घटना पर अब क्रिकेट एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने तो पहले ही कह दिया था कि भारत और पाकिस्तान का मैच हर हाल में खेला जाएगा। अब उन्होंने एक पाकिस्तानी खिलाड़ी होने के नाते सोशल मीडिया के दौर में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है इसके बारे में अपनी बात रखी है। अश्विन ने इस दौर में पाकिस्तान क्रिकेटर होने को बेहद मुश्किल करार दिया है। उनका मानना है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर के सामने दवाब से निकलने के लिए दोहरी चुनौती है।

पूर्व भारतीय दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों के सामने आने वाली मानसिक चुनौतियों पर अपनी बेबाक राय साझा की है। उन्होंने अपने यूट्यूब शो 'ऐश की बात' में चर्चा करते हुए कहा कि आज की सोशल मीडिया जनरेशन में एक पेशेवर क्रिकेटर के रूप में जीना पहले से ही बहुत कठिन काम है। हालांकि, अश्विन का स्पष्ट मानना है कि एक पाकिस्तानी क्रिकेटर होना इससे भी कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और मानसिक रूप से थका देने वाला अनुभव है। उनके अनुसार, इन खिलाड़ियों को न केवल अपने देश से, बल्कि सीमा के दोनों तरफ से होने वाली भारी ट्रोलिंग और सोशल मीडिया हाइप का सामना करना पड़ता है। यह निरंतर चलने वाली आलोचना और डिजिटल शोर खिलाड़ियों के ऊपर दबाव की एक ऐसी परत बना देता है, जिससे बाहर निकलना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है।

अश्विन ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों की स्थिति को गहराई से समझाते हुए कहा कि उन्हें अक्सर अपनी सरकार और क्रिकेट बोर्ड से मिलने वाले कड़े निर्देशों के अनुसार ही काम करना पड़ता है। खिलाड़ियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं कि उन्हें कब, कहां और किसके साथ खेलना है। अश्विन ने इसे एक खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन और घुटन भरी स्थिति बताया। उन्होंने कहा, "अगर आप एक पल के लिए खुद को किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी के रूप में रखकर देखें, तो आप समझेंगे कि यह सब कितना मुश्किल है।" अश्विन के मुताबिक, खिलाड़ियों को न केवल अपनी फिटनेस और तकनीक पर काम करना होता है, बल्कि उन्हें खेल से जुड़े उन प्रशासनिक और राजनीतिक दबावों को भी ढोना पड़ता है, जो अक्सर उनके नियंत्रण में नहीं होते।

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों के संदर्भ में अश्विन ने खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों के ऊपर भारत के खिलाफ 'हर हाल में जीतने' का एक अनिवार्य मनोवैज्ञानिक दवाब हमेशा बना रहता है। अश्विन ने इसे एक दयनीय स्थिति करार दिया। उन्होंने कहा कि यह दबाव हर बड़े मैच के साथ लगातार बढ़ता ही जाता है। उनके अनुसार, जब कोई खिलाड़ी मैदान पर इस डर के साथ उतरता है कि उसे हारना नहीं है, तो वह अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाता। अश्विन का मानना है कि यह दबाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है और उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र होकर खेलने से रोकता है।

अश्विन ने विस्तार से बताया कि इस अत्यधिक दबाव का सीधा असर खिलाड़ियों की तकनीक और उनके जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ता है। उन्होंने बाबर आजम का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि टी20 क्रिकेट मूल रूप से जोखिम लेने का खेल है। लेकिन जब किसी खिलाड़ी पर हारने का डर हावी हो जाता है, तो वह मैदान पर जरूरी रिस्क लेने से बचने लगता है। अश्विन ने कहा, "यदि आप रिस्क नहीं लेते हैं, तो विपक्षी गेंदबाज के लिए आपको आउट करना या रन रोकना बहुत आसान हो जाता है।" उनके अनुसार, क्रिकेट में सफलता के लिए दिमाग को फ्रेश और खुला रखना अनिवार्य है। अश्विन के इन बयानों से लगता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों के लिए मैदान के बाहर की परिस्थितियों को संभालना ही उनकी खेल की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

लेखक के बारे में

Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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