ऐतिहासिक उपलब्धि से चूके ईशान किशन, दलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले सिर्फ तीसरे बैटर बनते

चेन्नई, सात सितंबर (भाषा)
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ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने से चूक गए हैं। उनके पास दलीप ट्रॉफी के फाइनल में तिहरा शतक जड़कर टूर्नामेंट के इतिहास का ऐसा करने वाला सिर्फ तीसरा क्रिकेटर बनने का मौका था, लेकिन वे 270 रन ही बना सके। 30 रन से चूक गए।

ishan kishan
ईशान किशन बड़ी उपलब्धि से चूके

ईइशान किशन ने उमस भरे मौसम में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 270 रन की पारी खेली जिससे पूर्व क्षेत्र ने सोमवार को चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

रमन लांबा और गगन खोड़ा के क्लब में एंट्री करने से चूके

किशन ने इस पारी से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने का दावा भी पेश किया। कुमार कुशाग्र ने भी 132 गेंद में 101 रन बनाकर अपना छठा प्रथम श्रेणी शतक जड़ा और किशन की करीब दो दिन तक चली 522 मिनट और 334 गेंद की मैराथन पारी में शानदार सहयोग दिया। दिन का खेल खत्म होने से कुछ मिनट पहले दक्षिण क्षेत्र ने पूर्व क्षेत्र का आखिरी विकेट हासिल किया। दिन का आकर्षण किशन की पारी रही जिसे तीन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की मौजूदगी में खेला गया। किशन दलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों के क्लब में शामिल होने से चूक गए। रमन लांबा ने 1987 और गगन खोडा ने 2001 में यह उपलब्धि हासिल की थी।

ईशान किशन ने ऐसे सजाई अपनी पारी

किशन ने पहले दिन 122 गेंद में शतक पूरा किया जबकि दूसरे शतक के लिए उन्होंने 148 गेंद खेलीं। यह धीमापन किसी बेहतरीन गेंदबाजी या मुश्किल पिच की वजह से नहीं था, बल्कि गेंदबाजों को थकाने और अपनी टीम के स्कोर को विपक्षी टीम की पहुंच से काफी दूर तक ले जाने की सोची-समझी रणनीति थी। किशन ने अपने करियर का दूसरा प्रथम श्रेणी दोहरा शतक 270 गेंद में पूरा किया जब उन्होंने कामचलाऊ स्पिनर देवदत्त पडिक्कल की गेंद को कवर के रास्ते सीमा रेखा के पार पहुंचाया। उन्हें केवल एक बार असहजता महसूस हुई जब बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद की गेंद उनके पेट पर लगी और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी। हालांकि दोहरा शतक पूरा करने के बाद किशन ने आक्रामक रुख दिखाया। उन्होंने 200 से 250 रन तक पहुंचने के लिए सिर्फ 31 गेंद खेलीं। किशन ने स्पिनर श्रेयस गोपाल और त्रिपुराना विजय के खिलाफ दो-दो छक्के लगाए। किशन ने श्रेयस की 100 गेंदों पर 94 रन और विजय की 88 गेंदों पर 70 रन बटोरे जिससे स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी पुल और ड्राइव उनके रन बनाने वाले मुख्य शॉट रहे और इन शॉट से उन्होंने 22 चौके लगाए। लगातार दूसरे दिन दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाज, विशेषकर मुख्य तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। सपाट पिच और उच्च स्तर की बल्लेबाजी के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर नजर आई। आखिरकार थकान ने किशन के शरीर को जकड़ लिया और उन्हें 301 गेंद में 250 रन बनाकर मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी पारी में 27 चौके और सात छक्के शामिल रहे।

किशन की शानदार पारी की बदौलत पूर्व क्षेत्र ने पहले सत्र में 106 और लंच के बाद के सत्र में 135 रन जोड़े। इस दौरान किशन ने पांचवें विकेट के लिए कुशाग्र के साथ केवल 290 गेंद में 230 रन और छठे विकेट के लिए अनुकूल रॉय (40 रन, 86 गेंद) के साथ 140 रन की साझेदारी कर पूर्व क्षेत्र की स्थिति और मजबूत की। कुशाग्र ने भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया और विकेट के दोनों ओर शानदार शॉट लगाकर गेंदबाजों की धुनाई की। इक्कीस वर्षीय कुशाग्र ने 128 गेंद में आठ चौकों और पांच छक्कों की मदद से अपना शतक पूरा किया लेकिन वह अपनी पारी को और अधिक लंबा नहीं बढ़ा सके। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने विजय की खराब शॉर्ट गेंद पर लापरवाही से पुल शॉट खेला और स्क्वायर लेग के पीछे खड़े मिलिंद को कैच दे बैठे।

अंतिम सत्र के शुरुआती मिनटों में मोहम्मद शमी के आउट होने के तुरंत बाद किशन ने फिर दक्षिण क्षेत्र को परेशानी में डाल दिया और अपने पहले तिहरे शतक के करीब पहुंच गए। हालांकि वह बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर सके। किशन ने विजय (180 रन पर चार विकेट) की गेंद पर जोरदार शॉट खेला लेकिन गेंद सीधे साइट स्क्रीन के पास खड़े रविचंद्रन स्मरण के हाथों में चली गई। हालांकि तब तक किशन अपना काम कर चुके थे।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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