क्या वॉइट बॉल क्रिकेट में ये टीम इंडिया का युग है? गौतम गंभीर ने नकारा, वजह भी बताई
भारत ने टी20 विश्व कप खिताब का बचाव करने वाली पहली टीम बनकर अपने दबदबे का सबूत दिया है लेकिन मुख्य कोच गौतम गंभीर इसे सीमित ओवरों के क्रिकेट में टीम इंडिया का युग नहीं मानते। उन्होंने इसकी वजह भी गिनाई। गंभीर ने कहा कि हमने वनडे में सीरीज गंवाईं है और अगर ये हमारा युग होता तो ऐसा नहीं होता।

भारत ने टी20 विश्व कप खिताब का बचाव करने वाली पहली टीम बनकर अपने दबदबे का सबूत दिया है लेकिन मुख्य कोच गौतम गंभीर इसे सीमित ओवरों के क्रिकेट में टीम इंडिया का युग नहीं मानते। उन्होंने इसकी वजह भी गिनाई। गंभीर ने कहा कि हमने वनडे सीरीज गंवाईं है और अगर ये हमारा युग होता तो ऐसा नहीं होता।
सीनियर बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली अब सिर्फ भारत की एकदिवसीय टीम का ही हिस्सा हैं।
लगातार तीन वर्षों में तीन आईसीसी खिताब (2024 टी20 विश्व कप, 2025 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 विश्व कप) जीतने के बाद भारत के दबदबे की 1999 और 2007 के बीच ऑस्ट्रेलिया के दबदबे (जब टीम ने लगातार तीन एकदिवसीय विश्व कप जीते) से तुलना करना लाजमी था।
गंभीर ने इस पर जवाब देते हुए कहा, ‘मैं सफेद गेंद के क्रिकेट के बारे में बात नहीं करूंगा क्योंकि सफेद गेंद के क्रिकेट में एकदिवसीय प्रारूप में हमने पिछली तीन में से दो श्रृंखला गंवाई हैं। अगर यह (हमारा) युग होता तो हम दो श्रृंखला नहीं हारते।’
उन्होंने नाम नहीं लिए लेकिन यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया (विदेश) और न्यूजीलैंड (स्वदेश) में श्रृंखला गंवाने के दौरान कौन-कौन खेला था।
हालांकि गंभीर इस बात से सहमत हैं कि हाल के आईसीसी टूर्नामेंट में भारतीय टीम का रिकॉर्ड अच्छा रहा है।
गंभीर ने कहा, ‘मैं इन युग पर विश्वास नहीं करता। आपको हर दिन मैदान उतरना होगा, चाहे आप कोई भी मैच खेल रहे हों। जब आप अपने देश के लिए खेल रहे होते हैं तो आप हर मैच जीतना चाहते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि यह द्विपक्षीय श्रृंखला है या आईसीसी ट्रॉफी है या विश्व कप है। मैं द्विपक्षीय और आईसीसी टूर्नामेंट में फर्क नहीं कर सकता क्योंकि ये एक ही हैं। सब कुछ बिल्कुल वैसा ही रहता है।’
गौतम गंभीर ने साथ में यह भी कहा कि जब तक वह टीम इंडिया के मुख्य कोच हैं तब तक निजी उपलब्धियों का जश्न नहीं मनाया जाएगा।
2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल मैचों के टॉप स्कोरर रहे गंभीर ने जोर देते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि सूर्या (भारत के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव) के साथ मेरा सामान्य सा फलसफा हमेशा से यही रहा है कि उपलब्धियां मायने नहीं रखती। ट्रॉफी मायने रखती हैं। भारतीय क्रिकेट में बहुत लंबे समय से हम उपलब्धियों के बारे में बात करते आ रहे हैं। और मुझे उम्मीद है कि जब तक मैं हूं हम उपलब्धियों के बारे में बात नहीं करेंगे।’
उन्होंने दोहराया, ‘उपलब्धियों का जश्न मनाना बंद करो, ट्रॉफी का जश्न मनाओ। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम खेल का बड़ा उद्देश्य ट्रॉफी जीतना है, ना कि व्यक्तिगत रन बनाना। यह मेरे लिए कभी मायने नहीं रखता था और ना ही कभी रखेगा।’
गंभीर ने कहा, ‘मैं बहुत खुशकिस्मत रहा हूं कि सूर्या और मेरी राय एक ही है, विशेषकर इस मामले में।’
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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