अर्जुन तेंदुलकर से क्यों प्रभावित दिखे ऋषभ पंत? LSG कैंप में दिखी दोनों की जबरदस्त बॉन्डिंग; VIDEO
लखनऊ सुपर जॉइंट्स ने सोशल मीडिया पर ट्रेनिंग सेशन का एक वीडियो क्लिप शेयर किया है जिसमें टीम के कप्तान ऋषभ पंत अर्जुन तेंदुलकर से उनके बल्ले के वजन के बारे में पूछते दिख रहे हैं। दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग दिख रही है।

लखनऊ सुपर जॉइंट्स ने सोशल मीडिया पर ट्रेनिंग सेशन का एक वीडियो क्लिप शेयर किया है जिसमें टीम के कप्तान ऋषभ पंत अर्जुन तेंदुलकर से उनके बल्ले के वजन के बारे में पूछते दिख रहे हैं। दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग दिख रही है। पंत इस बात से भी प्रभावित दिख रहे हैं कि जूनियर तेंदुलकर अपनी शादी के बाद सीधे आईपीएल की तैयारी के लिए टीम के साथ जुड़ गए। उन्होंने अर्जुन को ये भरोसा भी दिया कि किसी भी चीज की जरूरत हो तो बताना।
अर्जुन तेंदुलकर इन दिनों अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में थे। अब वह आईपीएल की तैयारी में जुटे हुए हैं। 26 साल के अर्जुन इस बार आईपीएल में लखनऊ सुपर जॉइंट्स के स्क्वाड का हिस्सा हैं। महानतम बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर का क्रिकेट करियर अब तक कुछ खास नहीं रहा है। हालांकि उनमें और उनके पिता में कुछ समानताएं जरूर हैं। सचिन तेंदुलकर की ही तरह अर्जुन ने भी रणजी ट्रॉफी के अपने डेब्यू मैच में शतक जड़ा था। दूसरी समानता तो ये है कि अर्जुन भी अपने पिता की तरह भारी बल्ले से खेलते हैं।
सचिन तेंदुलकर का बल्ला तो काफी भारी हुआ करता था। अर्जुन तेंदुलकर का बल्ला उतना भारी तो नहीं है लेकिन फिर भी ज्यादातर खिलाड़ियों के बल्ले से भारी है। लखनऊ सुपर किंग्स के कप्तान ऋषभ पंत के बल्ले से करीब 500 ग्राम ज्यादा वजन का बल्ला है अर्जुन तेंदुलकर का।
वीडियो में दिख रहा है कि ऋषभ पंत अर्जुन तेंदुलकर से पूछते हैं- तेरा कितना है भाई?
यहां पंत बल्ले के वजन के बारे में पूछ रहे हैं। इस पर अर्जुन जवाब देते हैं- 1220 (यानी 1220 ग्राम)।
पंत इतने भारी बल्ले के बारे में जानकर चौंक जाते हैं और पूछते हैं कि भारी से क्या फायदा है। तब अर्जुन तेंदुलकर बोलते हैं कि पापा तो 1310-1315 से खेलते थे। 1200 से हल्का मैं जाता नहीं हूं।
इस दौरान पंत जूनियर तेंदुलकर से काफी प्रभावित दिखते हैं। वह कहते हैं कि शादी के अगले ही दिन ही सुबह यहां आ गए। उसके बाद पंत उन्हें कहते हैं कि कुछ लगे तो बताना, मैं हमेशा मौजूद हूं।
बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्जुन तेंदलुकर इससे पहले मुंबई इंडियंस की तरफ से खेल चुके हैं। वह आईपीएल के दो सीजन में एमआई की तरफ से सिर्फ 5 मैच ही खेल पाए। उनमें उनके नाम 3 विकेट दर्ज है। इनमें से सिर्फ एक मैच में उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिला जिसमें उन्होंने 13 रन बनाए।
अर्जुन तेंदुलकर को लखनऊ सुपर जॉइंट्स ने ट्रेड के जरिए अपने साथ जोड़ा था। उन्हें उसी फीस पर एलएसजी ने लिया, जिस फीस पर वह मुंबई इंडियंस के साथ जुड़े थे यानी 30 लाख रुपये में।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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