सुनील गावस्कर की कहानी बता वैभव सूर्यवंशी को पिता बताते थे कैसे करें बाउंसर का सामना, 'बेबी बॉस' ने खुद बताया
वैभव सूर्यवंशी ने सुनील गावस्कर के साथ बातचीत में बताया कि कैसे उनकी कहानी बताकर उनके पिता उन्हें बाउंसर का सही से सामना करने को प्रेरित किया करते हैं। सूर्यवंशी ने बताया कि उनके पिता बताते हैं कि गावस्कर सर तो बिना हेल्मेट वेस्टइंडीज के खूंखार गेंदबाजों का सामना करते थे और बाउंसर पर हुक लगाते थे।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु लगातार दूसरी बार आईपीएल चैंपियन बन चुकी है। हालांकि आईपीएल 2026 में अगर सबसे ज्यादा किसी की धूम रही, किसी की चर्चा रही तो वह हैं वैभव सूर्यवंशी। सिर्फ 15 साल के वैभव सूर्यवंशी इस सीजन के टॉप रनस्कोरर रहे। वह आईपीएल इतिहास में सबसे कम उम्र के ऑरेंज कैप विनर हैं। एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्कों का भी रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने आईपीएल 2026 में 237.31 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। ऑरेंज कैप के साथ-साथ उन्हें इमर्जिंग प्लेयर अवॉर्ड, सुपर स्ट्राइकर अवॉर्ड और मोस्ट वेल्यूएबल प्लेयर का भी अवॉर्ड मिला। आईपीएल फाइनल के बाद वैभव सूर्यवंशी से महान सुनील गावस्कर ने स्टार स्पोर्ट्स पर काफी देर तक बात की। इस दौरान सूर्यवंशी ने खुलासा किया कि कैसे उनके पिता हमेशा गावस्कर की मिसाल देकर उन्हें बाउंसर का सही से सामना करने को प्रेरित किया करते हैं।
वैभव सूर्यवंशी ने बताया कि जब वह क्रिकेट खेलना शुरू किए और गेंदबाजों पर छक्के लगाते थे तो वे बाउंसर के हथियार का इस्तेमाल करते थे। इससे वह थोड़ा फ्रस्टेट हो जाया करते थे। तब उनके पिता उन्हें सुनील गावस्कर का किस्सा सुनाकर प्रेरित करते थे। सूर्यवंशी ने बताया कि उनके पिता बाउंसर से कैसे निपटा जाए, इसके लिए लिटल मास्टर का उदाहरण दिया करते हैं। वह बताते थे कि सुनील गावस्कर तो बिना किसी हेल्मेट के भी वेस्टइंडीज के खूंखार तेज गेंदबाजों के बाउंसरों को हुक कर दिया करते थे।
इस दौरान वैभव सूर्यवंशी ने ये भी बताया कि उन्होंने अपने फोन में एक नोट बना रखा था कि इस सीजन में उन्हें 700 रन बनाने हैं। सूर्यवंशी ने कहा, ‘मैंने अपने फोन में नोट्स बनाए थे। मैंने लिखा था कि मैं इस आईपीएल सीजन में 700 रन बनाना चाहता हूं। हर मैच के बाद मैं हर टीम के खिलाफ बनाए अपने स्कोर को नोट करता था।’
संयोग से इस 15 साल के विध्वंसक बल्लेबाज ने आईपीएल 2026 में न सिर्फ 700 रन का आंकड़ा पार किया, बल्कि 776 रन के साथ ऑरेंज कैप पर भी कब्जा किया।
इस दौरान पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने उनसे टेस्ट क्रिकेट को लेकर पूछा तो सूर्यवंशी ने कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहता हूं क्योंकि मेरे पिता ने मुझे सिखाया है कि यही सबसे बड़ा फॉर्मेट है और मैं इसे बहुत अच्छे से खेला हूं। हालांकि मुझे अब भी बहुत मैच खेलने की जरूरत है। मैंने रणजी ट्रॉफी खेली है लेकिन मुझे बहुत ज्यादा मौके नहीं मिले, और यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन मैं अपने खेल के इस पहलू पर काम करने जा रहा हूं।'
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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