वैभव सूर्यवंशी खास हैं, लेकिन सचिन तेंदुलकर से तुलना नहीं की जा सकती: केदार जाधव
केदार जाधव ने कहा, कोई भी तुलना नहीं कर सकता या यह भी नहीं कह सकता कि कोई दूसरा सचिन तेंदुलकर बन रहा है। तेंदुलकर अपने आप में एक मास्टर हैं और क्रिकेट के खेल में उनके योगदान के करीब कोई भी नहीं आ सकता है।

वैभव सूर्यवंशी जैसी युवा प्रतिभाओं के तेजी से उभरने ने स्वाभाविक रूप से मॉडर्न क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ तुलना शुरू कर दी है।
सचिन तेंदुलकर से कोई भी तुलना नहीं कर सकता
हालांकि, आईपीएल की कई फ्रेंचाइजी का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी केदार जाधव ने उन उभरती प्रतिभाओं की सराहना करने और दिग्गज खिलाड़ियों के साथ उनकी तुलना करने पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा है। केदार जाधव ने कहा, “कोई भी तुलना नहीं कर सकता या यह भी नहीं कह सकता कि कोई दूसरा 'सचिन तेंदुलकर' बन रहा है। तेंदुलकर अपने आप में एक मास्टर हैं और क्रिकेट के खेल में उनके योगदान के करीब कोई भी नहीं आ सकता है।” उन्होंने कहा, "हां, ऐसे युवा हो सकते हैं जो अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं, लेकिन उनकी तुलना तेंदुलकर जैसे किसी खिलाड़ी से कभी नहीं की जा सकती और न ही की जानी चाहिए।"
दिग्गज खिलाड़ियों की गरिमा बनाए रखने की बात
जाधव के लिए यह मुद्दा उभरते खिलाड़ियों को कम आंकने का नहीं है, बल्कि दिग्गज खिलाड़ी जिस गरिमा और गौरव का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसे बनाए रखने का है। उन्होंने समझाया, “दिग्गज खिलाड़ी केवल आंकड़ों या रिकॉर्ड के बारे में नहीं होते हैं। वे इस बारे में होते हैं कि उन्होंने लंबे समय तक खेल के लिए क्या किया है। उन्होंने खेल को आगे बढ़ाया है, लाखों लोगों को प्रेरित किया है और एक ऐसी विरासत बनाई है जो अपने आप में बेमिसाल है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेंदुलकर का करियर और सफर हर मायने में अनोखा था। जाधव ने आगे कहा, "तेंदुलकर ने जो हासिल किया वह हर मायने में 20-25 वर्षों के निरंतर प्रदर्शन का परिणाम था। यह सिर्फ रन बनाने के बारे में नहीं है। यह दबाव और उम्मीदों को संभालने और फिर भी हर बार शानदार प्रदर्शन करने के बारे में है।"
वैभव को अभी खेलने दें और आगे बढ़ने दें
सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए, जाधव ने उनकी क्षमता को उजागर करने में सावधानी बरती लेकिन एक बात स्पष्ट भी कर दी। उन्होंने कहा, “वैभव एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। वह अच्छे संकेत दे रहे हैं, वह प्रदर्शन कर रहे हैं, और उनके करियर के इस पड़ाव पर यही मायने रखता है।” हालांकि, उन्होंने दोहराया कि शुरुआती सफलता से समय से पहले तुलना नहीं होनी चाहिए। जाधव ने कहा, "उसे खेलने दें, उसे आगे बढ़ने दें। हर खिलाड़ी का अपना सफर होता है। यदि आप बहुत जल्दी तुलना करना शुरू कर देते हैं, तो आप उस खिलाड़ी पर बेवजह का दबाव डाल रहे होते हैं।"
तुलनात्मक दबाब नकारात्मक असर डाल सकता है
जाधव का मानना है कि ऐसा दबाव अक्सर उल्टा असर डाल सकता है। उन्होंने बताया, “जब आप किसी युवा की तुलना किसी दिग्गज से करते हैं, तो हर पारी एक परीक्षा बन जाती है। लोग हर बार उसके बल्लेबाजी करने आने पर महानता की उम्मीद करने लगते हैं, और खिलाड़ी का विकास इस तरह से नहीं होता है।” उन्होंने युवा क्रिकेटरों को मैदान के बाहर की चकाचौंध से बचाने के महत्व पर भी ध्यान आकर्षित किया। सूर्यवंशी के बारे में जाधव ने कहा, “इस स्तर पर, उन्हें मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जितना संभव हो सके दूर रहना चाहिए। उनका ध्यान क्रिकेट पर, अपने खेल में सुधार करने पर और हर दिन सीखने पर होना चाहिए।”
लेखक के बारे में
Vimlesh Kumar Bhurtiyaविमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार
संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।
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