वैभव सूर्यवंशी से इस अंदाज में मिले संजीव गोयनका कि गावस्कर बोले- तुम्हें जल्द खरीदूंगा
वैभव सूर्यवंशी ने अपनी तूफानी पारी से LSG की जीत की उम्मीदों में कील ठोक दी, लेकिन जब वह आउट हुए तब संजीव गोयनका भी खड़े होकर उनका इस्तकबाल करते दिखे। मैच के बाद भी वह वैभव से बात करते दिखे। उस दौरान कॉमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि तुम्हारे लिए जल्द बोली लगाऊंगा।

वैभव सूर्यवंशी। 15 वर्ष का ऐसा क्रिकेटर जिसकी विस्फोटक बल्लेबाजी के मुरीद प्रतिद्वंद्वी भी हो जाते हैं। आईपीएल 2026 में मंगलवार को जयपुर में वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा गर्दा काटा कि विपक्षी लखनऊ सुपर जॉइंट्स के मालिक संजीव गोयनका भी उनके कायल हो गए। इस लड़के ने एलएसजी की जीत की उम्मीदों में कील ठोक दी, लेकिन जब वह शतक से चूकते हुए आउट हुआ तब गोयनका भी खड़े होकर उसकी कमाल की पारी का इस्तकबाल करते दिखे। एलएसजी के मैच हारने के बाद तो वह सूर्यवंशी के पास जाकर व्यक्तिगत तौर पर शाबाशी दी। जब गोयनका सूर्यवंशी से बात कर रहे थे तब कॉमेंट्री कर रहे महान सुनील गावस्कर ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'मैं जल्द ही तुम्हारे लिए बोली लगाऊंगा।'
अपने शानदार प्रदर्शन की वजह से प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए वैभव सूर्यवंशी ने 38 गेंदों में 93 रन की पारी खेली। उन्होंने इस दौरान 7 चौके और 10 छक्के लगाए। वह 7 रन से शतक से चूक गए लेकिन जब वह आउट हुए तो लखनऊ सुपर जॉइंट्स के मालिक संजीव गोयनका और कोच जस्टिन लेंगर तक उनके सम्मान में खड़े हो गए। ग्राउंड से बाहर आते वक्त रविंद्र जडेजा समेत राजस्थान के कई खिलाड़ी उनके स्वागत में खड़े रहे।
लखनऊ सुपर जॉइंट्स की हार के बाद संजीव गोयनका वैभव सूर्यवंशी से बातचीत करते दिखे। तब सूर्यवंशी अपने फैंस को ऑटोग्राफ देने में मशगूल थे।
किसी विपक्षी टीम के मालिक का उस खिलाड़ी के पास जाना और बधाई देना जिसने उनकी टीम की हार की इबारत लिखी हो, ये मंजर कभी-कभार ही दिखता है। यही वजह है कि इस दृश्य ने सबका ध्यान खींचा और गावस्कर तो हंसी-मजाक के लहजे में ये तक कह गए कि अगली बार तुम्हारे लिए बोली लगाऊंगा यानी गोयनका संभवतः ये कह रहे कि अगली बार तुम्हें नीलामी में खरीदूंगा एलएसजी के लिए।
राजस्थान रॉयल्स ने वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी की बदौलत 221 रनों के लक्ष्य को 5 गेंद बाकी रहते ही 7 विकेट से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही रॉयल्स अब प्लेऑफ के इकलौते बचे बर्थ के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए अब अपने आखिरी लीग मैच को जीतना होगा।
वैभव सूर्यवंशी की पारी भी क्या पारी रही! शुरुआत में वह काफी धीमा खेले। शुरुआती 12 गेंदों में वह सिर्फ 11 रन ही बना पाए थे और उस वक्त यशस्वी जायसवाल बल्ले से गदर काटे हुए थे। लेकिन एक बार जब सूर्यवंशी ने गियर बदला तो लखनऊ सुपर जॉइंट्स के गेंदबाजों की जैसे शामत ही आ गई। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अगली 26 गेंदों में ही उन्होंने 82 रन ठोक डाले।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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