प्रियांश आर्या की मानसिक मजबूती के पीछे उनके कोच भारद्वाज का बड़ा हाथ, कहा- वह अलग ही मिट्टी का बना है

Vimlesh Kumar Bhurtiya नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा)
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रिकी पोंटिंग उनके खेल की तकनीकी खामियों को सुधारने में मदद के लिए मौजूद हैं, लेकिन प्रियांश आर्य के लिए उनके बचपन के कोच और मार्गदर्शक संजय भारद्वाज की भूमिका उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सत्र की चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की रही है।

प्रियांश आर्या की मानसिक मजबूती के पीछे उनके कोच भारद्वाज का बड़ा हाथ, कहा- वह अलग ही मिट्टी का बना है

रिकी पोंटिंग उनके खेल की तकनीकी खामियों को सुधारने में मदद के लिए मौजूद हैं, लेकिन प्रियांश आर्य के लिए उनके बचपन के कोच और मार्गदर्शक संजय भारद्वाज की भूमिका उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सत्र की चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की रही है।

अलग ही मिट्टी के बने हैं प्रियांश आर्या

दिल्ली के आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियांश ने पिछले साल पंजाब किंग्स के लिए अपने पदार्पण सत्र में 475 रन बनाकर तुरंत स्टारडम हासिल कर लिया था। इस सत्र में उनके सामने और भी बड़ी चुनौती थी-यह साबित करना कि उनका पहला सत्र महज एक इत्तेफाक नहीं था। आईपीएल में एक सत्र में चमक बिखेरने के बाद गुम हो जाने वाले पॉल वल्थाटी और स्वप्निल अस्नोदकर जैसे कई उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन गौतम गंभीर को कोचिंग देने वाले भारद्वाज को हमेशा से पता था कि प्रियांश अलग मिट्टी के बने हैं। मौजूदा सत्र में 11 गेंदों पर 39, 20 गेंदों पर 57 और 37 गेंदों पर 93 रन की पारियों के बाद इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने साबित कर दिया है कि वह क्षणिक चमक नहीं हैं और एक अच्छे सत्र के बाद उनके सिर पर सफलता का खुमार नहीं चढ़ा है।

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जब तुम मैदान पर उतरते हो…, कोच ने दी खास सीख

भारद्वाज ने सोमवार को पीटीआई से कहा, ''इस साल मैं उसे लगातार यही समझाने और उसके दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रहा हूं कि जब तुम मैदान में उतरते हो, तो तुम्हें 'अतीत के प्रदर्शन की यादों' को लेकर नहीं चलना है और यह महसूस नहीं करना है कि तुमने कुछ हासिल कर लिया है या पिछले साल के प्रदर्शन के बाद तुम्हारी सामाजिक स्थिति बदल गई है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने उससे कहा कि अपना 'सोशल स्टेटस' स्टेडियम के बाहर ही छोड़कर आओ। जो रन तुमने बनाए हैं, वे तुम्हारी मेहनत और भगवान की कृपा का परिणाम हैं।" दिल्ली के मशहूर एलबी शास्त्री क्लब की आत्मा माने जाने वाले भारद्वाज ने पिछले तीन दशकों में सैकड़ों बच्चों को कोचिंग दी है और वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि आईपीएल के साथ अचानक आने वाला स्टारडम किसी भी युवा खिलाड़ी पर क्या असर डाल सकता है।

उन्होंने कहा, ''आमतौर पर जिन बच्चों को आईपीएल के एक सत्र के बाद अचानक सफलता और पैसा मिलता है, वे बहुत सारा बोझ अपने साथ लेकर चलते हैं। मैदान पर अपेक्षाओं का दबाव होता है और मन के भीतर उस स्टारडम को बनाए रखने की बेचैनी भी रहती है।'' प्रियांश के साथ उनका रिश्ता 'गुरु-शिष्य' जैसा है, और उनकी सबसे खास बात यह है कि वह हर सलाह को ध्यान से सुनते हैं और उसके सार को आत्मसात करते हैं। उन्होंने कहा, ''गौतम गंभीर की तरह मैं भी प्रियांश का मेंटर हूं। गौतम अपने शुरुआती दिनों से ही सलाह के लिए मेरे पास आते थे, और यही बात प्रियांश के साथ भी है। वह समझता है कि 'अगर मेरे गुरु कुछ कह रहे हैं, तो वह मेरे भले के लिए ही होगा'।''

भारद्वाज ने प्रियांश के माता-पिता (दोनों स्कूल शिक्षक हैं) को भी उनके आईपीएल के शानदार शुरुआती सत्र के बाद उन्हें जमीन से जुड़े रखने का श्रेय देते हुए कहा, ''उनके माता-पिता ने भी बड़ी भूमिका निभाई। दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने प्रियांश से कहा कि हम पूरी तरह व्यवस्थित हैं, तुम्हें हमारी चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम अपने खेल पर ध्यान दो।' लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ रविवार रात को आक्रामक पारी खेलने के बाद प्रियांश ने अपने इस कोच को फोन किया था। भारद्वाज ने कहा, ''वह रात करीब एक बजे होटल पहुंचने के बाद फोन पर बात कर रहा था। आज सुबह उसने हमारे यहां प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों को वीडियो कॉल भी किया। युवा खिलाड़ी भी अपने प्रियांश भैया को देखकर काफी उत्साहित हो जाते हैं, जब वह उन्हें प्रेरित करते हैं।''

अन्य कोचों के विपरीत भारद्वाज इस बात को लेकर काफी व्यावहारिक हैं कि एक कोच अपने शिष्य की कितनी और किस तरह मदद कर सकता है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, "कोच का काम क्या है। उन्होंने कहा, ''कोच खिलाड़ी नहीं बनाते। कोच माहौल बनाता है और उस माहौल का कौन सा बच्चा कितना उपयोग करेगा, यह उस पर निर्भर करता है। अगर कोच खिलाड़ी बनाता, तो मेरे हर खिलाड़ी गौतम गंभीर या प्रियांश आर्य बनते।''

Vimlesh Kumar Bhurtiya

लेखक के बारे में

Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

खेल पत्रकारिता और पत्रकारिता का उद्देश्य
विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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