मम्मी की रोटी से भी ज्यादा गोल; वैभव सूर्यवंशी का शेफ अवतार आपने देखा क्या? VIDEO

Chandra Prakash Pandey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राजस्थान रॉयल्स ने 15 साल के धुरंधर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के शेफ अवतार का एक एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। वीडियो में सूर्यवंशी किचन में रोटी बनाते दिख रहे हैं। एकदम गोल रोटी दिखाते हुए बोलते दिख रहे हैं कि ये तो मम्मी की रोटी से भी ज्यादा गोल है। 

मम्मी की रोटी से भी ज्यादा गोल; वैभव सूर्यवंशी का शेफ अवतार आपने देखा क्या? VIDEO

वैभव सूर्यवंशी अपने दनदनाते शॉट्स की वजह से जाने जाते हैं। बैटिंग के दौरान वह विपक्षी गेंदबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम हैं। बड़े से बड़े गेंदबाज के सामने 15 साल का ये लड़का इतने बेखौफ अंदाज में खेलता है कि क्रिकेटप्रेमियों को तो बस मजा ही आ जाता है। बल्ले के साथ मैदान पर वह जितने आक्रामक और खूंखार हैं, मैदान से बाहर उतने ही मस्तमौला मगर शर्मीले, शरारती मगर मासूम हैं। साथी खिलाड़ी उनके साथ मस्ती करते दिखते रहते हैं और वह भी टीम मेट्स के साथ हंसी-मजाक से भरपूर हल्के-फुल्के लम्हे बिताते रहते हैं। अब देखिए ना, बाएं हाथ का ये बल्लेबाज मास्टरशेफ बनने की भी कोशिश कर रहा है। आपने उनका ये वीडियो देखा क्या?

राजस्थान रॉयल्स ने अपने ऑफिशल सोशल मीडिया हैंडल से वैभव सूर्यवंशी के शेफ अवतार का एक प्यारा सा वीडियो शेयर किया है। वीडियो में दिख रहा है कि वैभव किचन में काम कर रहे हैं। इस दौरान वह एक के बाद एक करके तीन रोटियां बनाते हैं। एक बार तो चिल्लाते हुए देखते हैं कि मम्मी की रोटी से भी ज्यादा गोल रोटी।

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वीडियो की शुरुआत में वैभव सूर्यवंशी बोलते हैं- मास्टरशेफ वैभव। उसके बाद वह यह बताते हैं कि किचन में वह आखिर किस तरह से अपना कंट्रिब्यूशन दे सकते हैं।

वैभव कहते हैं, ‘रोटी बना सकता हूं। उससे ज्यादा कुछ नहीं बना सकता।’

उसके बाद वह एक रोटी बेलकर लाते हुए दिखते हैं। उसके किनारे पर एक जगह वह एक खास आकृति बनाकर लाए होते हैं। दो जगह से आटे को थोड़ा सा बाहर खींचकर। वह कहते हैं, 'ये पांडा का दो कान निकाला है मैंने।'

देखें वीडियो:

इस बीच वह रोटी को सेंकने की कोशिश भी करते हैं। रोटी सेंकते वक्त वह काला चश्मा पहने हुए दिख रहे। फुल स्वैग में। वह किसी शेफ के अंदाज में हवा में उछालकर रोटी पलटने की कोशिश करते हैं। ये बात अलग है कि वह इसमें नाकाम होते हैं और उनके चेहरे पर झेंपने का भाव भी साफ दिख जाता है।

उसके बाद वह एक और रोटी के साथ दिखते हैं और उसकी गोलाई को देखकर वह अपनी खुशी नहीं छिपा पाते। मारे खुशी के वैभव सूर्यवंशी कहते हैं, ‘मम्मी के रोटी से ज्यादा गोल रोटी है।’

वैभव खुद ही खुद की तारीफ भी करते हैं। वीडियो में वह कहते दिखते हैं, 'बाकियों से तो बहुत अच्छा चल रहा है।'

तीसरी रोटी बेलने के बाद वह कहते दिखते हैं, 'रोटी नंबर 3 रेडी।' उसी बीच जब किसी ने उनकी रोटी ले ली तो वह शिकायती लहजे में बोलते हैं, 'ही इज टेकिंग आवर रोटी।'

Chandra Prakash Pandey

लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।

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