होटलों में बंद मेंबर, उड़ानों की बदली दिशा; BCCI के 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' पर ललित मोदी का बड़ा खुलासा
IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने खुलासा किया है कि किस तरह 2005 के BCCI चुनाव में प्रतिद्वंद्वी पक्षों ने बोर्ड मेंबरों को होटलों में रखा। दूसरे पक्ष के समर्थक मेंबरों की उड़ानों का ठिकाना ही बदलवा दिया। एक दूसरे के समर्थक मेंबरों कुछ फ्लाइटें डाइवर्ट कराई गईं।

पिछले कुछ वर्षों में देश ने एक अलग तरह की राजनीति देखी। नई तरह की।'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स'। सांसदों, विधायकों के पाला बदल को रोकने के लिए उन्हें प्रतिद्वंद्वी दलों की पहुंच से दूर किसी सुरक्षित जगह पर ठहराना। कभी कहीं विधानसभा चुनावों के बाद तो कभी कहीं विधायिका के कार्यकाल के ही बीच। और तो और, राज्यसभा के चुनावों तक में इस तरह की राजनीति दिखी। चुनाव बाद नतीजों से पहले ही उम्मीदवारों तक को सुरक्षित रिजॉर्ट में पहुंचाने के भी उदाहरण दिखे। लेकिन बीसीसीआई के चुनावों में तो इससे पहले ही 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' की झलक दिख गई थी। एक तरफ शरद पवार थे तो दूसरी तरफ जगमोहन डालमिया। आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने खुलासा किया है कि किस तरह 2005 के बीसीसीआई चुनाव में प्रतिद्वंद्वी पक्षों ने बोर्ड मेंबरों को होटलों में बंद रखा। दूसरे पक्ष के समर्थक मेंबरों की उड़ानों का ठिकाना ही बदलवा दिया। दोनों पक्ष फ्लाइट डाइवर्ट के जरिए एक दूसरे के समर्थक मेंबरों को मीटिंग में पहुंचने से ही रोकने की कोशिशें की थी।
ललित मोदी ने बताया BCCI चुनाव का दिलचस्प किस्सा
ललित मोदी देश के सबसे विवादित खेल प्रशासकों में से एक हैं। लंबे समय से वह देश छोड़कर ब्रिटेन में रह रहे हैं। लेकिन इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि इंडियन प्रीमियर लीग की सफलता के पीछे ललित मोदी का बहुत बड़ा हाथ है। आज बीसीसीआई का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जो रुतबा है, रसूख है, प्रभाव है, जो आर्थिक महाशक्ति की छवि है, उसमें आईपीएल की सफलता का बड़ा हाथ है। ललित मोदी ने रिद्धिमा पाठक के यूट्यूब चैनल पर बताया कि किन घटनाओं ने आईपीएल को लॉन्च करने की बुनियाद रखी। उन्होंने बताया कि कैसे शरद पवार बीसीसीआई अध्यक्ष के चुनाव में जगमोहन डालमिया से सिर्फ एक वोट से हार गए थे। मोदी के लिए ये झटका था क्योंकि पवार को चुनाव लड़ाने के लिए राजी करने वालों में वह भी थे। मोदी ने यह भी बताया कि कैसे उसके बाद अगले चुनाव में शरद पवार ने जीत हासिल की और उसके बाद के वर्षों में आईपीएल ने आकार लेना शुरू किया।
जब जगमोहन डालमिया से सिर्फ 1 वोट से हार गए थे शरद पवार
ललित मोदी ने रिद्धिमा पाठक के यूट्यूब चैनल पर पवार बनाम डालमिया के दिलचस्प चुनाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'हमने शरद पवार को चुनाव लड़ने के लिए राजी किया। हम चुनाव में गए, हम जीत के प्रति आश्वस्त थे और एक वोट से हार गए। वजह थी हमारे अपने ही लोगों के बीच लड़ाई। पुणे क्रिकेट एसोसिएशन में अजीत शिरके और दयानेश्वर अगाशे की फाइट। अगाशे डालमिया गुट से जा मिले...पवार बहुत अपसेट हुए थे। होना भी चाहिए। अब हमने अगले साल फिर लड़ा। बड़े-बड़े लोग उधर थे। शुक्ला उधर थे, श्रीनिवासन उधर थे। चुनाव बहुत तगड़ा हुआ।'
ललित मोदी ने बताया कि कैसे 2005 में सुप्रीम कोर्ट के नियुक्त दो पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में कोलकाता में बीसीसीआई अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। उसमें दोनों पक्षों ने जीत के लिए साम-दाम-दंड-भेद हर तरह के हठकंडे अपनाए।
अगली बार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में BCCI का चुनाव हुआ
मोदी ने कहा, ‘मुझे याद है। 29 नवंबर 2005 का दिन था। इसलिए याद है कि मेरा बर्थडे था। कलकत्ता में चुनाव था। जगमोहन डालमिया के शहर में। मैं तमाम अदालती लड़ाइयां लड़ रहा था और हरीश साल्वे मेरी तरफ से लड़ सरहे थे। हमें सुप्रीम कोर्ट से ये आदेश मिल गया कि चुनाव शीर्ष अदालत के दो रिटायर्ड जजों की निगरानी में होंगे।’
और पवार ने जीत ली बाजी
उन्होंने आगे बताया, 'चुनाव वाला दिन। डालमिया एक टेबल के पास बैठे थे और वह हममें से कुछ को अयोग्य घोषित करने वाले थे। लेकिन संयोग से सही समय पर मैं वहां मौजूद था। मैंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का फैसला दिखाया। आप कमिटी के चेयरमैन नहीं हो सकते। हंगामा हुआ। दरवाजे बंद कर दिए गए। पुलिस की व्यवस्था भी हो गई। सुप्रीम कोर्ट के जज अंदर आए। अब चुनाव कराना था। मिस्टर जेटली (अरुण जेटली) और सभी वकील लाचार थे, वे चुनाव में देरी के लिए हर मुमकिन कोशिश किए। मीटिंग जिसे आधे घंटे में खत्म हो जानी चाहिए थी, वह शाम में 5 बजे तक चलती रही। बड़ा तमाशा हुआ।'
ललित मोदी ने आगे जो बताया वो कुछ ऐसा था जो आगे चलकर भारतीय राजनीति में भी दिखने लगा। रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के रूप में।
भविष्य के ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की दिख गई थी झलक
ललित मोदी ने आगे बताया, 'ये सब कुछ होने से पहले लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों से मीटिंग के लिए आ रहे थे। वे बीसीसीआई के मेंबर थे। ऐसे भी लोग थे जिन्हें होटल के कमरों में रखा गया था। ऐसे भी लोग थे जिनकी फ्लाइट डाइवर्ट कर दी गईं। और हमने भी उनके मेंबरों की कुछ फ्लाइटों को डाइवर्ट किया था...ये ऐसा चुनाव था जिसे आपको जीतना ही था।'
ललित मोदी ने आगे बताया, 'हमारी जीत हुई। वैसे शुक्ला, अनुराग ठाकुर, अरुण जेटली, श्रीनिवासन...इन सभी लोगों ने डालमिया को वोट दिया उसके बाद भी वह चुनाव हार गए। इस तरह 29 नवंबर को हम पावर में आए और उसके बाद आज के आधुनिक क्रिकेट की क्रांति की शुरुआत हुई।'
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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