इसका दोषी तो मैं हूं, शाहीन शाह अफरीदी नहीं; PSL में 'होटल कांड' पर सिकंदर रजा ने तोड़ी चुप्पी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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शाहीन शाह अफरीदी और उनके साथी खिलाड़ी सिकंदर रजा पर आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों के मना करने के बावजूद वे रात के वक्त होटल रूम में 4 अनधिकृत लोगों को जबरन लेकर गए। हालांकि रजा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए शाहीन को बेकसूर बताया है। उन्होंने कहा कि यहां अगर कोई दोषी है तो वो वह हैं, शाहीन नहीं।

Sikandar Raza

पाकिस्तान क्रिकेट लीग लगातार नकारात्मक वजहों से चर्चा में है। बॉल टैंपरिंग का मुद्दा अभी शांत ही नहीं हुआ था कि होटल की 'सुरक्षा में सेंध' का मामला चर्चा में है। दोनों ही मामलों में लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी कॉमन हैं। शाहीन और उनके साथी खिलाड़ी सिकंदर रजा पर आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों के मना करने के बावजूद वे रात के वक्त होटल रूम में 4 अनधिकृत लोगों को जबरन लेकर गए। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसके लिए शाहीन शाह अफरीदी पर 10 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बीच सिकंदर रजा ने अफरीदी का बचाव करते हुए न सिर्फ उन्हें बेकसूर बताया है, बल्कि सारा दोष अपने सिर पर ले रहे हैं।

पाकिस्तानी मूल के जिम्बाब्वे के क्रिकेटर हैं सिकंदर रजा

जिम्बाब्वे के क्रिकेटर सिकंदर रजा पाकिस्तानी मूल के हैं। वह पीएसएल में लाहौर कलंदर्स की टीम का हिस्सा हैं। पंजाब पुलिस की तरफ से पीएसएल के सीईओ सलमान नसीर के लिखे गए खत में सिकंदर रजा और शाहीन शाह अफरीदी पर होटल के सिक्यॉरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

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शाहीन तो बस मेरी मदद कर रहे थे: रजा

सिकंदर रजा ने आरोपों को खारिज करते हुए सफाई दी है कि जो 4 मेहमान होटल आए थे वे लंबे समय से उनके दोस्त और फैमिली मेंबर हैं। ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बातचीत में रजा ने शाहीन शाह अफरीदी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने ही उनसे रिक्वेस्ट किया था कि उनके दोस्तों को अंदर लाने में मदद करें। उनके मुताबिक शाहीन ने तो बस उनकी गुजारिश सुनी और अपने मन से ये काम नहीं किया।

अनजान नहीं, 19 साल पुरानी पहचान वाले थे मेहमान: रजा

सिकंदर रजा ने कहा, 'मेरे दोस्त और परिवार आए थे और मेरे अनुरोध पर शाहीन ने उनकी मदद की। अगर ये सब स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर हैं तो मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। और कुछ हद तक शाहीन भी इस चीज से वाकिफ नहीं थे। यहां दोषी तो मैं हूं, शाहीन नहीं। वह मेरे अनुरोध पर नीचे आए थे क्योंकि वहां मेरी क्लोज फैमिली और फ्रेंड थे। मैं उनसे बिजनस सेंटर में नहीं मिलना चाहता था। हम ऊपरी मंजिल पर 40 मिनट तक बैठे थे।'

सिकंदर रजा ने खुद को सुरक्षा प्रोटोकॉल से अनजान बताते हुए कहा कि वह उनसे मिलने आए लोगों को 19 वर्षों से जानते हैं। उन्होंने कहा, ‘प्लीज ये मत भूलिए कि यहां मेरा परिवार और मेरे रिश्तेदार रहते हैं। मैं पूरे साल उनसे मिल नहीं पाता हूं।’

पूरे विवाद को लेकर पंजाब पुलिस ने पीएसएल को जो लेटर लिखा है उसमें कहा है कि वह (PSL) इस मामले की समीक्षा करे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को होने से रोके।

Chandra Prakash Pandey

लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।

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