IPL से लेकर द हंड्रेड तक... दुनिया भर की T20 लीग्स से डरा ICC! बना दी ये स्पेशल कमेटी
दुनिया भर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तेजी से फैलने से चिंतित आईसीसी बोर्ड ने एक समिति बनाने को मंजूरी दे दी है जो एक ऐसा संतुलन बनाने की दिशा में काम करेगी जिससे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में कोई रुकावट न आए।

दुनिया भर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट तेजी से फैल रही है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेट का कैलेंडर बहुत व्यस्त लगता है, क्योंकि कई लीग्स के पास कोई विंडो नहीं है। इसी से चिंतित इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी के बोर्ड ने एक समिति बनाने को मंज़ूरी दे दी है। यह समिति एक ऐसा संतुलन बनाने की दिशा में काम करेगी, जिससे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में कोई रुकावट नहीं आए।
वर्तमान में इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल साल के कैलेंडर के दो महीने ले लेता है। हालांकि, पाकिस्तान सुपर लीग यानी पीएसएल आईपीएल के दौरान ही आयोजित होता है। इसके अलावा एसए20, आईएलटी 20, बीबीएल, बीपीएल, एसएलपीएल, द हंड्रेड और सीपीएल दुनिया भर की कुछ प्रमुख लीग हैं। इसमें यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग भी जुड़ने वाली है, जो इसी साल शुरू होगी। यह उन बेहतरीन टी20 खिलाड़ियों के लिए एक फायदेमंद करियर विकल्प बन जाएगा, जो 'फ्रीलांसर' (स्वतंत्र) बनना चाहते हैं।
आईसीसी ने एक बयान में कहा है, ''बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते दायरे पर चिंता जताई और मौजूदा ढांचे के भीतर अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के साथ फ्रेंचाइजी क्रिकेट के तालमेल का आकलन करने के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया। ''
वेस्टइंडीज जैसे देशों के लिए यह खतरा असली है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ी बस टी20 क्रिकेट लीग में ही खेलना चाहते हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण निकोलस पूरन हैं, जिन्होंने 30 साल की उम्र से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। हेनरिक क्लासेन भी लीग में अपना जलवा दिखा रहे हैं, लेकिन उन्होंने भी अपने दक्षिण अफ़्रीकी करियर को अलविदा कह दिया है।
सुनील नरेन को तो वेस्टइंडीज की जर्सी पहनने में कभी कोई खास दिलचस्पी ही नहीं रही, यहां तक कि टी20 क्रिकेट में भी नहीं। इतनी सारी लीग होने की वजह से आईसीसी का द्विपक्षीय सीरीज से जुड़ा फ्यूचर टूर प्रोग्राम यानी एफटीपी भी प्रभावित होने के कगार पर है। हालांकि, भारत इसका अपवाद है, क्योंकि वह अपने मौजूदा पंजीकृत प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को दूसरी लीग में खेलने की इजाजत नहीं देता।
इससे पहले, पिछले कुछ वर्षों में आईसीसी की अलग-अलग समितियों ने यह प्रस्ताव रखा था कि एक खिलाड़ी एक सत्र में कितनी लीग में बतौर 'फ्रीलांसर' खेल सकता है, इसकी एक सीमा तय होनी चाहिए और साथ ही उसे अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाना चाहिए। हालांकि, उस पर अमल नहीं हो पाया है। कई क्रिकेटर ऐसे हैं, जो साल में करीब आधा दर्जन लीग्स में भी खेलते हुए नजर आते हैं। कई बार तो खिलाड़ी अपने देश की बजाय टी20 लीग में खेलना पसंद करते हैं।
लेखक के बारे में
Vikash Gaurविकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स
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विकाश गौड़ पिछले 8 वर्षों से हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के स्पोर्ट्स सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर (असिस्टेंट मैनेजर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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