DRS है दिल्ली कैपिटल्स का हार का गुनहगार? समझिए कैसे DC से छिन गया वो कीमती 1 रन

Apr 09, 2026 02:51 pm ISTVikash Gaur लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली कैपिटल्स को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ एक रन से हार का सामना नहीं करना पड़ता, अगर क्रिकेट के नियमों में कुछ बदलाव कर दिए जाएं तो। ये मुद्दा काफी गर्म है और इस पर आईसीसी और तमाम क्रिकेट बोर्ड को सोचना होगा। 

DRS है दिल्ली कैपिटल्स का हार का गुनहगार? समझिए कैसे DC से छिन गया वो कीमती 1 रन

दिल्ली कैपिटल्स एक रन से हारती नहीं, अगर क्रिकेट के नियमों में एक बदलाव कर दिया जाए। दिल्ली कैपिटल्स को एक रन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन ये भी सच है कि दिल्ली के खाते में एक रन जोड़ा ही नहीं गया। पूरा मामला समझ लीजिए कि आखिरी कैसे दिल्ली की टीम गुजरात टाइटन्स के खिलाफ अपने होम ग्राउंड दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में हार से बच सकती थी और शायद मुकाबला भी जीत जाती।

हम सभी ने देखा कि डेविड मिलकर प्रसिद्ध कृष्णा की आखिरी गेंद पर दो रन नहीं बना सके और इस तरह दिल्ली को एक रन से हार मिली। अगर कुलदीप यादव आखिरी गेंद पर रन आउट नहीं होते तो एक रन भी पूरा हो जाता, तो भी मुकाबला टाई हो जाता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिल्ली कैपिटल्स ने न सिर्फ एक रन ही वजह से मैच गंवाया, बल्कि दो पॉइंट भी गंवाए, जो उन्हें पॉइंट्स टेबल के शिखर पर ले जा सकते थे।

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अब आपको वो नियम समझना पड़ेगा, जिसकी वजह से दिल्ली कैपिटल्स को एक रन नहीं मिला। दरअसल, दिल्ली कैपिटल्स की पारी का 10वां ओवर प्रगति पर था। राशिद खान गेंदबाजी कर रहे थे और ओवर की दूसरी गेंद को नितीश राणा ने रिवर्स स्वीप करने की कोशिश की। गेंद बल्ले का किनारा लेकर उनके पैड पर लग गई। राशिद ने जोरदार अपील की और अंपायर ने नितीश राणा को आउट दे दिया। तब तक नितीश राणा और केएल राहुल दोनों एकदूसरे को क्रॉस कर चुके थे और एक रन बाद में पूरा कर लिया था।

गेंद और बल्ले का संपर्क, फिर भी रन नहीं मिला

नितीश राणा ने बिना देरी किए रिव्यू ले लिया और थर्ड अंपायर ने पाया कि गेंद बल्ले का महीन से किनारा लेकर गई है। ऐसे में वे नॉटआउट तो हो गए, लेकिन जो रन उन्होंने दौड़ा वह मान्य नहीं हुआ, क्योंकि जैसे ही अंपायर आउट देता है तो रन काउंट नहीं होता। आईपीएल में ही नहीं, बल्कि डीआरएस इंटरनेशनल क्रिकेट में भी यूज होता है और तमाम अन्य लीगों में भी यूज होता है, जहां यही नियम लागू होता है। अब सवाल ये है कि जब थर्ड अंपायर ने बता दिया कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर गई है या फिर बल्लेबाज आउट नहीं है तो कम से कम उस रन को टीम या बल्लेबाज के खाते में जोड़ा जाना चाहिए।

ये मुद्दा काफी ज्यादा चर्चा में रहता है, क्योंकि ये तो लीग मैच है। फाइनल में भी एक रन की हार होती है, तो इस तरह की चीजें आपको चुभ सकती हैं। आपका इसका एक उदाहरण यह समझिए कि बल्लेबाज ने रन दौड़ लिया। गेंदबाज ने अपील की और फिर फील्डिंग टीम ने रिव्यू भी कर लिया। इसके बाद थर्ड अंपायर ने पाया कि बल्लेबाज आउट है तो उस केस में तो आप बल्लेबाज या टीम से रन छीन लेते हैं, तो नितीश राणा वाले केस में कम से कम बल्लेबाज को बल्ले से लगने पर एक रन तो दिया ही जाना चाहिए, लेकिन नहीं मिलता, क्योंकि गेंद को डेड मान लिया जाता है। क्रिकेट में डीआरएस से जुड़ा ये नियम बदलना चाहिए, ताकि एक अनफेयर एडवांटेज गलत फैसले का किसी टीम को हार या जीत के रूप में नहीं मिले।

अगर वो एक रन दिल्ली कैपिटल्स या नितीश राणा के खाते में काउंट होता तो फिर 19.4 ओवर में ही मैच टाई हो चुका होता और डेविड मिलकर ने पांचवीं गेंद पर जो सिंगल नहीं लिया था, वो सिंगल वहां लेकर मैच को 19.5 ओवर में खत्म कर सकते थे या फिर दोनों गेंदों पर कोई रन नहीं बनता तो कम से कम मैच टाई हो जाता और सुपर ओवर में फिर दोनों में से किसी एक टीम को जीतने का मौका मिलता।

Vikash Gaur

लेखक के बारे में

Vikash Gaur

विकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स


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विकाश गौड़ पिछले 8 वर्षों से हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के स्पोर्ट्स सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर (असिस्टेंट मैनेजर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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परिचय और अनुभव: विकाश गौड़ भारतीय डिजिटल स्पोर्ट्स मीडिया का एक उभरता हुआ चेहरा हैं। लगभग 8 वर्षों के अनुभव के साथ, विकाश ने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को जमीन से समझा है। 2016 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले विकाश ने डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच के साथ खेल पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जनवरी 2021 से वह 'लाइव हिन्दुस्तान' की स्पोर्ट्स टीम के मुख्य स्तंभ बने हुए हैं, जहां वह कंटेंट प्लानिंग और स्पोर्ट्स कवरेज का नेतृत्व करते हैं।


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मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद विकाश का सफर 'खबर नॉन स्टॉप' से शुरू हुआ था, जो अब देश के प्रतिष्ठित मीडिया घरानों तक फैला हुआ है। उन्होंने पत्रिका समूह की वेबसाइट 'कैच न्यूज' में खेल की खबरों की तकनीकी समझ विकसित की। इसके बाद 'डेली हंट' में वीडियो प्रोड्यूसर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने विजुअल स्टोरीटेलिंग के गुर सीखे। 'दैनिक जागरण' की वेबसाइट में करीब ढाई साल तक खेल डेस्क पर अपनी धार तेज करने के बाद, उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान का रुख किया, जहां वे बीते 4 साल से चौके-छक्के लगा रहे हैं। इंटर्न के तौर पर प्रिंट की समझ हासिल कर चुके विकाश गौड़ के पास अब डिजिटल की अच्छी समझ है और वे ट्रेंड को बखूबी फॉलो करते हैं।


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