IPL 2026 के बाद सिर्फ ऋषभ पंत नहीं, दो और टीमों के कप्तानों की हो सकती है छुट्टी

Chandra Prakash Pandey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, भाषा
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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में निराशाजनक अभियान के कारण तीन फ्रेंचाइजी के कप्तानों को इस महीने के अंत में सत्र के समापन के बाद अपने पद से हाथ धोना पड़ सकता है। अलग-अलग फ्रेंचाइजी के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वाले सूत्रों ने न्यूज एजेंसी भाषा को ये संकेत दिया है।

IPL 2026 के बाद सिर्फ ऋषभ पंत नहीं, दो और टीमों के कप्तानों की हो सकती है छुट्टी

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में निराशाजनक अभियान के कारण तीन फ्रेंचाइजी के कप्तानों को इस महीने के अंत में सत्र के समापन के बाद अपने पद से हाथ धोना पड़ सकता है।

अलग-अलग फ्रेंचाइजी के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वाले सूत्रों ने न्यूज एजेंसी भाषा को इसका संकेत दिया है। अक्षर पटेल, अजिंक्य रहाणे और ऋषभ पंत ने लगातार दो सत्र में अपनी टीम की कप्तानी की है लेकिन अपनी टीम को प्लेऑफ में ले जाने की कोशिश में बुरी तरह नाकाम रहे हैं।

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आधिकारिक रूप से अभी सिर्फ लखनऊ सुपर जॉइंट्स ही टूर्नामेंट से बाहर हुई है जिससे पंत लगातार दो सत्र में खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी और कप्तान रहे हैं।

लेकिन सभी व्यावहारिक वजहों से रहाणे की अगुआई वाली कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और अक्षर की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स के भी लीग के आखिरी दौर में बने रहने की उम्मीद कम है।

कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर अक्षर पटेल का प्रदर्शन खराब रहा है, उन्होंने नौ पारियों में 112.50 के स्ट्राइक-रेट से महज 100 रन बनाए हैं जिसमें से 56 रन एक पारी में और बाकी 44 रन आठ पारियों में बने हैं। यह जब है तब उन्होंने ज्यादातर में शीर्ष पांच में बल्लेबाजी की है।

इन 12 मैच में अक्षर ने केवल 36 ओवर गेंदबाजी की है जो तीन ओवर प्रति मैच हैं जिसमें उन्होंने 8.05 के इकोनोमी रेट से 10 विकेट झटके हैं। हालांकि साथी स्पिनर कुलदीप यादव का इकोनोमी रेट और भी खराब है।

आईपीएल सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, 'अक्षर अपनी कप्तानी की काबिलियत साबित करने में पूरी तरह विफल रहे हैं और ज्यादातर फैसले लेने के लिए हेमांग बदानी और वेणुगोपाल राव पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर वह अगले साल भी कप्तान बने रहते हैं तो यह एक चमत्कार होगा।'

सूत्र ने कहा, 'पूरे कोचिंग स्टाफ को भी रिटेन किए जाने की उम्मीद कम है।'

2027 में होने वाली मेगा नीलामी में अक्षर को बतौर खिलाड़ी रिटेन किया जा सकता है। लेकिन अब तक कप्तानी में उनका प्रदर्शन फीका ही रहा है।

पंत ने अलग-अलग स्थान पर बल्लेबाजी करने की कोशिश की है लेकिन अक्सर ऐसा लगा है कि वह अपने कंधों पर काफी बोझ उठाए हुए हैं।

एक फ्रेंचाइजी के लिए तुरंत नतीजे मिलना आम बात है, लेकिन लगातार दो सत्र के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाना लखनऊ सुपर जॉइंट्स के मालिक संजीव गोयनका को शायद ही पसंद आए।

गोयनका को ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो मनचाही कीमत देने को तैयार है लेकिन वह ऐसे व्यक्ति भी हैं जो ऐसे प्रदर्शन की मांग करते हैं जो मेहनताने के साथ सही साबित हो सकें।

पंत के 138 के स्ट्राइक-रेट से 251 रन टी20 के आधुनिक मानकों के हिसाब से खराब ही हैं। उन पर दबाव है इस बात से पता चलता है कि उन्होंने 11 मैचों में सिर्फ नौ छक्के लगाए हैं। उनके बल्ले की लय भी गायब है और टीम संयोजन के कुछ फैसलों ने टीम के समर्थकों को भी हैरान कर दिया है।

वहीं केकेआर में रहाणे की नियुक्ति काफी हद तक 'कोई विकल्प नहीं' होने के कारण हुआ मामला था क्योंकि फ्रेंचाइजी के पास भरोसेमंद कप्तान के विकल्प की कमी थी।

वहीं उनके मुंबई के पूर्व साथी अभिषेक नायर मुख्य कोच थे। हालांकि केकेआर इस बात से परेशान था कि अंगकृष रघुवंशी आधुनिक टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों की मांग के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए।

रघुवंशी ने 139 से ज्यादा के स्ट्राइक-रेट से 340 रन बनाए जबकि कप्तान रहाणे ने 133 के स्ट्राइक-रेट से 237 रन बनाए। दोनों ने शीर्ष तीन में बल्लेबाजी की जिससे लगभग हर मैच में शुरूआती लय धीमी रही।

दोनों ने 11 मैचों में मिलकर सिर्फ 25 छक्के लगाए।

रहाणे और रघुवंशी को तो एक ही अंतिम एकादश में साथ नहीं खेलना चाहिए था और प्रबंधन की जिद फ्रेंचाइजी के लिए महंगी साबित हुई।

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लेखक के बारे में

Chandra Prakash Pandey

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।

चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।

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