VIDEO: सारे मैच केरल में तो नहीं करा सकते, मीडिया के सामने ही शशि थरूर से बोले राजीव शुक्ला
IND vs SA: गुरुवार को शशि थरूर परिसर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उस दौरान उनकी नजर शुक्ला पर पड़ी। उन्होंने कहा, 'राजीव जी, मैं यह कह रहा था कि जनवरी में नॉर्थ इंडिया में मैच शेड्यूल करने के अलावा आइए केरल।'
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच बुधवार होने वाला टी20 मैच बगैर खेले रद्द हो गया। इसके साथ ही BCCI की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच संसद परिसर में सांसद शशि थरूर ने मीडिया के सामने ही बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के सामने यह मुद्दा उठा दिया। उन्होंने मैच केरल में कराए जाने का अनुरोध किया। इस पर शुक्ला ने रोटेशन पॉलिसी होने की बात कही। साथ ही कहा कि सभी मैच केरल में नहीं कराए जा सकते।
गुरुवार को थरूर परिसर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उस दौरान उनकी नजर शुक्ला पर पड़ी। उन्होंने कहा, 'राजीव जी, मैं यह कह रहा था कि जनवरी में नॉर्थ इंडिया में मैच शेड्यूल करने के अलावा आइए केरल।'
इसपर उपाध्यक्ष ने जवाब दिया, 'नहीं नहीं, केरल की बात नहीं है। शेड्यूलिंग पर ध्यान देना पड़ेगा कि 15 दिसंबर से 15 जनवरी से मैच... आगे ध्यान रखेंगे। केरल को तो मिलते हैं। यह तो रोटेशन पॉलिसी है।' इस बीच थरूर ने कहा, 'लेकिन इस अवधि में 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक...।' शुक्ला ने जवाब दिया, 'लेकिन सारी जगह के मैच केरल में थोड़ी न शिफ्ट कर देंगे।' थरूर ने कहा कि यही अच्छा होगा न।
यहां देखें वीडियो-
मैच नहीं हो पाया
चौथा टी20 अंतरराष्ट्रीय आधिकारिक तौर पर ‘अत्यधिक कोहरे’ के कारण बिना एक भी गेंद फेंके रद्द कर दिया गया। लेकिन सच्चाई यह थी कि प्रदूषण और कोहरे की एक मोटी चादर ने इकाना स्टेडियम को घेर लिया था जिससे दृश्यता बहुत कम हो गई थी। बुधवार को लखनऊ में AQI 400 से ऊपर खतरनाक स्तर में रहा जिससे खिलाड़ियों के कल्याण के प्रति बीसीसीआई की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शाम सात बजे शुरू होने वाला मैच आखिरकार छठे निरीक्षण के बाद रात साढ़े नौ बजे रद्द कर दिया गया। हालांकि यह एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं था क्योंकि वहां मौजूद सभी लोग जानते थे कि रात बढ़ने के साथ दृश्यता और खराब होती जाएगी। खिलाड़ियों ने शाम साढे़ सात बजे तक अपना वार्म-अप सत्र खत्म कर दिया था और ड्रेसिंग रूम में लौट गए थे। ठंड का सामना करते हुए रात नौ बजे तक दर्शकों की भीड़ भी कम होने लगी थी।
अब आगे क्या
कोई रिजर्व दिन नहीं होने के कारण दोनों टीमें अब शुक्रवार को होने वाले अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय के लिए अहमदाबाद जाएंगी। भारत श्रृंखला में 2-1 से आगे है। पीटीआई भाषा के अनुसार, बीसीसीआई आयोजन स्थलों का आवंटन करते समय रोटेशन नीति का पालन करता है लेकिन बोर्ड 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाली सीमित ओवरों की श्रृंखला से पहले स्थल बदलने पर विचार कर सकता था।
मौसम का रहता है असर
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पूरी श्रृंखला के लिए नवंबर और दिसंबर के दौरान न्यू चंडीगढ़, धर्मशाला, लखनऊ, रांची, रायपुर, विशाखापत्तनम, कटक, अहमदाबाद, गुवाहाटी और कोलकाता को आयोजन स्थल के तौर पर चुना गया था। यह वह समय होता है जब लखनऊ, न्यू चंडीगढ़ और धर्मशाला जैसे मेजबान शहरों में प्रदूषण का स्तर आमतौर पर सबसे खराब होता है।
भारतीय टीम न्यूजीलैंड का सामना पश्चिमी और दक्षिणी भारत के स्थलों पर करेगी जो मैच वडोदरा, राजकोट, इंदौर, नागपुर, रायपुर, विशाखापत्तनम और तिरुवनंतपुरम में खेले जाएंगे। सिर्फ एक मैच पूर्वोत्तर शहर गुवाहाटी में होना है। उत्तर खेत्र के अधिकतर आयोजन स्थल सर्दियों के महीनों में मौसम से प्रभावित होते रहे हैं।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
और पढ़ें


