सौरव गांगुली के खास क्लब में शामिल हुए देवदत्त पडिक्कल, शतक लगाकर किया बड़ा कारनामा
देवदत्त पडिक्कल ने शनिवार को श्रीलंका के खिलाफ शतक लगाकर रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करवाया। वह 21वीं सदी में गांगुली के बाद तीसरे नंबर पर शतक लगाने वाले दूसरे भारत के बाएं हाथ के बल्लेबाज बने।

बाएं हाथ के भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल एक खास क्लब में शामिल हो गए। वे 21वीं सदी में नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए टेस्ट शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले सौरव गांगुली ने 2002 में दिल्ली में जिम्बाब्वे के खिलाफ़ 136 रन बनाए थे। कुछ टेस्ट शतक सिर्फ स्कोरकार्ड में रन जोड़ते हैं। कुछ चुपचाप इतिहास के पन्नों में जगह बना लेते हैं। शनिवार को श्रीलंका के खिलाफ़ देवदत्त पडिक्कल के शतक ने ये दोनों काम किए। भारतीय टेस्ट क्रिकेट में यह पोजीशन बहुत अहम रही है यह नई गेंद का सामना करने के लिए तकनीक की मांग करती है, और साथ ही मिडिल ऑर्डर के लिए माहौल बनाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
दिग्गजों के क्लब में शामिल हुए देवदत्त
पडिक्कल ने इस चुनौती का सामना ऐसे आत्मविश्वास के साथ किया जैसे उन्हें पता हो कि यह मौका खुद उनकी पारी से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। इतिहास के पन्नों को देखें तो उनकी यह उपलब्धि और भी खास लगती है। नंबर 3 पर बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा टेस्ट शतक (चार) लगाने वाले भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाज विनोद कांबली हैं। गांगुली के नाम तीन शतक हैं, जबकि सलीम दुर्रानी, बापू नाडकर्णी, अजीत वाडेकर, एकनाथ सोलकर और सुरिंदर अमरनाथ ने एक-एक शतक लगाया है। अब उस खास सूची में पडिक्कल का नाम भी जुड़ गया है।
जब उन्होंने शतक पूरा किया, तब भारत का स्कोर 58 ओवर में एक विकेट पर 221 रन था और टीम की पारी मज़बूत स्थिति में थी। हालांकि, पडिक्कल के लिए इसका महत्व भारत के स्कोर से कहीं ज़्यादा था। दिल्ली में गांगुली के 136 रन बनाने के दो दशक से भी ज़्यादा समय बाद, एक और भारतीय बाएं हाथ के बल्लेबाज ने नंबर 3 पर टेस्ट शतक जमाया। और ऐसा करके, पडिक्कल भारत के होनहार बल्लेबाजों की कतार में शामिल एक और नाम से आगे बढ़कर, भारतीय टेस्ट इतिहास के एक छोटे और खास हिस्से से जुड़ गए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2024 में पर्थ में अपना पिछला टेस्ट खेलने वाले पडिक्कल ने 134 गेंदों में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया। दिन का खेल खत्म होने तक वह 178 गेंदों में 12 चौकों और एक छक्के की मदद से 131 रन बनाकर नाबाद थे। उनके साथ ऋषभ पंत 27 रन पर खेल रहे थे और दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 52 रनों की अटूट साझेदारी कर ली थी। इससे पहले लोकेश राहुल 77 रन पर रिटायर हर्ट हुए। उन्होंने दूसरे विकेट के लिए पडिक्कल के साथ 150 रन जोड़े।



