
संजू सैमसन के भविष्य पर लटकी तलवार, ऐसा हुआ तो टी20 वर्ल्ड कप में भी बेंच गर्म करते रह जाएंगे!
संजू सैमसन के भविष्य पर तलवार लटकी है। सैमसन पर जितेश शर्मा को तरजीह दी जा रही है। अगर जितेश ने दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड सीरीज में छाप छोड़ दी तो सैमसन को टी20 वर्ल्ड कप में भी बेंच गर्म करनी पड़ सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में खेले गए आखिरी तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में जितेश शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना अगर प्रयोग जैसा लग रहा था तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के पहले मैच में अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन पर उन्हें प्राथमिकता देना अगले साल होने वाले टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम प्रबंधन की सोच को स्पष्ट करता है। सैमसन की जगह निचले क्रम के किसी विशेषज्ञ फिनिशर को तरजीह देने के लिए थिंक टैंक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सैमसन को शुभमन गिल की वापसी के बाद बल्लेबाजी क्रम में शीर्ष स्थान से हटा दिया गया था, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। तब से वह प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
तो जीतेश शर्मा विकेटकीपर-बल्लेबाज होंगे
जितेश टीम में फिनिशर की अपनी भूमिका को अपनी रोजी-रोटी मानते हैं। अगर वह दक्षिण अफ्रीका और उसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज में खराब प्रदर्शन नहीं करते हैं तो यह तय है कि वह टी20 विश्व कप में शुरुआती मैचों में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका निभाएंगे। इस समय टीम में विकेटकीपर के विकल्पों के लिए सैमसन और जितेश के अलावा किसी और के नाम पर विचार करना भी मुश्किल है। क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर सैमसन को शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिलता है तो फिर निचले क्रम में बल्लेबाजी करने वाले जितेश को ही टीम में रखना सही होगा।

'दो या चार गेंद खेलना आसान नहीं होता'
पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह सही फैसला है। अगर संजू बल्लेबाजी क्रम में शीर्ष तीन में शामिल नहीं है और विकेटकीपर मध्यक्रम में बल्लेबाजी कर रहा है तो आप शीर्ष क्रम के बल्लेबाज की बजाय निचले क्रम के किसी विशेषज्ञ बल्लेबाज को टीम में रखना पसंद करेंगे। हर खिलाड़ी के लिए दो या चार गेंदों के लिए बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता। जितेश इस मामले में विशेषज्ञ हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विश्व कप से पहले भारत को नौ मैच खेलने हैं। मुझे टी20 विश्व कप से पहले ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं लगती।’’ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में खेलने वाली टीम से यह भी संकेत मिला कि दो प्रमुख गेंदबाज अर्शदीप सिंह और कुलदीप यादव एकसाथ प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हो सकते हैं क्योंकि टीम प्रबंधन आठवें नंबर तक अच्छे बल्लेबाज को रखने के पक्ष में है।

'अच्छा होता अगर दोनों को जगह मिलती'
अर्शदीप को संयुक्त अरब अमीरात में स्पिन गेंदबाजों के लिए अनुकूल विकेट पर अधिकतर मैच में बाहर बैठना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया में भी पांच मैच में से तीन मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। लेकिन कटक में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में अर्शदीप को मौका मिला और इस प्रारूप में भारत की तरफ से सर्वाधिक विकेट लेने वाले इस तेज गेंदबाज ने जसप्रीत बुमराह के साथ गेंदबाजी करते हुए एक बार फिर टीम को शुरुआती विकेट दिलाए। इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज की डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने की क्षमता का मुकाबला सबसे छोटे प्रारूप में भी करना मुश्किल है। अर्शदीप के टीम में होने के कारण एक और मैच विजेता कुलदीप यादव को बाहर बैठना पड़ा। दासगुप्ता ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है (अर्शदीप और कुलदीप में से किसी एक को चुनना)। जिस तरह से अर्शदीप गेंदबाजी कर रहे हैं आपको उनका चयन करना ही होगा। वह इस प्रारूप में देश की तरफ से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। अच्छा होता अगर दोनों को टीम में जगह मिलती लेकिन ऐसा संभव नहीं लगता है।’’






