
रोहित और कोहली के होने से कैसे रहता है ड्रेसिंग रूम का माहौल, हर्षित ने खोल दिए राज
भारतीय टीम के खिलाड़ी हर्षित राणा ने बताया कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों का टीम में होना, खासकर ड्रेसिंग रूम और खेल के मैदान पर पूरे माहौल को खुशनुमा और जीवंत बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि ये दिग्गज युवा खिलाड़ियों की मदद करते हैं।
तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम और मैदान में साथ रहने से माहौल खुशनुमा बना रहता है। उन्होंने बताया कि कोहली और रोहित चाहते हैं हर युवा खिलाड़ी बेहतर बने और वह मेरी भी मदद करते हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली वनडे टीम में सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं। दोनों दिग्गज भारत के लिए अब सिर्फ वनडे में खेलते हैं, ऐसे में युवा खिलाड़ियों के पास इसी दौरान उनसे खुलकर बातचीत करने का मौका होता है।

विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने वाले राणा ने मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे वनडे से पहले कहा, "यह मेरे लिए और पूरी टीम के लिए भी बहुत बड़ी बात है। अगर ऐसे अनुभवी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम और मैदान पर आपके साथ हों, तो माहौल बहुत अच्छा रहता है। इस समय, मैदान के बाहर - यहां तक कि ड्रेसिंग रूम में भी - पूरी टीम के लिए खुशी का माहौल होता है। हर कोई बेहतर बनना चाहता है। उनके मन में, वे हमेशा चाहते हैं कि युवा बेहतर बनें। जैसे, जब मैं गेंदबाजी कर रहा होता हूं, तो वे हमेशा मुझे बताते हैं कि बेहतर गेंदबाजी कैसे करनी है। जब किसी खिलाड़ी को इतना अच्छा टीम माहौल मिलता है, तो चीजे अपने आप अच्छी हो जाती हैं।"
उन्होंने कहा, "वे हमेशा मोटिवेटेड रहते हैं - चाहे अच्छा समय हो या बुरा। वे आपका साथ देते हैं और आपको बताते हैं कि आपको आगे क्या कदम उठाने चाहिए। एक युवा खिलाड़ी के तौर पर, इससे आपको सच में मदद मिलती है, क्योंकि जब आप मैदान पर होते हैं - दबाव वाली स्थिति में तो वे आपकी बहुत मदद करते हैं।"
उन्होंने कहा, “नई गेंद से, मैंने गेंदबाजी कोच मॉर्कल के साथ बहुत अभ्यास किया है और अर्शदीप सिंह से भी बहुत बात की है। उनके पास बहुत अनुभव है, और वह अभ्यास में यह बताकर मेरी मदद करते हैं कि मुझे बेहतर गेंदबाजीकैसे करनी चाहिए।”
राणा ने कहा, "आप जानते हैं कि आज के क्रिकेट में गेंदबाजों को उतनी मदद नहीं मिलती। यह नियम हमारे लिए बहुत मददगार रहा है, क्योंकि वह एक पुरानी गेंद, हम हमेशा अपने दिमाग में रखते हैं। 34वें ओवर के बाद जो भी गेंद पुरानी होती है, हम उसी पर फोकस करने का प्रयास करते हैं। और गेंद चुनने के बारे में, वह हम सभी करते हैं। जिसे भी लगता है कि कौन सी गेंद पुरानी है। भारत में, गेंदबाजी अलग होती है क्योंकि आपको वैरिएशन पर डिपेंड रहना होता है। हर फेज में, आपको अलग-अलग रोल में अलग तरह से गेंदबाजी करनी होती है: कभी अटैकिंग, कभी डिफेंसिव।"






