नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2023 से क्यों अलग माहौल? न्यूजीलैंड की ये छवि भारतीयों को दे रही सुकून
भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल खेला जाना है। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फिर नीले रंग का समंदर लौटा है। इस बार 2023 के दिल टूटने वाले पल से माहौल बिल्कुल अलग है।

अहमदाबाद के मोटेरा में फिर से नीले रंग की लहर लौट आई है जो धीरे-धीरे विशाल नरेंद्र मोदी स्टेडियम की ओर बढ़ रही है जहां भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 202 का खिताबी मुकाबला होने वाला है। लेकिन नीले रंग की भारतीय जर्सी पहने और तिरंगे लिए बढ़ती भीड़ के बीच न्यूजीलैंड की टीम के एक खिलाड़ी ने चुपचाप हकीकत स्वीकार की। न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर ने भारतीय टीम से भिड़ने से पहले अपने देश के प्रशंसकों को एक भावुक संदेश दिया। उन्होंने 'एक्स' पर न्यूजीलैंड के प्रशंसकों के लिए संदेश में कहा, ''मैं बड़े भाषण देने या जोश भरी अपील करने वालों में से नहीं हूं। लेकिन यह कहना ठीक है कि यहां 1.4 अरब टीम इंडिया के प्रशंसक और बाकी सब के सामने हम थोड़े कम हैं। लेकिन कोई बात नहीं, क्योंकि हमें पता है कि घर पर आप हमारा समर्थन कर रहे होंगे।''
'माहौल 19 नवंबर 2023 से बिल्कुल अलग है'
सैंटनर जानते हैं कि रविवार रात उनकी टीम का सामना किस माहौल से होगा। स्टेडियम के आसपास का माहौल 19 नवंबर 2023 से बिल्कुल अलग है, जब टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था जिसमें मेजबान टीम हार गई थी। तब अहमदाबाद में दोपहर एक बजे शुरू होने वाले मैच के लिए असामान्य रूप से बहुत जल्दी सुबह आठ बजे से ही शहर में घबराहट और उत्सुकता का माहौल था। इस बार फाइनल शाम सात बजे शुरू होगा और भीड़ भी दोपहर से ही स्टेडियम की ओर आने लगी जिससे माहौल ज्यादा आरामदायक और लगभग उत्सव जैसा लग रहा है। पिछले फाइनल की तुलना में एक और मामूली अंतर भी है। उस दिन कई प्रशंसकों के मन में चिंता की झलक थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंस, जोश हेजलवुड और मिचेल स्टार्क की तेज गेंदबाज़ी तिकड़ी बेहद खतरनाक मानी जाती थी।
ऑस्ट्रेलिया जैसी डर पैदा करने वाली छवि नहीं
लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग दिखाई देता है। ज्यादातर समर्थक मान रहे हैं कि परिणाम लगभग तय है जो भारत की जीत है और वो भी शायद आराम से। इसका एक कारण पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का साहस और आत्मविश्वास से भरा शानदार प्रदर्शन भी है। दूसरा कारण प्रतिद्वंद्वी टीम भी है। अपनी प्रतिस्पर्धी परंपरा के बावजूद न्यूजीलैंड एक ऐसी टीम है जिसे भारतीय प्रशंसक लंबे समय से सम्मान देते हैं, लेकिन उनसे डरते नहीं हैं। न्यूजीलैंड का सम्मान जरूर होता है लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसी डर पैदा करने वाली छवि उनके पास नहीं है। स्टेडियम की ओर जाने वालों में तरुण और गौतम भी शामिल थे जो बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले 20-25 साल के पेशेवर हैं। उन्होंने फाइनल देखने के लिए मैच टिकट और होटल दोनों के लिए काफी बड़ी कीमत खर्च की है। उनमें से एक ने कहा, ''यह जिंदगी में एक बार मिलने वाला अनुभव है।''
'अलार्म लगाइए और फिर हमारा समर्थन कीजिए'
हालांकि, हर वह व्यक्ति जो यहां आना चाहता था, नहीं आ सका। ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण दुबई का हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद होने से कई एनआरआई के यात्रा कार्यक्रम बिगड़ गए जिससे स्टैंड में विदेशों से आने वाले भारतीयों की संख्या कम हो गई। जहां तक न्यूजीलैंड के प्रशंसकों की बात है तो स्टैंड में शायद ही कोई काली जर्सी दिखाई दे। लेकिन वे सोमवार सुबह न्यूजीलैंड समयानुसार 2:30 बजे अपने टीवी सेट के सामने जरूर होंगे।सैंटनर ने 'एक्स' पर पारंपरिक माओरी शैली में प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए लिखा,''किया ओरा आओतेआरोआ'' जिसका मतलब है ''हैलो न्यूजीलैंड।'' उन्होंने लिखा, ''हमें पता है कि मैच सोमवार सुबह बहुत जल्दी शुरू होगा। लेकिन अलार्म लगाइए और एक बार फिर हमारा समर्थन कीजिए। और अगर आप स्कूल के लिए थोड़े लेट हो जाएं तो मेरा संदेश अपने बॉस या शिक्षक तक पहुंचा देना।'' कप्तान ने उम्मीद जताते हुए संदेश समाप्त किया कि टीम 'कुछ अतिरिक्त सामान के साथ जल्द घर लौटेगी।'' माओरी भाषा में 'आओतेआरोआ' का अर्थ है सफेद बादलों की धरती। भारत यही उम्मीद करेगा कि मोटेरा के ऊपर छाए बादल मेहमान टीम के लिए काले साबित हों।
लेखक के बारे में
Md.Akramमोहम्मद अकरम: खेल पत्रकार
परिचय: मोहम्मद अकरम 10 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रॉड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। इन्हें खेल और राजनीति की दुनिया में गहरी दिलचस्पी है। क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़े अपडेट्स, मैच एनालिसिस और स्टोरी रिसर्च बखूबी अंजाम देते हैं। अकरम का मानना है कि खेल पत्रकारिता सिर्फ स्कोर बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल की भावना, खिलाड़ियों की मेहनत और उससे जुड़ी कहानियों को सामने लाना भी उतना ही जरूरी है।
अनुभव: अकरम को कंटेंट रिसर्च, स्क्रिप्ट राइटिंग, स्टोरीटेलिंग और एडिटिंग का अच्छा अनुभव है। 2016 में अमर उजाला की ओर से पत्रकारिता में डेब्यू किया। 2019 में टाइम्स नाउ से जुड़े और पांच साल यहां रहे। साल 2022 से लाइव हिंदुस्तान का हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑडियंस बिहेवियर को समझकर कंटेंट तैयार करते हैं, जो प्रभावशाली हो। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स, क्रिकेट वर्ल्ड कप और आईपीएल जैसे इवेंट कवर किए हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: अकरम ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से बी.ए. (ऑनर्स) मास मीडिया और आईआईएमसी से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रोफेशनल अनुभव ने अकरम को मीडिया की बुनियादी समझ के साथ-साथ प्रैक्टिकल अप्रोच भी दी है। सीखते रहना और खुद को लगातार अपडेट करना प्रोफेशनल आदतों में शामिल है।
विशेषज्ञता:
मैचों की लाइव कवरेज और एनालिसिस
स्टैट्स बेस्ड दिलचस्पी स्टोरीज
हेडलाइन फ्रेमिंग और कॉपी एडिटिंग में मजबूत पकड़
डेडलाइन मैनेजमेंट और हाई-प्रेशर सिचुएशन में सटीक निर्णय



