भारत को 6वीं बार विश्व कप जिताने वाले कप्तान आयुष म्हात्रे कौन हैं, जानिए पूरी कहानी, कभी पिता ने…

Feb 06, 2026 11:40 pm ISTVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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आयुष म्हात्रे की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। भारतीय टीम ने खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड को पटखनी दी। इस टूर्नामेंट की जीत में कप्तान आयुष म्हात्रे की बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता का विशेष योगदान रहा। जानिए उनकी पूरी कहानी।

भारत को 6वीं बार विश्व कप जिताने वाले कप्तान आयुष म्हात्रे कौन हैं, जानिए पूरी कहानी, कभी पिता ने…

आयुष म्हात्रे की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। भारतीय टीम ने खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड को पटखनी दी। इस टूर्नामेंट की जीत में कप्तान आयुष म्हात्रे की बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता का विशेष योगदान रहा। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए इस खिताबी मुकाबले में आयुष ने बतौर बल्लेबाज अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और 53 रनों की महत्वपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 107 रनों की अटूट साझेदारी की, जिसने भारत को 50 ओवरों में 411/9 के विशाल स्कोर तक पहंचाने में मदद की। म्हात्रे की इस पारी ने न केवल टीम को मजबूती दी, बल्कि एक कप्तान के तौर पर उन्होंने सामने से नेतृत्व करने का उदाहरण भी पेश किया।

16 जुलाई 2007 को जन्मे 18 वर्षीय आयुष म्हात्रे मुंबई के एक उभरते सितारे हैं। उन्हें क्रिकेट गलियारों में 'विरार फास्ट' के नाम से भी जाना जाता है। दाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज और ऑफ-ब्रेक गेंदबाज ने बहुत ही कम उम्र में घरेलू क्रिकेट में अपनी धाक जमा ली थी। मुंबई के लिए खेलते हुए आयुष ने विजय हजारे ट्रॉफी में 458 रन और रणजी ट्रॉफी में 471 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शानदार शतक शामिल हैं। प्रथम श्रेणी और लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके नाम लगभग 1,000 रन दर्ज हैं, जो उनकी तकनीकी परिपक्वता और बड़े मैचों के लिए उनकी तत्परता को दर्शाता है।

आयुष म्हात्रे का नाम तब सबसे ज्यादा चर्चा में आया जब उन्होंने आईपीएल 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए अपना डेब्यू किया। वह मात्र 17 साल और 278 दिन की उम्र में मुंबई इंडियंस के खिलाफ वांनखेड़े स्टेडियम में उतरकर CSK के इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। दिलचस्प बात यह है कि आयुष को आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा था, लेकिन चेपॉक में मिड-सीजन ट्रायल के दौरान उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से स्काउट्स को इतना प्रभावित किया कि उन्हें सीधे टीम में शामिल कर लिया गया। उन्हें चोटिल ऋतुराज गायकवाड़ की जगह टीम में शामिल किया गया था, जहां उन्होंने एमएस धोनी के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

म्हात्रे के आंकड़ों पर नजर डालें तो उनका टी20 करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने आईपीएल के 7 मैचों में 188.98 की विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ 240 रन बनाए हैं, जिसमें 94 रन उनका व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर रहा है। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी उनका निडर दृष्टिकोण और 'अटैकिंग माइंडसेट' है, जो उन्हें अपने मौजूदा खिलाड़ियों से अलग बनाता है। सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन के अनुसार, आयुष की परिपक्वता और शॉट सिलेक्शन ने ही उन्हें दिग्गज खिलाड़ियों के बीच जगह बनाने का मौका दिया।

आज विश्व कप फाइनल में उनकी 53 रनों की पारी एक बार फिर यह साबित करती है कि आयुष बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। भारतीय अंडर-19 टीम की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को न केवल फाइनल तक पहुंचाया, बल्कि चैंपियन भी बनाया। मुंबई की गलियों से निकलकर चेन्नई के 'येलो जर्सी' और अब टीम इंडिया की 'ब्लू जर्सी' में कप्तानी करने तक का आयुष का यह सफर भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक सुखद संकेत है। उनकी इस कप्तानी और प्रदर्शन के दम पर भारत अब अंडर-19 विश्व कप में 6वीं बार चैंपियन बना है।

बता दें कि आयुष म्हात्रे का संबंध विरार, मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार से है। उनके पिता योगेश म्हात्रे उनके क्रिकेट सफर के सबसे बड़े आधार रहे हैं। उन्होंने आयुष को करियर के शुरुआती उतार-चढ़ाव, फिटनेस समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से उबरने में पूरा सहयोग दिया है। आयुष के कोच प्रशांत शेट्टी के अनुसार, आयुष के पिता योगेश म्हात्रे एक अत्यंत सकारात्मक व्यक्ति हैं जिन्होंने कभी भी अपने बेटे की आलोचना नहीं की और हमेशा उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।

आयुष के सपनों को पंख देने के लिए उनके पिता ने एक बहुत बड़ा त्याग किया। उन्होंने लगभग एक साल पहले बैंकर के रूप में अपनी स्थायी नौकरी छोड़ दी ताकि वे अपने बेटे के खेल को पूरा समय दे सकें। वे रोजाना आयुष के साथ भारी किट बैग लेकर मुंबई में मैच खेलने के लिए करीब छह घंटे का लंबा और थका देने वाला सफर तय करते थे। चूंकि परिवार आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं था, इसलिए अपनी नौकरी छोड़ना उनके लिए एक बहुत बड़ा जोखिम और बलिदान था। हालांकि, अब उसका पे ऑफ मिल रहा है और आयुष भारत के कप्तान और सीएसके जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी की टीम का हिस्सा हैं।

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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