U19 वर्ल्ड कप जीतने वाले 6 कप्तानों में से 3 को मिला सीनियर टीम में मौका, ये 2 रहे अनलकी, अब आयुष म्हात्रे का क्या होगा?

Feb 07, 2026 08:03 am ISTVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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भारत को अब तक 6 कप्तानों ने अंडर-19 विश्व का खिताब दिलाया है। 6 में से 3 कप्तानों को टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला है जबकि दो अनलकी रहे हैं। आयुष म्हात्रे के साथ क्या होगा यह वक्त बताएगा। विराट कोहली और मोहम्मद कैफ का भारतीय क्रिकेट में बड़ा नाम है।

U19 वर्ल्ड कप जीतने वाले 6 कप्तानों में से 3 को मिला सीनियर टीम में मौका, ये 2 रहे अनलकी, अब आयुष म्हात्रे का क्या होगा?

भारतीय युवा क्रिकेट टीम ने एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। जिम्बाब्वे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए 2026 के फाइनल में इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर भारत ने रिकॉर्ड छठी बार आईसीसी अंडर-19 पुरुष क्रिकेट विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। इस गौरवशाली यात्रा की शुरुआत साल 2000 में हुई थी और तब से अब तक कुल छह कप्तानों ने भारत को इस प्रतिष्ठित मंच पर चैंपियन बनाया है।

भारत ने पहली बार साल 2000 में मोहम्मद कैफ की कप्तानी में अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता था। इसके आठ साल बाद 2008 में विराट कोहली के नेतृत्व में मलेशिया की धरती पर भारतीय टीम ने दूसरी बार विश्व विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। साल 2012 में उन्मुक्त चंद ने ऑस्ट्रेलिया में टीम का सफल नेतृत्व किया और फाइनल में यादगार पारी खेलकर भारत को तीसरी ट्रॉफी दिलाई। जीत का यह सिलसिला आगे बढ़ता रहा और 2018 में पृथ्वी शॉ की कप्तानी में न्यूजीलैंड में भारत ने चौथी बार विश्व कप जीता। इसके बाद 2022 में वेस्टइंडीज में आयोजित टूर्नामेंट में यश धुल ने अपनी कप्तानी में भारत को पांचवीं बार चैंपियन बनाया। अब 2026 में आयुष म्हात्रे ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए छठा खिताब भारत की झोली में डाल दिया है।

भारत को अब तक 6 कप्तानों ने अंडर-19 विश्व का खिताब दिलाया है। ऐसा माना जाता है कि जूनियर टीम को चैंपियन बनाने वाले कप्तान सीनियर टीम में जगह बना लेते हैं और बड़ा नाम कमाते हैं। 6 में से 3 कप्तानों ने ऐसा किया भी है। मोहम्मद कैफ ने लंबे समय तक भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया। विराट कोहली ने तो विश्व क्रिकेट में किंग का दर्जा ही हासिल कर लिया है। पृथ्वी शॉ को भी भारतीय टीम में जगह दी गई। हालांकि, शुरुआत में उन्होंने काफी बेहतर किया, लेकिन उसे निरंतर नहीं रख पाए और टीम इंडिया में कुछ ही समय तक रहे। उन्मुक्त चंद और यश धुल को विश्व कप जिताने के बाद कभी सीनियर टीम में मौका नहीं मिला। ऐसे में सवाल यह है कि क्या आयुष म्हात्रे टीम इंडिया में अपनी जगह बना पाएंगे या नहीं।

बता दें कि साल 2026 का फाइनल ऐतिहासिक रहा, जहां भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 411 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस जीत के नायक सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे, जिन्होंने मात्र 80 गेंदों में 15 चौकों और 15 छक्कों की मदद से 175 रनों की तूफानी पारी खेली। कप्तान आयुष म्हात्रे ने भी मोर्चे से नेतृत्व करते हुए एक सधा हुआ अर्धशतक जड़ा और गेंदबाजी में बड़ा विकेट लेकर इंग्लैंड को 311 रनों पर समेटने में मुख्य भूमिका निभाई।

भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान

• 1999/2000: मोहम्मद कैफ की कप्तानी में भारत ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर अपना पहला खिताब जीता था।

• 2008: विराट कोहली के नेतृत्व में भारत ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 12 रनों (DLS पद्धति) से हराकर दूसरी बार ट्रॉफी जीती।

• 2012: उन्मुक्त चंद की कप्तानी में भारतीय टीम ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हराकर तीसरा खिताब अपने नाम किया。

• 2018: पृथ्वी शॉ के नेतृत्व में भारत ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से मात देकर चौथी बार विश्व विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया।

• 2022: यश धुल की कप्तानी में भारत ने फाइनल में इंग्लैंड को 4 विकेट से हराकर पांचवीं बार यह टूर्नामेंट जीता।

• 2026: आयुष म्हात्रे के नेतृत्व में भारत ने फाइनल में इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर रिकॉर्ड छठी बार खिताब जीता

Vimlesh Kumar Bhurtiya

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Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

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विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

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परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

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विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

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