अगर माता-पिता और बहनों ने त्याग नहीं किया होता तो मैं आज जो कुछ भी हूं नहीं होता: हरभजन सिंह

नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा)
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एक पॉडकास्ट में हरभजन सिंह ने अपने करियर की उपलब्धियों के लिए ईश्वरीय कृपा को सबसे बड़ा कारण माना। साथ ही यह भी कहा कि अगर माता-पिता और बहनों से त्याग नहीं किया होता तो आज जो कुछ भी उन्होंने उपलब्धियां हासिल की हैं, जहां भी पहुंचे हैं, वहां नहीं पहुंच पाते।

Harbhajan Singh
हरभजन सिंह

भारत के लिए 400 से अधिक टेस्ट विकेट, टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनने जैसी उपलब्धियां भले ही उनकी हों लेकिन हरभजन सिंह इन सभी का श्रेय ईश्वर को देते हैं। साथ ही हरभजन ने माता- पिता और बहनों के द्वारा किए गए त्याग को अपने करियर के लिए अहम माना और कहा जो कुछ भी मैं आज हूं इन सभी के त्याग और ईश्वरीय आशीर्वाद से ही हूं।

सबकुछ ईश्वरीय कृपा से संभव हुआ, खुद का लिखा शेर भी सुनाया

हरभजन ने अपनी दो दशक से अधिक लंबी क्रिकेट यात्रा में मैदान पर हासिल की गई उपलब्धियों से कहीं अधिक विनम्रता दिखाते हुए कहा, ''करने कराने वाला तो ऊपर वाला है, उसकी रजा से हो रहा है। उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।''

पीटीआई के साथ पॉडकास्ट साक्षात्कार में 46 वर्षीय हरभजन ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी क्रिकेट उपलब्धियों के कारण खुद को महत्वपूर्ण मानने में विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा, ''जब हम जीवन में कुछ बन जाते हैं तो यह मानने लगते हैं कि हमने कुछ किया है, लेकिन जो कुछ होता है वह ईश्वर की इच्छा होती है।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने जीवन के प्रति अपने नजरिये को व्यक्त करने वाला उर्दू का एक शेर लिखा है जिसे वह पीटीआई के माध्यम से पहली बार सार्वजनिक कर रहे हैं। कुछ देर रुकने के बाद हरभजन ने शेर पढ़ा, '

'ये कितना बड़ा वहम था कि मैं अहम था।

ओ खुदा के बंदे, उस वाहेगुरु का शुक्र कर, ये तो उसका तेरे ऊपर रहम था।''

उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि इन उपलब्धियों के लिए मैं चुना हुआ था, चाहे वह 100 टेस्ट खेलना हो या टेस्ट में हैट्रिक लेने वाला पहला भारतीय बनना। यह उस ईश्वर की इच्छा थी जो पूरी हुई। उसकी रजा थी।''

माता- पिता और बहनों के त्याग से यहां हूं

जालंधर के इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा कि अगर उनके माता-पिता और बहनों ने त्याग नहीं किया होता तो वह अपने करियर में यहां तक नहीं पहुंच पाते। उनके पिता सरदार सरदेव सिंह छोटे कारोबारी थे और 2000 में उनका निधन हो गया। उनकी मां अवतार कौर ने पांच बेटियों की परवरिश करने के साथ-साथ उनके क्रिकेट के सपनों को पूरा करने में मदद के लिए शर्ट की सिलाई-कढ़ाई जैसे छोटे-मोटे काम भी किए। उन्होंने कहा, "पिता साहब का आशीर्वाद था, माता जी का आशीर्वाद था। मेरी बहनों ने बहुत त्याग किया जिसकी वजह से मुझे ये सारी उपलब्धियां और खुशियां मिलीं। मैं हर चीज के लिए बहुत आभारी हूं।''

मुझे एक अच्छे इंसान के रूप में याद किया जाए

हरभजन मैदान पर भिड़ने के लिए जाने जाते थे और उनके आलोचकों को लगता था कि कई बार वह खुद भी विवाद मोल लेते थे लेकिन मैदान के बाहर यही व्यक्ति कहता है कि वह अपने लिए महत्वपूर्ण रिश्ते को बचाने के लिए खुशी-खुशी बहस हार सकता है। उन्होंने कहा, ''मैंने एक बार एक पॉडकास्ट में सुना था कि कभी-कभी रिश्ते को बचाने के लिए हारना जरूरी होता है। अगर आप कभी-कभी हार जाते हैं तो अंत में जीत जाते हैं।'' हालांकि वह यह स्वीकार करते हैं कि क्रिकेट प्रशंसकों ने मैदान पर जिस जुझारू हरभजन को देखा है वह उनके वास्तविक स्वभाव के अधिक करीब था। उन्होंने कहा, "वो असली हरभजन था। वह मैदान पर भिड़ता था, लड़ता था और जीतता था। अब खेल लिया, बीवी है, बच्चे हैं जो बड़े हो गए हैं। अब मेरे लिए क्रिकेट का मैदान नहीं है। लेकिन क्रिकेट की वजह से मैंने कुछ चीजें सीखी हैं, भले ही मैं बहुत पढ़ा-लिखा नहीं हूं।'' उन्होंने कहा, ''जीवन में विनम्र होना बहुत जरूरी है। इससे आपको चीजों को समय पर समझने में मदद मिलती है। मैं नहीं चाहता कि मुझे मेरे क्रिकेट रिकॉर्ड के आधार पर आंका जाए।'' हरभजन ने कहा, ''क्योंकि अगर मैं एक अच्छा इंसान नहीं बन पाया तो मेरी जिंदगी व्यर्थ है। अगर कोई मुझे आंकना चाहे तो मैं चाहता हूं कि वह कहे कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसने कितने विकेट लिए, वह एक अच्छा इंसान रहा।''

मेरे ऊपर फिल्म बने तो आपत्ति नहीं, विक्की कौशल करें मेरा रोल

इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने 103 टेस्ट में 417 विकेट लिए हैं। हरभजन को अपने जीवन और करियर पर फिल्म बनने में कोई आपत्ति नहीं होगी। उनके करियर में मैदान और मैदान के बाहर कई ऐसी घटनाएं रही हैं जो सुर्खियों में छाई थीं। मुख्य भूमिका के लिए उनकी पसंद 'उरी' के अभिनेता विक्की कौशल हैं। उन्होंने कहा, ''विक्की कौशल पंजाबी हैं, होशियारपुर क्षेत्र से आते हैं और शानदार अभिनेता हैं।'' फिल्म का नाम क्या होगा, इस सवाल पर कुछ सेकंड सोचने के बाद हरभजन ने अपनी मजबूत बांह उठाई और कहा, ''जज्बा!''

भाषा सुधीर

सुधीर

Vimlesh Kumar Bhurtiya

लेखक के बारे में

Vimlesh Kumar Bhurtiya

विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार

संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।

खेल पत्रकारिता और पत्रकारिता का उद्देश्य
विमलेश खेल से जुड़ी तमाम तरह की स्टोरीज पाठकों तक पहुंचाते हैं, जिनमें तथ्यों की स्पष्टता होती है और सकारात्मक विश्लेषण भी शामिल होता है। ये क्रिकेट की दुनिया का अच्छा ज्ञान रखते हैं और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है। राजनीति और क्रिकेट में घट रही घटनाओं का विश्लेषण करना उनकी तह तक जाना विमलेश को पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी तथ्यपरकता (Fact-checking) है। चाहे वह चकाचौंध से भरा क्रिकेट जगत हो या अन्य खेल और खिलाड़ियों का जीवन। बतौर खेल पत्रकार यह कसौटी हर वक्त बनी रहनी चाहिए कि लेखन हमेशा प्रमाणिक हो। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचित करना है, बल्कि उन्हें सही और सुरक्षित जानकारी के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सूचना, शिक्षा और मनोरंजन होता है और इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करना एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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