MCG की पिच रेटिंग बदलने के लिए ICC हो जाएगी मजबूर, मगर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को पेश करने होंगे सबूत
एशेज टेस्ट मैच के लिए MCG की पिच को तीसरे नंबर की रेटिंग दी गई है, जो कि अनसेटिस्फेक्ट्री यानी असंतोषजनक है। हालांकि, आईसीसी इसे बदलने के लिए मजबूर हो जाएगा, लेकिन इसके लिए सबूत चाहिए होंगे।
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज का चौथा मुकाबला मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड यानी एमसीजी में खेला गया। पांच दिन का टेस्ट मैच 26 दिसंबर से शुरू हुआ, जो बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच था, लेकिन अगले ही दिन खत्म भी हो गया। ऐसे में पिच पर सवाल उठने थे, जो कि उठे और मैच के दो दिन बाद आईसीसी ने पिच रेटिंग भी दे दी। एमसीजी को अनसेटिस्फेक्ट्री यानी असंतोषजनक पिच रेटिंग मिली है। हालांकि, इस पिच रेटिंग को आईसीसी को बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है। इसके लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को मजबूत सबूत पेश करने होंगे।
क्रिसमस के एक दिन बाद शुरू हुआ ये मैच बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच था, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे। इस मैच में पहले दिन 20 विकेट गिरते हैं और फैंस का मनोरंजन नहीं होता। यहां तक कि अगले दिन भी भारी संख्या में फैंस पहुंचे और दो दिन में यह आंकड़ा डेढ़ लाख से भी ज्यादा था। हालांकि, अगले दिन 16 और विकेट गिर जाते हैं और इंग्लैंड की टीम जैसे-तैसे 4 विकेट से इस लो स्कोरिंग मैच को जीत जाती है। इस मुकाबले में एक शतक तो छोड़ दीजिए, अर्धशतक तक नहीं लगता। ऐसे में पिच की खूब आलोचना हुआ और आईसीसी ने खराब रेटिंग भी दी।
आईसीसी टेस्ट क्रिकेट में चार तरह की रेटिंग देती है, जिनमें नंबर एक है - वेरी गुड यानी बहुत अच्छी और दूसरे नंबर पर आती है सेटिस्फेक्ट्री यानी संतोषजनक। इन दोनों की कैटेगरी की पिच पर कोई कार्रवाई आईसीसी नहीं करती है, लेकिन नंबर 3 और नंबर 4 की पिच रेटिंग के लिए आईसीसी ऐक्शन लेती है। नंबर तीन पर आती है अनसेटिस्फेक्ट्री यानी असंतोषजनक और चौथे नंबर पर आती है अनफिट। तीसरे नंबर की रेटिंग ही एमसीजी को मिली है, जिसमें एक डिमेरिट पॉइंट ग्राउंड के खाते में जुड़ जाता है।
मई 2024 से लागू हुई नई आईसीसी पिच एंड आउटफील्ड कंडीशन्स के मुताबिक, अगर पिछले 5 साल में किसी एक ग्राउंड के खाते में 6 डिमेरिट पॉइंट्स जुड़ जाते हैं तो उस मैदान पर एक साल तक कोई भी मुकाबला नहीं होता है। ऐसे में एक पॉइंट्स से एमसीजी का कुछ बिगड़ने वाला नहीं है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस रेटिंग को भी आईसीसी को बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है। हालांकि, इसके लिए होम क्रिकेट बोर्ड यानी क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को मजबूत सबूत आईसीसी को देने होंगे कि पिच अनसेटिस्फेक्ट्री नहीं, बल्कि कम से कम सेटिस्फेक्ट्री थी, क्योंकि दो दिन में तो पहला टेस्ट भी खत्म हो गया था, जिसे वेरी गुड रेटिंग मिली थी।
आईसीसी का क्लॉज 6 कहता है कि होम बोर्ड उस पिच या आउटफील्ड रेटिंग के खिलाफ अपील दायर कर सकता है, जिसे डिमेरिट पॉइंट्स मिलते हैं। 6.1 के मुताबिक, मैच रेफरी से मिली रेटिंग के खिलाफ अपील करने वाला संबंधित होम बोर्ड, होम बोर्ड को डिमेरिट पॉइंट्स मिलने और/या सस्पेंशन लगाने का नोटिफिकेशन मिलने के 14 दिनों के अंदर ICC जनरल काउंसिल के पास अपील का लिखित नोटिस देना होगा, जिसमें अपील के कारण बताने होंगे।
6.2 में बताया गया है कि अपील करने वाले का अपील का नोटिस मिलने के 14 दिनों के अंदर, एक अपील पैनल अपील पर सुनवाई करेगा और उस पर फैसला करेगा। अपील पैनल में तीन लोग होंगे, जो इस तरह हैं: 1. ICC जनरल मैनेजर – क्रिकेट; 2. ICC मेन्स क्रिकेट कमेटी के चेयर (या अगर अपील उसी देश से है जहां चेयर हैं तो उनका नॉमिनी); और 3. ICC मेन्स क्रिकेट कमेटी का एक सदस्य (ICC मैनेजमेंट द्वारा नियुक्त) जो अपील जारी करने वाले देश के अलावा किसी दूसरे देश से होगा।
6.3 अपील पैनल नीचे दी गई बातों के आधार पर अपना फैसला करेगा:
a) मैच रेफरी की रिपोर्ट (जिसमें कप्तानों और अंपायरों के कमेंट शामिल हैं)
b) होम बोर्ड की रिपोर्ट, जिसमें संबंधित ग्राउंड अथॉरिटी की कोई भी जरूरी जानकारी शामिल है।
c) मैच का वीडियो
d) होम बोर्ड द्वारा दी गई अपील की वजहें
6.4 अपील पैनल ICC को एक लिखित फैसला देगा जिसे अपील करने वाले और ICC के चीफ एग्जीक्यूटिव को भेजा जाएगा। 6.5 अपील पैनल का फैसला आखिरी और मानने वाला होगा। एक केस याद आता है, जब इंदौर के होल्कर स्टेडियम में इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच खेला गया था। उस पिच को पूअर रेटिंग दी गई थी, जिसे बाद में बिलो एवरेज में बदला गया था। इससे स्टेडियम पर बैन लगने का खतरा टल गया था। हालांकि, एमसीजी के केस में ऐसा होने की संभावना ना के बराबर है। ऐसा इसलिए है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुखिया, पूर्व क्रिकेटर, एशेज के कमेंटेटर और खुद कप्तानों ने इसकी आलोचना की है।






