ईशान किशन के लिए थम सा गया था वक्त, लेकिन फिर ऐसे लिखी विकेटकीपर ने वापसी की स्क्रिप्ट

Feb 17, 2026 06:03 am ISTVikash Gaur Bhasha, नई दिल्ली
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27 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने उस दौर से वापसी की जब भारतीय क्रिकेट जगत उनसे उम्मीद छोड़ने लगा था। वे विकेटकीपर बल्लेबाजों की पंक्ति में पांचवें नंबर पर थे, लेकिन अब नंबर वन बन चुके हैं। 

ईशान किशन के लिए थम सा गया था वक्त, लेकिन फिर ऐसे लिखी विकेटकीपर ने वापसी की स्क्रिप्ट

बॉलीवुड की 1965 में आई फिल्म 'वक्त' में आशा भोंसले का गाया गाना "आगे भी जाने ना तू, पीछे भी जाने ना तू, जो भी है बस यही एक पल है" समय की अनिश्चितता को दर्शाता है कि जिंदगी कभी भी बदल सकती है, भविष्य अनजान है और अतीत को बदला नहीं जा सकता है, लेकिन ईशान किशन के लिए ये शब्द एक अलग मायने रखते हैं। यह शायद किशन का पसंदीदा गाना नहीं हो, लेकिन इन पंक्तियों का भाव उनके करियर की कहानी से मिलता है।

पटना के 27 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने उस दौर से वापसी की जब भारतीय क्रिकेट जगत उनसे उम्मीद छोड़ने लगा था। ऋषभ पंत टी20 विश्व कप विजेता टीम में वापसी कर चुके थे, ध्रुव जुरेल प्रभावी प्रदर्शन कर रहे थे, संजू सैमसन हमेशा की तरह दावेदार थे और जितेश शर्मा भी अपनी उपयोगिता साबित कर रहे थे। ऐसे में चयन क्रम में पांचवें स्थान पर खड़े ईशान किशन के लिए राह लगभग बंद दिख रही थी।

आक्रामक शैली के इस बल्लेबाज के लिए लगातार अनिश्चितता के सहारे जीवन बिताना आसान नहीं था। किशन ने मानसिक थकान के चलते ब्रेक लेने का फैसला किया, लेकिन इसके बाद उन्हें चयन से बाहर किया गया, केंद्रीय अनुबंध रद्द हुआ और उन पर घरेलू क्रिकेट को लेकर गंभीर नहीं होने के आरोप लगे।

उनके करीबी मित्र अंशुमत श्रीवास्तव ने कहा, "अगले ही दिन से लोगों ने मान लिया कि वह क्रिकेट को लेकर गंभीर नहीं हैं। तरह-तरह की बातें लिखी गईं। हालांकि, किशन ने इन बातों पर कभी प्रतिक्रिया नहीं दी। मुस्कुराते रहे और मेहनत करते रहे। वर्तमान में जीना कठिन होता है, लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया को सर्वोपरि मान लिया।"

अंशुमत के अनुसार, "आज आप जो पाकिस्तान के खिलाफ देख रहे हैं, वह दो साल पहले शुरू की गई प्रक्रिया का परिणाम है। ये रन उस प्रक्रिया का एक हिस्सा है।'' अंशुमत पटना स्थित 'ईशान किशन क्रिकेट अकादमी' के सह-संस्थापक भी हैं और इस दौरान उनकी मेहनत के साक्षी रहे। इस मुश्किल दौर में अंशुमत के अलावा किशन के परिवार और करीबी लोगों का सुरक्षा घेरा बना रहा। पिता प्रणव पांडेय, बड़े भाई और चिकित्सक राज किशन ने उन्हें भावनात्मक संबल दिया।

ईशान किशन की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई। बेहतर एकाग्रता के लिए उन्होंने ध्यान शुरू किया। पिता की सलाह पर भगवद गीता पढ़नी शुरू की। अभ्यास के लिए वह नियमित तौर पर दिन में दो बार अपनी अकादमी जाते। पोषण पर ध्यान देने के लिए निजी शेफ रखा और बाहर का खाना छोड़ दिया। नींद और आराम की निगरानी भी व्यवस्थित ढंग से की गई।

भले ही किशन ने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन भारतीय क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर उठे सवाल उन्हें आहत कर गए थे। अंशुमत ने कहा, ''ब्रेक के दौरान वह मानसिक रूप से थके हुए थे और उन्हें विश्राम की जरूरत थी। उन्होंने इसे अपने तरीके से संभाला। यह कभी लक्ष्य नहीं रहा कि रणजी, सैयद मुश्ताक अली या विजय हजारे ट्रॉफी में इतने रन बनाने हैं। न्यूजीलैंड सीरीज और घरेलू क्रिकेट में उनका औसत शानदार रहा।"

मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव के किशन टीम माहौल को हल्का बनाए रखना पसंद करते हैं। अंशुमत कोलंबो सिर्फ पाकिस्तान मैच देखने नहीं, बल्कि अपने इस 'भाई' के साथ रहने भी पहुंचे। उन्होंने कहा, ''वह मजाक करना और हंसी-मजाक से माहौल हल्का रखना पसंद करते हैं। हल्के-फुल्के स्वभाव को अक्सर गंभीरता की कमी समझ लिया जाता है, लेकिन यह सिर्फ धारणा है। पाकिस्तान के खिलाफ कठिन परिस्थितियों में रन बनाने के बाद होटल लौटते ही उन्होंने सबसे पहले रिकवरी पर ध्यान दिया, क्योंकि बुधवार को नीदरलैंड के खिलाफ मैच है।"

पटना में अकादमी में कौशल अभ्यास के दौरान उनके बड़े भाई राज किशन का विशेष योगदान रहा। अंशुमत ने कहा, "राज ने जूनियर क्रिकेट खेला है और अब चिकित्सक हैं। किशन के खेल को उनसे बेहतर कोई नहीं समझता। उनकी सलाह अहम रहती है।" किशन ने अकादमी में घंटों की 'सिमुलेशन (मैच जैसी परिस्थितियां तैयार कर)' अभ्यास कर अपनी खामियों को दूर किया।

अंशुमत ने कहा, "न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ जो दिखा, वह स्पष्टता का परिणाम है। नेट सत्र में सैकड़ों बार अलग-अलग परिस्थितियों का अभ्यास किया गया। वह पावरप्ले में कितने रन, कितनी गेंदों में लक्ष्य हासिल करना है जैसे परिस्थितियों को मन में रख कर अभ्यास करते थे। यह सब मानसिक तैयारी का हिस्सा था।" अंशुमत ने कहा, "किशान ने मेहनत को उम्मीदों से जोड़ना छोड़ दिया है। जब उन्होंने झारखंड की कप्तानी की, तब भी उनके मन में कभी यह विचार नहीं आया कि ऐसे खेलूंगा या ऐसी कप्तानी करूंगा तो वापसी होगी। भारत के लिए खेलना है तो निस्वार्थ होना पड़ता है।"

Vikash Gaur

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Vikash Gaur

विकाश गौड़: डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर कम असिस्टेंट मैनेजर, स्पोर्ट्स


संक्षिप्त विवरण:

विकाश गौड़ पिछले 8 वर्षों से हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के स्पोर्ट्स सेक्शन में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर (असिस्टेंट मैनेजर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


विस्तृत बायो:

परिचय और अनुभव: विकाश गौड़ भारतीय डिजिटल स्पोर्ट्स मीडिया का एक उभरता हुआ चेहरा हैं। लगभग 8 वर्षों के अनुभव के साथ, विकाश ने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को जमीन से समझा है। 2016 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले विकाश ने डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच के साथ खेल पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जनवरी 2021 से वह 'लाइव हिन्दुस्तान' की स्पोर्ट्स टीम के मुख्य स्तंभ बने हुए हैं, जहां वह कंटेंट प्लानिंग और स्पोर्ट्स कवरेज का नेतृत्व करते हैं।


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मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद विकाश का सफर 'खबर नॉन स्टॉप' से शुरू हुआ था, जो अब देश के प्रतिष्ठित मीडिया घरानों तक फैला हुआ है। उन्होंने पत्रिका समूह की वेबसाइट 'कैच न्यूज' में खेल की खबरों की तकनीकी समझ विकसित की। इसके बाद 'डेली हंट' में वीडियो प्रोड्यूसर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने विजुअल स्टोरीटेलिंग के गुर सीखे। 'दैनिक जागरण' की वेबसाइट में करीब ढाई साल तक खेल डेस्क पर अपनी धार तेज करने के बाद, उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान का रुख किया, जहां वे बीते 4 साल से चौके-छक्के लगा रहे हैं। इंटर्न के तौर पर प्रिंट की समझ हासिल कर चुके विकाश गौड़ के पास अब डिजिटल की अच्छी समझ है और वे ट्रेंड को बखूबी फॉलो करते हैं।


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