
लोग क्या कहते हैं मुझे परवाह नहीं; AK-47 सेलिब्रेशन पर फरहान की बेशर्मी
पाकिस्तान के ओपनर साहिबजादा फरहान ने भारत के खिलाफ मैच में किए अपने 'एके-47' सेलिब्रेशन का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि लोग क्या कहते हैं, वह उसकी परवाह नहीं करते। उनके मन में आया कि सेलिब्रेशन करते हैं, सो उन्होंने किया।
कहते हैं कि अपने दिल की सुननी चाहिए। दुनिया क्या कहेगी, चार लोग क्या कहेंगे...उसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन ये कहावत सकारात्मक संदर्भ में है। अक्सर किसी हिचक, परंपरा या रुढ़ियों को तोड़ने के संदर्भ में कही जाती है। किसी साहसिक कदम के बारे में कही जाती है। अपने दिल की करिए भले ही वो गलत हो। भले ही वो सभ्य समाज के लायक न हो तो ये 'चार लोग क्या कहेंगे' वाला मामला नहीं होता। एक तो गलती करो और ऊपर से उसका बचाव तो इसे साहसिक नहीं, बेशर्मी कहते हैं। गुनाह करने और उस पर टिके रहने को दुस्साहस कहते हैं। पाकिस्तानी क्रिकेटर साहिबजादा फरहान ने ऐसी ही निर्लज्जता दिखाई है। पहले क्रिकेट के मैदान में बल्ले को AK-47 के अंदाज में थामकर 'आतंकी सोच' का प्रदर्शन किया, फिर बेशर्मी में उसका बचाव भी किया।

भारत से सुपर 4 में पिटने के बाद अब पाकिस्तान की टीम मंगलवार को श्रीलंका से भिड़ेगी। दोनों ही टीमें सुपर 4 में अपने-अपने पहले मैच में हार चुकी हैं। श्रीलंका को बांग्लादेश के हाथों हार का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान-श्रीलंका मैच की पूर्व संध्या पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साहिबजादा फरहान से रविवार के मैच में उनके 'एके-47' सेलिब्रेशन के बारे में पूछा गया।
उसके जवाब में पाकिस्तानी खिलाड़ी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर आप उन छक्कों के बारे में बात कर रहे हैं तो भविष्य में आप और भी ज्यादा (छक्के) देखेंगे। और वो (सेलिब्रेशन) तो बस उस समय का एक क्षण था। मैं 50 रन बनाने के बाद बहुत ज्यादा सेलिब्रेशन नहीं करता। लेकिन अचानक मेरे मन में आया कि चलो आज सेलिब्रेशन करते हैं। मैंने किया। मुझे नहीं पता कि लोग उसे कैसे लेंगे। मैं उसकी परवाह ही नहीं करता। और एक बात और, आपको पता है कि आप जब भी खेलें, आपको आक्रामक क्रिकेट खेलना चाहिए। यह कोई जरूरी नहीं है कि वह भारत ही हो। आपको हर टीम के खिलाफ आक्रामक क्रिकेट खेलना चाहिए, जैसा हमने खेला।’
भारत के खिलाफ सुपर 4 मैच में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ने 45 गेंदों में 58 रन की पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 5 चौके और 3 छक्के जड़े। उन्हें शिवम दुबे ने सूर्यकुमार यादव के हाथों कैच कराकर पवैलियन का रास्ता दिखाया।
अर्धशतक जड़ने के बाद फरहान ने बैट को एके-47 के अंदाज में थामकर जश्न मनाया। पाकिस्तानी खिलाड़ी के इस जेस्टर की टाइमिंग बहुत कुछ कहती है। अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमले को लेकर भारत में पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बहिष्कार की मांग ने खूब जोर पकड़ी थी। पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने सैलानियों का धर्म पूछकर चुन-चुनकर पुरुषों को उनकी पत्नी और यहां तक कि बच्चों के सामने गोली मारी थी। फरहान का बल्ले को एके 47 के अंदाज में थामना उन बुजदिल आतंकियों की याद दिला रहा था। ये पहलगाम पीड़ितों के जख्मों का बेशर्मी के साथ मखौल उड़ाना था।






