एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलेगी इंडिया, मैं दावे के साथ कह सकता हूं: केदार जाधव
पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता केदार जाधव ने कहा है कि एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम को यह मैच नहीं खेलना चाहिए और वह खेलेगी भी नहीं, यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं।

बीजेपी का दामन थाम चुके पूर्व क्रिकेटर केदार जाधव ने एशिया कप को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वह दावे के साथ कह सकते हैं कि भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी। दोनों टीमों के बीच 14 सितंबर को मैच होना है लेकिन जाधव की माने तो यह मैच होगा ही नहीं।
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इंडियन टीम को बिल्कुल खेलना नहीं चाहिए और खेलेगी भी नहीं, ये भी लग रहा है। जहां तक इंडिया का सवाल है, मुझे लगता है कि इंडिया जहां भी खेलेगी, हमेशा जीतेगी। आपने जो ये सवाल पूछा है, मुझे लगता है कि ये मैच बिल्कुल नहीं खेलना चाहिए और खेलेंगे भी नहीं, ये मैं दावे के साथ कह सकता हूं।'
ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते हुए जाधव ने कहा कि यह बहुत सफल रहा है। भारत घर में घुसेगा भी और मारेगा भी।
इस साल का एशिया कप टी20 फॉर्मेट में होगा। टूर्नामेंट 9 सितंबर से संयुक्त अरब अमीरात में शुरू होगा और 28 सितंबर को खत्म होगा। इसमें कुल 8 टीमें हिस्सा ले रही हैं जो दो ग्रुप में बंटी हैं।
भारत और पाकिस्तान दोनों ही ग्रुप ए में हैं। उनके अलावा इस ग्रुप में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात हैं। ग्रुप बी में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, हॉन्ग कॉन्ग और श्रीलंका हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में मुकाबला होना है।
इससे पहले दिग्गज पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बहिष्कार की मांग की है। उन्होंने सरहद पर तैनात जांबाजों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय टीम को यह मैच नहीं खेलना चाहिए।
अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर बर्बरता से हत्या की थी। उसके जवाब में मई में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के भीतर आतंकी अड्डों को तबाह कर दिया था। उससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों और यहां तक कि धर्मस्थलों तक को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की थी। भारत ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
जवाब में भारत ने मिसाइलों से पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों खासकर एयरबेस पर इतने सटीक हमले किए कि पड़ोसी देश घुटनों पर आ गया। पाकिस्तान के डीजीएमओ ने जब भारतीय समकक्ष के सामने सीजफायर की गुहार लगाई तब भारत उसके लिए तैयार हुआ लेकिन साथ में दो टूक कहा कि ऑपरेशन सिर्फ स्थगित हुआ है, खत्म नहीं।
लेखक के बारे में
Chandra Prakash Pandeyचन्द्र प्रकाश पाण्डेय वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में स्पोर्ट्स सेक्शन के इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव रखने वाले चन्द्र प्रकाश को जटिल विषयों का सरल विश्लेषण करने में महारत हासिल है। बचपन में न्यूज के प्रति ऐसा प्रेम हुआ कि रात में रेडियो पर न्यूज बुलेटिन के दौरान पढ़ाई-लिखाई का अभिनय करते लेकिन कान और दिल-दिमाग ध्वनि तरंगों पर अटका रहता। तब क्या पता था कि आगे चलकर न्यूज की दुनिया में ही रचना-बसना है। रेडियो में कभी काम तो नहीं किया लेकिन उस विधा के कुछ दिग्गज प्रसारकों संग टीवी न्यूज की दुनिया में कदमताल जरूर किया। चन्द्र प्रकाश पाण्डेय ने टीवी पत्रकारिता से शुरुआत की। पेशे में पहला दशक टीवी न्यूज के ही नाम रहा जहां उन्होंने 'न्यूज24', 'श्री न्यूज', 'फोकस न्यूज', 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' और भोजपुरी न्यूज चैनल 'हमार टीवी' में अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाएं निभाई। इस दौरान डेली न्यूज शो के साथ-साथ 'विनोद दुआ लाइव: आजाद आवाज' जैसे कुछ स्पेशल शो के लिए भी लेखन किया। अगस्त 2016 में उन्होंने 'नवभारत टाइम्स' के साथ डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में कदम रखा। NBT में उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिक्स, जियोपॉलिटिक्स, क्राइम, स्पोर्ट्स, कोर्ट से जुड़ी खबरों का लेखन-संपादन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों समेत महत्वपूर्ण विषयों पर कई स्पेशल सीरीज भी लिखी जिनमें लीगल न्यूज एक्सप्लेनर्स 'हक की बात' की एक लंबी श्रृंखला भी शामिल है। मार्च 2025 से वह लाइव हिंदुस्तान में शब्दाक्षरों के चौके-छक्के जड़ रहे हैं।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय मूल रूप से यूपी के देवरिया के रहने वाले हैं। गांव की मिट्टी में पलते-बढ़ते, खेत-खलिहान में खेलते-कूदते इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की। उसके बाद मैथमेटिक्स का छात्र 'राजनीति कला है या विज्ञान?' में उलझ गया। बी.ए. और बी. एड. की पढ़ाई के बाद पत्रकारिता की ओर रुझान बढ़ा और मॉस कम्यूनिकेशंस में मास्टर्स किया। अभी भी सीखने-समझने का सतत क्रम जारी है।
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